धान के पौधों पर दोपहर में यूरिया का छिड़काव करने से 50 प्रतिशत तक नुकसान, शाहजहांपुर के वैज्ञानिक ने बताई सही विधि धान की फसल में कड़क धूप के दौरान यूरिया छिड़कने से अमोनिया वाष्पीकरण के कारण आधी खाद हवा में उड़ जाती है। शाहजहांपुर में तैनात फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन के अनुसार, सही समय और नीम कोटेड यूरिया का प्रयोग कर किसान 90 प्रतिशत तक पोषण सुनिश्चित कर सकते हैं। धान की खेती में खाद प्रबंधन एक अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया है, जिस पर फसल की कुल पैदावार और किसान का मुनाफा सीधे तौर पर निर्भर करता है। अक्सर देखा जाता है कि किसान समय की बचत करने या अपनी सुविधानुसार दिन के किसी भी पहर खेत में यूरिया का छिड़काव कर देते हैं। हालांकि, कड़क धूप और दोपहर के समय यूरिया डालना खेत की सेहत और किसान की जेब दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। शाहजहांपुर में तैनात फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन के अनुसार, गलत समय पर यूरिया का प्रयोग करने से खाद का एक बड़ा हिस्सा पौधे तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाता है और फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। दोपहर की कड़क धूप में यूरिया का वाष्पीकरण और 50 प्रतिशत तक नुकसान जब दोपहर के समय सूरज की तेज किरणें खेत की सतह पर सीधी धूप आती है, तब मिट्टी का ताप अत्यधिक बढ़ जाता है। इस तप्त एवं नम जमीन के संपर्क में आते ही यूरिया रासायनिक प्रतिक्रिया करने लगता है। यूरिया तेजी से अमोनियम कार्बोनेट में परिवर्तित होता है और फिर अमोनिया गैस का रूप ले लेता है। इस पूरी प्रक्रिया को अमोनिया वाष्पीकरण यानी अमोनिया वॉलेटलाइजेशन कहा जाता है। हवा के तेज बहाव और गर्मी के कारण यह अमोनिया गैस वायुमंडल में उड़ जाती है। दोपहर की तेज धूप में छिड़काव करने से लगभग 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक यूरिया हवा में उड़कर बर्बाद हो जाता है, जिससे किसान की आधी मेहनत और लागत बेकार चली जाती है। पत्तियों के जलने और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होने का खतरा दोपहर में यूरिया छिड़कने का दूसरा बड़ा नुकसान पौधों की पत्तियों पर पड़ता है। जब यूरिया के दाने धान के पौधों की पत्तियों पर गिरते हैं और तेज धूप उन पर पड़ती है, तो रासायनिक क्रिया के कारण पत्तियां झुलस जाती हैं। पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण यानी भोजन बनाने की प्राकृतिक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। जब पत्तियां सही तरीके से भोजन नहीं बना पाती हैं, तो पौधा कमजोर होने लगता है और उसकी शारीरिक वृद्धि पूरी तरह रुक जाती है। नाइट्रोजन की पर्याप्त मात्रा न मिलने के कारण धान की बालियां कमजोर और छोटी रह जाती हैं, जिससे अंततः पैदावार में भारी गिरावट आती है। मिट्टी के मित्र कीटों की मौत और उपजाऊ क्षमता पर असर तेज गर्मी में यूरिया का छिड़काव मिट्टी के जैविक संतुलन को भी बिगाड़ देता है। कड़क धूप और यूरिया के एक साथ संपर्क में आने से मिट्टी की ऊपरी सतह का रासायनिक ढांचा अचानक बदल जाता है। इस कारण मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और जमीन को उपजाऊ बनाने वाले फायदेमंद बैक्टीरिया मरने लगते हैं। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी में पोषक तत्वों को बनाए रखने और जमीन की जैविक संरचना को स्वस्थ रखने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इनके नष्ट होने से खेत की प्राकृतिक उर्वरता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिसका असर आने वाली फसलों पर भी पड़ता है। पर्यावरण पर अमोनिया गैस और ग्रीनहाउस प्रभाव का दुष्प्रभाव यूरिया का गलत समय पर प्रयोग न केवल खेती को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा करता है। डॉ. हादी हुसैन के अनुसार, जब यूरिया वाष्पीकृत होकर अमोनिया गैस में बदलता है, तो वह सीधे आसपास के वायुमंडल में घुल जाता है। इससे हवा की गुणवत्ता खराब होती है और स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके अलावा, नाइट्रोजन का कुछ हिस्सा गैस बनकर उड़ता है जो ग्रीनहाउस प्रभाव को बढ़ाने में योगदान देता है। इस प्रकार, अनुचित समय पर किया गया छिड़काव पर्यावरण संतुलन को भी प्रभावित करता है। यूरिया छिड़कने का सही समय और 90 प्रतिशत पोषण पाने का तरीका फसल को यूरिया का पूरा लाभ दिलाने के लिए छिड़काव के समय पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि धान में यूरिया का छिड़काव सदा प्रातःकाल के समय या फिर संध्या काल में ही करना चाहिए, जब धूप का प्रभाव कम हो। यूरिया डालते समय खेत में हल्की नमी या पानी का होना आवश्यक है। कम तापमान और नमी के कारण यूरिया बिना वाष्पीकृत हुए तेजी से पानी में घुलकर पौधों की जड़ों तक पहुंच जाता है। सही समय और सही नमी के साथ छिड़काव करने पर पौधों को 90 प्रतिशत तक पोषण पूरी तरह मिल पाता है। नीम कोटेड यूरिया और विभाजित खुराक से अधिकतम लाभ उठाएं यूरिया की बर्बादी को पूरी तरह रोकने के लिए किसानों को नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है। नीम का तेल यूरिया के दानों पर चढ़ा होने के कारण यह धीमी गति से अवशोषित होता है और दीर्घकाल तक फसल को पोषण प्रदान करता है। इसके साथ ही, यूरिया की पूरी मात्रा को एक बार में डालने के बजाय दो से तीन बार में थोड़ा-थोड़ा करके देना चाहिए। यूरिया का छिड़काव करने के तुरंत बाद खेत में हल्का पानी लगाने से रासायनिक तत्व सीधे जड़ों की गहराई में समा जाते हैं, जिससे हवा में खाद उड़ने का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसका आप पर असर किसान भाइयों के लिए: तेज धूप में यूरिया डालने से 30% से 50% तक खाद बेकार चली जाती है, जिससे लागत बढ़ती है और पैदावार घटती है। सुबह या शाम के समय नमी वाले खेत में यूरिया डालने से पौधों को 90% तक पोषण मिलता है और फसल सुरक्षित रहती है। सवाल-जवाब 1. धान की फसल में दोपहर के समय यूरिया डालना क्यों नुकसानदायक है? दोपहर की तेज धूप और गर्म मिट्टी के संपर्क में आते ही यूरिया अमोनियम कार्बोनेट और फिर अमोनिया गैस में बदल जाता है, जिससे 30% से 50% तक खाद हवा में उड़कर नष्ट हो जाती है। 2. यूरिया पत्तियों पर चिपकने से पौधों को क्या क्षति पहुंचती है? तेज धूप में पत्तियों पर चिपके यूरिया के दाने पत्तियों को जलाकर भूरे धब्बे बना देते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित होती है और पौधे का विकास रुक जाता है। 3. धान के खेत में यूरिया छिड़कने का सबसे उपयुक्त समय कौन सा है? यूरिया हमेशा सुबह के समय या शाम के वक्त ही छिड़कना चाहिए जब धूप कम हो और खेत में हल्की नमी या पानी उपलब्ध हो। 4. यूरिया की बर्बादी रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने क्या उपाय सुझाए हैं? वैज्ञानिकों के अनुसार नीम कोटेड यूरिया का प्रयोग करें, पूरी मात्रा को दो से तीन बार में थोड़ा-थोड़ा करके दें और छिड़काव के बाद तुरंत हल्का पानी लगाएं। 5. गलत समय पर यूरिया डालने से मिट्टी और पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है? तेज गर्मी में यूरिया डालने से मिट्टी के मित्र कीट और फायदेमंद बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं जिससे उपजाऊ क्षमता घटती है, तथा निकलने वाली अमोनिया गैस वायु प्रदूषण बढ़ाती है। https://trendkia.com/national/dhana-ke-paudhon-para-dopahara-men-yuriya-ka-chhirakava-karane-se-50-pratishata-taka-nukasana-shahjahanpur-ke-vaijnanika-ne-batai--17038 TrendKia — Har trend, sabse pehle.