# दिसंबर में ढाका लौट सकती हैं शेख हसीना, वापसी पर जनसैलाब उमड़ने और सत्ता समीकरण बदलने का बड़ा दावा

> बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों के मुताबिक उनकी वापसी से देश के मौजूदा शक्ति संतुलन, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/disnbara-men-dhaka-lauta-sakati-hain-sheikh-hasina-vapasi-para-janasailaba-umarane-aura-satta-samikarana-badalane-ka-bara-dava-41291 · **Language:** Hindi
**Tags:** शेख हसीना, बांग्लादेश, शोएब चौधरी, ढाका, भारत बांग्लादेश संबंध, साइमा वाजेद, अवामी लीग

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिसंबर के महीने में स्वदेश वापसी की संभावनाओं ने पड़ोसी मुल्क की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। ब्लिट्ज के संपादक शोएब चौधरी ने एक विशेष बातचीत के दौरान दावा किया है कि यदि शेख हसीना वापस ढाका की सरजमीं पर कदम रखती हैं, तो वहां एक बहुत बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। उन्होंने 5 अगस्त 2024 को हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से बांग्लादेश के भीतर उभरे आर्थिक संकट, सामाजिक असुरक्षा और लोकतांत्रिक ढांचे में आई गिरावट पर विस्तार से अपनी राय रखी।

## 5 अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश की बदली हुई जमीनी हकीकत
साल 2009 से लेकर 2024 के शुरुआती महीनों तक बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था लगातार तेजी से आगे बढ़ रही थी। उस दौर में वैश्विक मंच पर बांग्लादेश को एक उभरते हुए आर्थिक सितारे के रूप में पहचाना जाने लगा था। शोएब चौधरी के अनुसार, उस विकास काल के दौरान बांग्लादेश की GDP वृद्धि दर एक वक्त ऐसी ऊंचाई पर पहुंच गई थी कि उसने भारत की विकास दर को भी पीछे छोड़ दिया था।

हालांकि, 5 अगस्त 2024 की घटनाओं के बाद मुल्क की दिशा पूरी तरह बदल गई। उनका तर्क है कि इसके बाद देश को जानबूझकर पीछे धकेलने की कोशिशें हुईं, जिसके सीधे परिणाम के रूप में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भारी आघात पहुंचा। सामाजिक ढांचे में आई विकृति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों के हाथों में हथियार और धारदार चाकू थमा दिए गए। जो युवा कल तक शिक्षा हासिल कर रहे थे, उन्हें हिंसा और अपराध के रास्ते पर धकेल दिया गया। मौजूदा समय में बांग्लादेश के अंदर सरेआम जबरन वसूली, छिनैती, चोरी, डकैती और कत्ल जैसी संगीन वारदातों में अप्रत्याशित उछाल देखा जा रहा है।

## करीब एक करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट और महंगाई की मार
शोएब चौधरी ने रेखांकित किया कि पिछले वर्षों में जब आर्थिक प्रगति हो रही थी, तब बड़े पैमाने पर युवाओं और नागरिकों के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे थे। इसके विपरीत मौजूदा हालात में रोजगार सृजन पूरी तरह ठप हो चुका है। उनका दावा है कि इस राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता की वजह से बांग्लादेश में लगभग एक करोड़ लोग बेरोजगार हो चुके हैं।

बेरोजगारी के इस विकराल संकट के साथ-साथ आम जनता महंगाई और आसमान छूते बिजली बिलों के बोझ तले दब चुकी है। उन्होंने बताया कि विगत दो वर्षों में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़े हैं और बिजली आपूर्ति का खर्च आम परिवारों के बजट से बाहर हो गया है। अपने पारिवारिक बजट का प्रत्यक्ष उदाहरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जिस घर का मासिक खर्च पहले करीब 30 हजार टका आता था, आज उसी परिवार का घरेलू खर्च बढ़कर 75 हजार टका प्रति माह तक पहुंच गया है।

## ईंधन की दरों में भारी उछाल और पाकिस्तान जैसी बदहाली की तुलना
ईंधन बाजार का हाल भी बेहद खस्ता है। पिछले सात महीनों के भीतर पेट्रोलियम की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 45 टका की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। अभी के समय में बांग्लादेश के भीतर एक लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 160 टका पर पहुंच चुकी है, जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 124.94 रुपये बैठती है।

इस कमरतोड़ महंगाई, काम-धंधों के खात्मे और बेरोजगारी के कारण कामकाजी वर्ग, मध्यम वर्ग, छोटे कारोबारी और वेतनभोगी तबके का जीना मुहाल हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि किसी भी आम नागरिक को यह भरोसा नहीं रह गया है कि सुबह काम के सिलसिले में घर से निकलने के बाद वह शाम को सकुशल वापस लौटेगा या नहीं। बांग्लादेश के इन बदतर आंतरिक हालात की तुलना उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा बदहाली और असुरक्षा से की। उनका मानना है कि जनता के भीतर इसी असुरक्षा और आर्थिक तंगी के चलते गहरा गुस्सा पनप रहा है, जिससे वे लोग भी अब शेख हसीना की वापसी की मांग करने लगे हैं जो पहले उनके खिलाफ नारे लगाते थे।

## वापसी के दिन सड़कों पर तूफानी जनसैलाब का अनुमान
शेख हसीना की वतन वापसी के संभावित पहले दिन के परिदृश्य पर चर्चा करते हुए शोएब चौधरी ने कहा कि वह दिन पूरे बांग्लादेश के लिए किसी भारी राजनीतिक तूफान जैसा साबित होगा। उनका मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री के बांग्लादेश की धरती पर पैर रखते ही लाखों-करोड़ों समर्थकों का हुजूम सड़कों पर उमड़ पड़ेगा।

उन्होंने सांख्यिकीय समीकरण रखते हुए कहा कि देश की 18 करोड़ की कुल आबादी में से कम से कम 40 प्रतिशत जनता आज भी शेख हसीना की निष्ठावान समर्थक है। अगर इस 40 प्रतिशत आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपने घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आता है, तो मुल्क में एक अप्रत्याशित शक्ति संतुलन बन जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह दावा भी किया कि उस अभूतपूर्व जनज्वार के सामने शेख हसीना को गिरफ्तार करने या उनके विरुद्ध कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने का माद्दा न तो किसी मौजूदा सरकार में होगा और न ही जमात के संगठनों में रहेगा।

## पाकिस्तान का रुख, रूपपुर परमाणु संयंत्र और अमेरिका का नजरिया
क्षेत्रीय राजनीति और बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप पर बोलते हुए शोएब चौधरी ने पाकिस्तान और अमेरिका के संदर्भ में कई गंभीर बिंदु उठाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा अस्थिर स्थिति के पीछे पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र का अहम उदाहरण दिया, जिसे रूस की मदद से तैयार किया जा रहा है। पाकिस्तान ने इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए अत्यंत आवश्यक यूरेनियम ले जा रहे विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा उनका दावा है कि इस्लामाबाद बांग्लादेश में BNP के पक्ष में नहीं है, बल्कि वह जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव को सत्ता में देखना चाहता है।

वहीं अमेरिका के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन को भी अब इस बात का बखूबी अहसास हो चुका है कि भारत की मजबूत मौजूदगी और प्रभाव के रहते बांग्लादेश के मामले में एकतरफा हस्तक्षेप करना कतई संभव नहीं है।

## कूटनीतिक संतुलन में भारत का प्रभाव और भविष्य का नेतृत्व
शोएब चौधरी का मानना है कि शेख हसीना के समर्थन में भारत की स्थिति बेहद सुदृढ़ है और बांग्लादेश के भविष्य के निर्धारण में नई दिल्ली की भूमिका निर्णायक रहेगी। उन्होंने हालिया BRICS शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत ने इस वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक धमक मजबूती से दर्ज कराई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे शीर्ष वैश्विक नेताओं की मौजूदगी के बीच भारत ने अपने रुख को बिल्कुल स्पष्ट रखा। पूरी दुनिया अब भारत की विदेश नीति की परिपक्वता को समझ रही है, क्योंकि भारत शांति और रणनीतिक धैर्य के साथ अपने हितों पर आगे बढ़ता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा संकटग्रस्त दौर से बांग्लादेश को बाहर निकालने में भारत ही सबसे महत्वपूर्ण मददगार साबित हो सकता है। जब देश में स्थिरता बहाल होगी, तब शेख हसीना दोबारा व्यवस्था को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी संभालेंगी। उत्तराधिकार के सवाल पर जब यह पूछा गया कि शेख हसीना के बाद उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय या उनकी बेटी साइमा वाजेद में से किसे नेतृत्व की कमान संभालनी चाहिए, तो शोएब चौधरी ने अपनी निजी राय रखते हुए कहा कि साइमा वाजेद इस भूमिका के लिए अधिक उपयुक्त हैं। उनके अनुसार, साइमा वाजेद बेहद सक्षम हैं, उनका आचरण और व्यक्तित्व पूरी तरह पारंपरिक बंगाली संस्कृति से जुड़ा हुआ है और वे स्थानीय भाषा व जनमानस को गहराई से समझती हैं।

## इसका आप पर असर
बांग्लादेश की अंदरूनी राजनीति में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर दक्षिण एशियाई सुरक्षा, सीमावर्ती व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ता है।

- **भारत में:** भारत की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और द्विपक्षीय व्यापारिक गलियारों पर इस राजनीतिक घटनाक्रम का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। नई दिल्ली की कूटनीति इस पूरे क्षेत्र में शांति बहाली और चरमपंथी ताकतों के नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
- **बांग्लादेश में:** आम नागरिकों के लिए यह घटनाक्रम कानून व्यवस्था की स्थिति में संभावित बदलाव और बाजार की स्थिरता से जुड़ा हुआ है। लगभग एक करोड़ बेरोजगारों और महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए स्थिर शासन व्यवस्था दैनिक खर्चों और सुरक्षा में सुधार ला सकती है।
- **कामकाजी और व्यापारिक वर्ग:** सीमा पार निर्यात और स्थानीय खुदरा कारोबार करने वाले व्यापारियों को राजनीतिक अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद बंध सकती है। अनिश्चित माहौल में बंद पड़े निवेश और परियोजनाएं फिर से पटरी पर आ सकती हैं।
- **क्षेत्रीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचा:** रूपपुर परमाणु ऊर्जा केंद्र जैसी विशाल परियोजनाओं के पूरा होने पर वहां के ऊर्जा संकट को दूर करने में मदद मिल सकती है। बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित होने से बिजली की किल्लत और ऊंचे बिलों से राहत मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 के बाद उभरे गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे पुरानी सरकार की वापसी की चर्चाओं को बल मिला है।

- **आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी:** सत्ता परिवर्तन के बाद देश में करीब एक करोड़ लोग बेरोजगार हो गए और आवश्यक वस्तुओं के साथ ईंधन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। घरेलू खर्च दोगुने से अधिक हो जाने के कारण जनता के भीतर मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ भारी असंतोष पैदा हुआ है।
- **बिगड़ती कानून व्यवस्था और असुरक्षा:** आम नागरिकों के हाथों में हथियार आ जाने से हत्या, लूटपाट, जबरन वसूली और छिनैती के मामलों में भारी इजाफा देखा गया। सुरक्षा का भरोसा टूटने से लोग पहले के तुलनात्मक रूप से सुरक्षित दौर को याद करने लगे हैं।
- **विदेशी ताकतों की भूमिका और कूटनीतिक तनाव:** रूपपुर परमाणु संयंत्र के यूरेनियम परिवहन में पाकिस्तान द्वारा हवाई क्षेत्र न दिए जाने और जमात-ए-इस्लामी को बढ़ावा देने की कोशिशों ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्पष्ट और मजबूत कूटनीतिक स्थिति ने भी जमीनी समीकरणों को प्रभावित किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर क्या दावा किया गया है?
दावा किया गया है कि शेख हसीना दिसंबर में स्वदेश लौट सकती हैं और उनकी वापसी से देश में बड़ा राजनीतिक तूफान और बदलाव आ सकता है।

### 2. बांग्लादेश में वर्तमान में बेरोजगारी की क्या स्थिति बताई गई है?
5 अगस्त 2024 के बाद देश में आर्थिक नुकसान के चलते करीब एक करोड़ लोगों के बेरोजगार होने की बात कही गई है।

### 3. बांग्लादेश में पेट्रोल की मौजूदा कीमत कितनी है?
बांग्लादेश में पेट्रोल की कीमत लगभग 160 टका प्रति लीटर है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 124.94 रुपये के बराबर बैठती है।

### 4. शेख हसीना के पास कितने प्रतिशत आबादी का समर्थन होने का दावा है?
देश की 18 करोड़ की कुल आबादी में से लगभग 40 प्रतिशत लोगों का समर्थन शेख हसीना के साथ होने का अनुमान लगाया गया है।

### 5. रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर क्या विवाद सामने आया?
रूस द्वारा निर्मित रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए जरूरी यूरेनियम ले जा रहे विमान को पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी थी।

### 6. शेख हसीना के बाद नेतृत्व के लिए किसका नाम आगे बताया गया है?
शोएब चौधरी के अनुसार, शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद अपनी सक्षमता और बंगाली संस्कृति से जुड़ाव के कारण भविष्य के नेतृत्व के लिए अधिक उपयुक्त हैं।

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