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  "title": "दिशा सालियन मृत्यु जांच याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, आदित्य ठाकरे के वकील ने दी राजनीतिक द्वेष की दलील",
  "summary": "बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियन की मौत की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई में आदित्य ठाकरे के वकील ने याचिका को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया।",
  "content": "दिशा सालियन की मृत्यु की जांच की मांग करने वाली याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। शुक्रवार को हुई इस अहम सुनवाई में राज्य सरकार और शिवसेना (यूबीटी) नेता व विधायक आदित्य ठाकरे की ओर से प्रस्तुत वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे के पक्षकार वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला ने याचिका की कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि यह याचिका कानून और तथ्यों की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है और इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत दायर किया गया है।\n\nअदालत ने दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा\nउच्च न्यायालय में हुई इस सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी विस्तृत दलीलें पेश कीं। राज्य सरकार के अभियोजन पक्ष द्वारा अपनी जांच प्रक्रिया का ब्योरा दिए जाने के बाद, आदित्य ठाकरे की ओर से वरिष्ठ वकील सुदीप पसबोला ने अपना पक्ष रखा। सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान हाईकोर्ट की पीठ ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कई सवाल भी किए। सभी पक्षों की ओर से मौखिक बहस और जवाब दाखिल होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया। अब इस चर्चित मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आने का इंतजार किया जा रहा है।\n\nयाचिका के कानूनी आधार और राजनीतिक मंशा पर उठाए सवाल\nआदित्य ठाकरे का प्रतिनिधित्व करते हुए सुदीप पसबोला ने याचिका में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने दलील दी कि याचिका में दिए गए दावे तथ्यात्मक और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं। पसबोला ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों ने इस दुखद घटना का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास किया है। अदालत में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने राजनीतिक विरोधियों का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने राणे और उनके बच्चों का भी नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेष के चलते इस मामले को लगातार तूल दिया गया है और याचिका का मुख्य उद्देश्य न्याय पाने के बजाय राजनीतिक लाभ हासिल करना है।\n\nपोस्टमार्टम रिपोर्ट और CrPC की धारा 174 के तहत जांच पर हुई चर्चा\nसुनवाई के समय मामले से जुड़े चिकित्सीय और जांच दस्तावेजों पर विस्तृत चर्चा की गई। अदालत के समक्ष दिशा सालियन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उनके चेहरे पर आई चोटों के निशान और पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के रिकॉर्ड पेश किए गए। इसके साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की धारा 174 के तहत पुलिस द्वारा संपन्न की गई जांच प्रक्रिया की समीक्षा भी की गई। आदित्य ठाकरे के कानूनी दल ने यह दलील दी कि पुलिस की ओर से धारा 174 के अंतर्गत आवश्यक जांच पूरी की जा चुकी है, इसलिए बिना किसी नए ठोस तथ्य के इस जांच को फिर से खोलने की मांग बेबुनियाद है।\n\nपीड़ित परिवार के प्रति संवेदना और मामले को समाप्त करने की अपील\nबहस के दौरान सुदीप पसबोला ने आदित्य ठाकरे की ओर से दिशा सालियन के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे को दिशा सालियन के पिता और उनके परिजनों के प्रति पूरी सहानुभूति है। अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि एक युवा लड़की की असमय और दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उस पर अब विराम लगना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीड़िता के परिवार को इस विवाद से मुक्ति पाने और इस मामले को समाप्त करने का अधिकार मिलना चाहिए। रक्षा पक्ष ने अदालत से आग्रह किया कि निराधार आरोपों से घिरी इस याचिका को खारिज किया जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग रोका जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले का राज्य के राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रमों पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• कानूनी स्थिति पर: बॉम्बे हाईकोर्ट का आगामी निर्णय यह तय करेगा कि दिशा सालियन मामले में दोबारा जांच की आवश्यकता है या नहीं। यदि याचिका खारिज होती है तो कानूनी कार्यवाही को विराम मिलेगा।\n• राजनीतिक असर पर: इस मामले में अदालत के फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे आरोपों-प्रत्यारोपों पर विराम लग सकता है या नई चर्चा शुरू हो सकती है।\n• प्रक्रियात्मक पहलू पर: पुलिस द्वारा CrPC की धारा 174 के तहत की गई जांच की विश्वसनीयता पर अदालत की मुहर लगेगी।\n• जनता के दृष्टिकोण से: इस मामले में न्यायपालिका का रुख सार्वजनिक बहस और मीडिया आख्यानों को स्पष्टता प्रदान करेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बॉम्बे हाईकोर्ट ने किस मामले में फैसला सुरक्षित रखा है?\nअदालत ने दिशा सालियन की मृत्यु की जांच से संबंधित दायर याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।\n\n2. आदित्य ठाकरे की ओर से अदालत में किसने पक्ष रखा?\nशिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला ने हाईकोर्ट में दलीलें पेश कीं।\n\n3. बचाव पक्ष ने याचिका के बारे में क्या दलील दी?\nवकील सुदीप पसबोला ने कहा कि याचिका कानून और तथ्यों के आधार पर टिकाऊ नहीं है तथा इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत दायर किया गया है।\n\n4. सुनवाई के दौरान किन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई?\nसुनवाई के दौरान दिशा सालियन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चेहरे पर लगी चोटों और CrPC की धारा 174 के तहत पुलिस जांच पर चर्चा की गई।\n\n5. आदित्य ठाकरे के पक्ष ने पीड़ित परिवार के बारे में क्या कहा?\nठाकरे के वकील ने कहा कि उन्हें दिशा सालियन के पिता और परिवार के प्रति पूरी संवेदना है और इस मामले को समाप्त किया जाना चाहिए।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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