# दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गाय और भैंस की देखभाल में डॉ. संजीव नेहरू के बताए उपाय करें शामिल

> गाय और भैंस में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित आहार, ताजा पानी, समय पर टीकाकरण और पेट के कीड़ों की दवा देना बेहद जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/dudha-utpadana-barhane-ke-lie-gaya-aura-bhainsa-ki-dekhabhala-men-dr-sanjeev-nehru-ke-batae-upaya-karen-shamila-32631 · **Language:** Hindi
**Tags:** दूध उत्पादन, पशुपालन, गाय भैंस देखभाल, मिनरल मिक्सचर, पशु चिकित्सा

गाय और भैंस के दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आना पशुपालकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय होता है। कई बार सही खानपान, स्वच्छता और उचित दिनचर्या की अनदेखी के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। आगरा के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू ने पशुपालकों को सलाह दी है कि अगर वे अपने गाय और भैंस का स्वास्थ्य बेहतर रखने के साथ-साथ दूध उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें दैनिक रखरखाव और पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा। सही समय पर सही देखभाल से न केवल पशु स्वस्थ रहते हैं बल्कि उनकी दूध उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है।

## पर्याप्त जल आपूर्ति और संतुलित आहार का महत्व
पशुओं के शरीर में पोषण और तरल पदार्थों का सही संतुलन बनाए रखना दूध उत्पादन का सबसे पहला नियम है। डॉ. संजीव नेहरू के मुताबिक पशुओं को दिनभर स्वच्छ और ताजा पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पानी की कमी से पशुओं में डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिसका सीधा असर दूध की मात्रा पर पड़ता है। इसके साथ ही पशुओं को हमेशा ताजा, साफ और सुरक्षित हरा चारा खिलाना चाहिए। हरे चारे के साथ संतुलित आहार देने से पशुओं को सभी आवश्यक पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं।

## खनिज मिश्रण और नमक का सही इस्तेमाल
केवल हरा चारा देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों का होना भी उतना ही जरूरी है। पशुओं के शरीर में खनिज तत्वों की पूर्ति के लिए चारे में मिनरल मिक्सचर मिलाना आवश्यक है। इसके लिए पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार उचित मात्रा में खनिज मिश्रण शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, पशुओं के रहने के स्थान पर नमक का ढेला रखा जा सकता है, जिसे पशु अपनी आवश्यकता के अनुसार चाट लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नमक का ढेला केवल चाटने के लिए है, यह पानी की कमी या डिहाइड्रेशन का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए पानी का निरंतर इंतजाम अनिवार्य है।

## आवास की सफाई, मौसम प्रबंधन और विश्राम
दूध देने वाले पशुओं के लिए उनका परिवेश बहुत मायने रखता है। जिस जगह पशु बांधे जाते हैं, वह स्थान साफ-सुथरा, सूखा और हवादार होना चाहिए। मौसम में बदलाव या गर्मी के दिनों में पशुओं को विशेष देखभाल की दरकार होती है। पशुओं को सही समय पर चारा और पानी देने के अलावा पर्याप्त विश्राम मिलना भी उतना ही जरूरी है। यदि पशु तनावमुक्त रहेगा और उसे आरामदायक माहौल मिलेगा, तो उसका दूध उत्पादन बना रहेगा।

## पेट के कीड़ों की दवा और टीकाकरण
कई बार पशु बाहर से पूरी तरह स्वस्थ नजर आता है, लेकिन उसके पेट में अंदरूनी कीड़े मौजूद हो सकते हैं। ये कीड़े पशु द्वारा खाए गए भोजन का पोषण खुद सोख लेते हैं, जिससे पशु कमजोर होने लगता है और उसका दूध उत्पादन घट जाता है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर पशु चिकित्सक से परामर्श लेकर पेट के कीड़ों की दवा देनी चाहिए। दवा की खुराक पशु की उम्र, वजन और शारीरिक स्थिति के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए। साथ ही, निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए पशुओं का टीकाकरण कराना भी बेहद जरूरी है।

## दूध उत्पादन में अचानक गिरावट पर लें चिकित्सीय सलाह
यदि गाय या भैंस का दूध अचानक बहुत कम हो जाए या पशु अचानक दूध देना बंद कर दे, तो केवल घरेलू उपायों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए ताकि बीमारी या समस्या के सटीक कारण का पता लगाकर सही समय पर उचित इलाज शुरू किया जा सके।

## इसका आप पर असर
सही पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन अपनाने से पशुपालक दूध उत्पादन बढ़ाकर अपनी मासिक आय में सीधा इजाफा कर सकते हैं।

- **भारत भर में:** संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर देने से डेयरी पशुओं का दूध उत्पादन 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे पशुपालकों की प्रति पशु लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
- **आगरा और उत्तर प्रदेश में:** स्थानीय पशुपालक समय पर देवरमिंग और टीकाकरण कराकर मौसमी बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं। इससे अचानक दूध घटने से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव होता है।
- **डेयरी प्रबंधन के लिए:** 24 घंटे साफ पानी की उपलब्धता से पशु डिहाइड्रेशन और गर्मी के तनाव से बचे रहते हैं। फलस्वरूप पशुओं का स्वास्थ्य स्थिर रहता है और पशु चिकित्सा पर होने वाला खर्च कम होता है।
- **पशु स्वास्थ्य सुरक्षा:** घरेलू इलाज के बजाय पशु चिकित्सक की समय पर सलाह लेने से गंभीर संक्रामक रोगों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है। इससे पशुधन के नुकसान की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
पशुओं में दूध का उत्पादन कम होने के पीछे मुख्य रूप से असंतुलित खानपान, पानी की कमी और स्वास्थ्य प्रबंधन में लापरवाही जिम्मेदार होती है। जब पशुओं की बुनियादी शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं होतीं, तो उनका शरीर दूध उत्पादन कम कर देता है।

- **पोषण और खनिज की कमी:** पशुओं को केवल साधारण चारा देने से उन्हें सभी आवश्यक मिनरल्स नहीं मिल पाते। मिनरल मिक्सचर की गैर-मौजूदगी से शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों का अभाव हो जाता है।
- **पानी की अपर्याप्त मात्रा:** दूध में अधिकांश हिस्सा पानी का होता है, इसलिए पानी की कमी से दूध उत्पादन तुरंत गिर जाता है। दिनभर साफ पानी न मिलने से पशु तनावग्रस्त हो जाते हैं।
- **पेट के कीड़ों का संक्रमण:** पेट में मौजूद परजीवी पशु के भोजन का अधिकांश पोषण खुद सोख लेते हैं। इससे पशु बाहर से स्वस्थ दिखने के बावजूद अंदर से कुपोषित हो जाता है।
- **अस्वच्छ आवास और मौसम:** गंदे, बंद और कम हवादार थानों में रहने से पशुओं में तनाव बढ़ता है। गर्मी और मौसम के बदलाव के समय उचित देखभाल न मिलने से दूध क्षमता घटती है।

## सवाल-जवाब

### 1. गाय और भैंस को चारे में मिनरल मिक्सचर देना क्यों जरूरी है?
मिनरल मिक्सचर चारे में मौजूद पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। इससे पशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और दूध उत्पादन में सुधार होता है।

### 2. पशुओं के पास नमक का ढेला रखने का क्या फायदा है?
नमक का ढेला रखने से पशु अपनी शारीरिक जरूरत के अनुसार इसे चाट सकते हैं। हालांकि, नमक डिहाइड्रेशन या पानी की कमी का इलाज नहीं है, इसलिए साफ पानी की व्यवस्था अलग से होनी चाहिए।

### 3. पेट के कीड़ों की दवा पशुओं को कब और कैसे देनी चाहिए?
पेट के कीड़ों की दवा पशु चिकित्सक की सलाह पर समय-समय पर देनी चाहिए। दवा की खुराक पशु की उम्र, वजन और स्वास्थ्य स्थिति देखकर तय की जाती है।

### 4. अगर पशु अचानक दूध देना कम कर दे तो क्या करना चाहिए?
यदि दूध में अचानक गिरावट आए, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहकर तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। सही समय पर सटीक निदान से बीमारी का इलाज संभव होता है।

### 5. पशुओं के रहने का स्थान कैसा होना चाहिए?
पशुओं के रहने की जगह साफ-सुथरी, सूखी और हवादार होनी चाहिए। मौसम में बदलाव और गर्मी के दौरान पशुओं को तनाव से बचाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

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