Droupadi Murmu का 68वां जन्मदिन: संघर्षों से जीतकर राष्ट्रपति भवन तक का प्रेरणादायक सफर 20 जून को अपना जन्मदिन मनाने जा रही Droupadi Murmu की कहानी एक आदिवासी गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में गहरे दुखों का सामना करते हुए खुद को संभालना और आगे बढ़ना सीखा। शुरुआती जीवन और शिक्षा Droupadi Murmu का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। वह एक संथाल आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते बेहद सीमित थे, लेकिन Droupadi Murmu ने शिक्षा को अपने विकास का आधार बनाया। उन्होंने उपरबेड़ा प्राथमिक विद्यालय से अपनी नींव रखी और आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर का रुख किया। वह अपने गांव की पहली ऐसी महिला बनीं जिन्होंने मैट्रिक और उसके बाद स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1979 में उन्होंने भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। 1980 में उनका विवाह बैंक अधिकारी Shyam Charan Murmu के साथ हुआ। व्यक्तिगत त्रासदियों का सामना TrendKia के अनुसार, Droupadi Murmu का जीवन अत्यधिक व्यक्तिगत दुखों से भरा रहा है। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने 25 वर्षीय बेटे को खो दिया, जिसने उन्हें गहरे डिप्रेशन में धकेल दिया। इससे उबरने की कोशिश के बीच ही 2013 में उनके दूसरे बेटे का भी निधन हो गया। इसके बाद उनकी मां और भाई का भी देहांत हो गया, और अंततः 2014 में उनके पति Shyam Charan Murmu ने भी दुनिया छोड़ दी। इन झटकों ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आध्यात्म और सेवा भाव इन विकट परिस्थितियों में खुद को स्थिर करने के लिए Droupadi Murmu ने आध्यात्म का सहारा लिया और ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ीं। योग और आत्मचिंतन को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर उन्होंने न केवल अवसाद को मात दी, बल्कि अपनी दुखों को प्रेरणा में बदल दिया। यही दृढ़ता उन्हें एक संवेदनशील और सशक्त नेतृत्वकर्ता बनाती है। राजनीतिक सफर की शुरुआत Droupadi Murmu के राजनीतिक सफर की नींव 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत के चुनाव से पड़ी, जहां वह पार्षद चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2000 में ओडिशा में भाजपा-बीजेडी सरकार के दौरान उन्हें मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे अहम विभाग संभाले। वर्ष 2007 में उन्हें 'पंडित नीलकंठ दास-सर्वश्रेष्ठ विधायक' सम्मान मिला। वह 2000 और 2009 में रायरंगपुर से विधायक चुनी गईं। बाद में, 2015 में वह झारखंड की राज्यपाल बनीं, जो किसी भी आदिवासी नेता के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। उन्होंने 2021 तक वहां सेवा दी। इसका आप पर असर सभी भारतीयों के लिए: Droupadi Murmu का जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद धैर्य और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति जीवन के उच्चतम लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। सवाल-जवाब 1. Droupadi Murmu का जन्म कब और कहाँ हुआ था? Droupadi Murmu का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। 2. उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई कहाँ से की? उन्होंने अपनी स्नातक की डिग्री भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से प्राप्त की। 3. राजनीति में उनकी शुरुआत कैसे हुई? उन्होंने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 4. झारखंड की राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल क्या था? वह 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल रहीं। https://trendkia.com/national/droupadi-murmu-ka-68van-janmadina-sngharshon-se-jitakara-rashtrapati-bhavana-tak-1866 TrendKia — Har trend, sabse pehle.