डीएचएफएल मामले में 1 करोड़ रुपये की घूसखोरी का भंडाफोड़, सीबीआई ने एसएफआईओ के डिप्टी डायरेक्टर और वकील को दबोचा डीएचएफएल घोटाले की जांच के दौरान राहत देने के नाम पर 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई ने एसएफआईओ के 2017 बैच के आईआरएस अधिकारी समेत तीन लोगों को पकड़ा है। पहली किस्त के तौर पर 20 लाख रुपये का लेन-देन होते ही जांच एजेंसी ने यह कानूनी कार्रवाई की। वित्तीय धोखाधड़ी की गंभीर जांच में राहत पहुंचाने का झांसा देकर भारी-भरकम रिश्वत मांगने के एक बड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सख्त रुख अपनाया है। जांच एजेंसी ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी डीएचएफएल से जुड़े वित्तीय घोटाले की पड़ताल कर रहे सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को घूस मांगने के आरोप में पकड़ा है। इस पूरी कार्रवाई में एसएफआईओ के डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक अधिवक्ता और उनके एक पारिवारिक रिश्तेदार को भी हिरासत में लिया गया है। इस पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण के कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद सुनियोजित तरीके से यह धरपकड़ की गई। जांच में मदद के बदले 1 करोड़ रुपये की मांग का आरोप इस पूरे मामले की जड़ें चेन्नई में चल रही एसएफआईओ की उस जांच से जुड़ी हैं, जो डीएचएफएल घोटाले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही थी। इस आधिकारिक छानबीन के दौरान शिकायतकर्ता को अनुकूल कानूनी लाभ देने और मामले में रियायत पहुंचाने के एवज में कुल 1 करोड़ रुपये की भारी रकम की मांग रखी गई थी। जब यह गैरकानूनी मांग सामने आई, तब एसएफआईओ के जिम्मेदार जांच अधिकारी, दिल्ली के वकील और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का गंभीर मामला दर्ज हुआ। इसके तुरंत बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले के आरोपियों को रंगे हाथ दबोचने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की। 20 लाख रुपये की पहली किस्त लेते ही शिकंजे में आए आरोपी शिकायतकर्ता द्वारा दी गई जानकारी की प्रारंभिक पुष्टि करने और औपचारिक केस दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी के अधिकारियों ने आरोपियों को पकड़ने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया। तय सौदे के अनुसार, दिल्ली के अधिवक्ता ने चेन्नई में तैनात एसएफआईओ अधिकारी की ओर से रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20 लाख रुपये की नकद राशि शिकायतकर्ता से प्राप्त की। जैसे ही इस शुरुआती रकम का लेन-देन पूरा हुआ, पहले से मुस्तैद जांच टीम ने तुरंत दबिश देकर अधिवक्ता, उनके रिश्तेदार और संबंधित एसएफआईओ अधिकारी को अपनी गिरफ्त में ले लिया। तीनों आरोपियों के खिलाफ रिश्वतखोरी का पुख्ता मामला बनाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की आधिकारिक पहचान केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जारी विवरण के अनुसार, पकड़े गए व्यक्तियों में सरकारी तंत्र का एक महत्वपूर्ण अधिकारी और कानूनी पेशे से जुड़े लोग शामिल हैं। मुख्य आरोपी हरीश कुमार तंवर हैं, जो एसएफआईओ चेन्नई के कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर स्तर के पद पर पदस्थ हैं और वे 2017 बैच के भारतीय राजस्व सेवा यानी आईआरएस अधिकारी हैं। इस गैरकानूनी लेन-देन में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे दूसरे आरोपी भरत शर्मा हैं, जो दिल्ली में वकालत करते हैं। वहीं तीसरे पकड़े गए व्यक्ति आर्यन शर्मा हैं, जो वकील भरत शर्मा के रिश्तेदार बताए गए हैं। ठिकानों पर छापेमारी और आपत्तिजनक दस्तावेजों की जब्ती गिरफ्तारी की कार्रवाई संपन्न करने के तुरंत बाद जांच एजेंसी ने इस नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने के लिए आरोपियों से जुड़े परिसरों पर व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। सरकारी अधिकारी और निजी वकील के विभिन्न ठिकानों पर की गई इस सघन छापेमारी के दौरान मामले से संबंधित कई महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सामग्रियों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि क्या इस तरह की सौदेबाजी में कोई अन्य व्यक्ति या अधिकारी भी परोक्ष रूप से शामिल था। इसका आप पर असर जांच एजेंसियों के भीतर भ्रष्टाचार पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई से सफेदपोश अपराधों की जांच में पारदर्शिता और शिकायतकर्ताओं के विश्वास को मजबूती मिलती है। • भारत में: आर्थिक अपराधों की पड़ताल कर रही शीर्ष संस्थाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश देती है। इससे बड़े वित्तीय घोटालों के पीड़ितों को यह भरोसा मिलता है कि जांच अधिकारी अनैतिक लाभ के जरिए मामलों को दबा नहीं सकेंगे। • चेन्नई और दिल्ली में: इन दोनों महानगरों में कार्यरत कानूनी और वित्तीय पेशेवरों के लिए यह गिरफ्तारी एक सख्त चेतावनी है। जांच से जुड़े मामलों में मध्यस्थता या गैरकानूनी राहत की पेशकश करने वाले गिरोहों पर कानून प्रवर्तन का शिकंजा और कसेगा। • कॉर्पोरेट जांच के दायरे में: वित्तीय अनियमितताओं की जांच का सामना कर रही कंपनियों और प्रमोटरों को अनाधिकृत व्यक्तियों के बहकावे में आने से बचना होगा। किसी भी प्रकार की रिश्वत की मांग होने पर आधिकारिक सतर्कता तंत्र से सीधा संपर्क साधना ही सुरक्षित विकल्प है। • शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा: अनुचित दबाव या घूसखोरी की मांग का सामना कर रहे नागरिकों के लिए यह मामला साबित करता है कि पुख्ता शिकायत पर केंद्रीय एजेंसियां त्वरित जाल बिछाती हैं। कानूनी अधिकारों का सहारा लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना पूरी तरह प्रभावी सिद्ध हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह कानूनी कार्रवाई तब शुरू हुई जब एक बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड की आधिकारिक छानबीन के दौरान जांच को प्रभावित करने के लिए अनुचित धन की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने कानून के दायरे में रहकर केंद्रीय एजेंसी को इस सौदेबाजी की लिखित सूचना दी, जिससे इस आपराधिक साजिश का पर्दाफाश हुआ। • सीधा कारण: चेन्नई में एसएफआईओ की डीएचएफएल जांच के दौरान आरोपी अधिकारी द्वारा मामले में अनुचित लाभ देने के बदले 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इस अनुचित मांग के खिलाफ शिकायतकर्ता ने सीधे सीबीआई का रुख कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। • साजिश और माध्यम: रिश्वत की रकम को सुरक्षित रूप से वसूलने के लिए दिल्ली के एक वकील और उनके रिश्तेदार को मध्यस्थ बनाया गया था। पहली किस्त के तौर पर तय किए गए 20 लाख रुपये नकद स्वीकार करते ही पूरा नेटवर्क बेनकाब हो गया। • एजेंसी की सतर्कता: शिकायत के प्राथमिक सत्यापन में आरोप सही पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ। इसके तुरंत बाद वैज्ञानिक और जमीनी निगरानी का जाल बिछाकर आरोपियों को लेन-देन के वक्त ही रंगे हाथों पकड़ा गया। सवाल-जवाब 1. सीबीआई ने किस विभाग के अधिकारी को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है? सीबीआई ने सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) के डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी को गिरफ्तार किया है। 2. इस मामले में कुल कितनी रिश्वत की मांग की गई थी? मामले में जांच के दौरान अनुकूल लाभ पहुंचाने के बदले कुल 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। 3. सीबीआई ने आरोपियों को कितनी रकम की पहली किस्त लेते हुए पकड़ा? सीबीआई ने बिछाए गए जाल में आरोपियों को 20 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। 4. गिरफ्तार किए गए मुख्य अधिकारी का नाम और पद क्या है? मुख्य आरोपी हरीश कुमार तंवर हैं, जो एसएफआईओ चेन्नई में डिप्टी डायरेक्टर हैं और 2017 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। 5. इस मामले में सरकारी अधिकारी के अलावा और कौन लोग पकड़े गए हैं? सरकारी अधिकारी के साथ दिल्ली के वकील भरत शर्मा और उनके रिश्तेदार आर्यन शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। 6. यह रिश्वतखोरी का मामला किस मुख्य वित्तीय घोटाले की जांच से जुड़ा हुआ था? यह पूरा मामला डीएचएफएल (दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड) घोटाले की जांच से जुड़ा हुआ था। https://trendkia.com/national/dhfl-mamale-men-1-karora-rupaye-ki-ghusakhori-ka-bhndaphora-cbi-ne-sfio-ke-dipti-dayarektara-aura-vakila-ko-dabocha-47850 TrendKia — Har trend, sabse pehle.