# दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा की एनएसए हिरासत पर 5 लाख रुपये मुआवजे का फैसला, नोएडा डीएम मेधा रूपम पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

> इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द करने और जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को गौतम बुद्ध नगर डीएम मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस कदम पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से जुर्माना बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की मांग की।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/delhi-university-ki-chhatra-ki-nsa-hirasata-para-5-lakha-rupaye-muavaje-ka-phaisala-noida-dm-medha-rupam-pahunchin-supreme-court-31875 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेधा रूपम, आकृति चौधरी, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, इलाहाबाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, नोएडा, सौरव दास, गौतम बुद्ध नगर

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को अवैध ठहराने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हाईकोर्ट ने न केवल छात्रा की लगभग पांच महीने की हिरासत को कानूनन गलत माना था, बल्कि पीड़ित छात्रा के पक्ष में 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। विशेष बात यह है कि अदालत ने यह वित्तीय जुर्माना सरकारी खजाने पर डालने के बजाय डीएम समेत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत सैलरी से वसूलने के कड़े निर्देश दिए थे।

## नोएडा प्रदर्शन से एनएसए हिरासत तक का पूरा घटनाक्रम
यह पूरा प्रकरण नोएडा क्षेत्र में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को नामजद करते हुए कड़े कानून एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। इस निरुद्धता के कारण आकृति चौधरी को लगभग पांच महीने तक हिरासत में रहना पड़ा। बाद में इस फैसले को कानूनी तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद 2 सितंबर को हाईकोर्ट की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए एनएसए के तहत की गई कार्रवाई को पूरी तरह से गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

## अधिकारियों के आचरण पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और मुआवजे का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिए अपने फैसले में प्रशासनिक अधिकारियों के आचरण और प्रक्रियात्मक कमियों पर बेहद सख्त टिप्पणियां की थीं। अदालत ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को इस प्रकार प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग के जरिए बाधित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि गैरकानूनी हिरासत के लिए जिम्मेदार अफसरों को ही इसका वित्तीय बोझ उठाना होगा। इसी मंशा से कोर्ट ने 5 लाख रुपये का मुआवजा तय किया और इसे दोषी पाए गए अधिकारियों की मासिक सैलरी से काटने का निर्देश जारी किया था।

## सुप्रीम कोर्ट अपील पर सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का तीखा हमला
नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम द्वारा हाईकोर्ट के इस आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए प्रशासनिक कदम का कड़ा विरोध किया। दास ने कहा कि इतने गंभीर और स्पष्ट अदालती फैसले के बाद भी जिलाधिकारी द्वारा ऊपरी अदालत में अपील दायर करना उनके निरंकुश रवैये को उजागर करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हर्जाने की राशि को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर देना चाहिए।

## सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का रुख और सुप्रीम कोर्ट में भावी सुनवाई
शीर्ष अदालत में इस मामले का पहुंचना पहले से तय माना जा रहा था, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी पहले ही संकेत दिए थे कि हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील की जाएगी। अब जब मेधा रूपम ने आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है, तब कानूनी बहस इस बिंदु पर केंद्रित होगी कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से जुर्माना लगाना उचित है। पूरे देश की नजरें अब सर्वोच्च अदालत के आने वाले रुख पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि हाईकोर्ट द्वारा अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही और सैलरी से कटौती के दिए गए आदेश पर रोक लगती है या उसे कायम रखा जाता है।

## इसका आप पर असर
यह कानूनी लड़ाई प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

- **भारत में:** यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो यह देश भर में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा एनएसए जैसे कड़े कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बड़ा नजीर बनेगा। इससे सरकारी कर्मचारियों में बिना ठोस कानूनी आधार के कार्रवाई करने पर व्यक्तिगत वेतन कटौती का डर पैदा होगा।
- **गौतम बुद्ध नगर में:** जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जनता की कड़ी नजर रहेगी। स्थानीय निवासियों और प्रदर्शनकारियों के लिए यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और पुलिसिया कार्रवाई के दौरान नागरिक अधिकारों के संरक्षण का प्रमुख उदाहरण बन गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, क्योंकि हाईकोर्ट ने प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी मानी थी।

- **कानूनी कार्रवाई की वजह:** इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की 5 महीने की एनएसए हिरासत को अवैध घोषित कर दिया था।
- **व्यक्तिगत वित्तीय बोझ:** हाईकोर्ट ने राज्य के खजाने के बजाय जिम्मेदार अफसरों और डीएम की व्यक्तिगत सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा वसूलने का आदेश दिया, जिसे चुनौती देना प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी समझा गया।
- **सरकार की विधिक रणनीति:** सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले ही स्पष्ट किया था कि राज्य प्रशासन इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में अपील करेगा ताकि अधिकारियों को व्यक्तिगत वित्तीय दायित्व से राहत मिल सके।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने और क्यों दाखिल की है?
गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें छात्रा आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द करते हुए अधिकारियों की सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

### 2. आकृति चौधरी का मामला क्या था और वह कितने समय तक हिरासत में रहीं?
दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को नोएडा में एक प्रदर्शन के सिलसिले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था और वह लगभग पांच महीने तक जेल में रही थीं।

### 3. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर के फैसले में क्या आदेश दिया था?
हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को फैसला सुनाते हुए आकृति की एनएसए हिरासत को अवैध घोषित कर दिया था और पीड़ित छात्रा को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था, जिसे जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत सैलरी से वसूलने को कहा गया था।

### 4. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास की क्या प्रतिक्रिया थी?
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि निरंकुश आदेश के बावजूद डीएम का अपील में जाना हैरानी की बात है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जुर्माने की राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की मांग की।

### 5. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सरकार का रुख क्या रहा है?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले ही शीर्ष अदालत को अवगत कराया था कि राज्य प्रशासन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा।

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