# चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरे विपक्ष में सीटों की रार, दिल्ली से मुंबई तक दर्ज हुई एफआईआर

> मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों पर पुलिस व मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है, जबकि गठबंधन के भीतर यूपी सीटों पर मतभेद गहरा गए हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/election-commission-ke-khilapha-saraka-para-utare-vipaksha-men-siton-ki-rara-delhi-se-mumbai-taka-darja-hui-fir-42490 · **Language:** Hindi
**Tags:** ज्ञानेश कुमार, जंतर मंतर, अखिलेश यादव, राहुल गांधी, चुनाव आयोग, दिल्ली पुलिस, शिवनेरी पार्क, समाजवादी पार्टी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गांधी जयंती के मौके पर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस की पूर्व अनुमति न होने के कारण दोनों महानगरों में सुरक्षाबलों ने कड़ा रुख अपनाया और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस विरोध प्रदर्शन के बीच विपक्षी गठबंधन के अंदरूनी समीकरणों और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर सीट बंटवारे की तकरार भी सतह पर आ गई है।

## जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने लिया हिरासत में
राजधानी दिल्ली में नई दिल्ली इलाके के भीतर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई थी। इस पाबंदी के बावजूद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के नेता और कॉकरोच पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता जंतर मंतर पर जुटने लगे। कांग्रेस कार्यकर्ता सफेद पोशाक में वहां पहुंचे थे, जबकि आम आदमी पार्टी की टीम भी विरोध जताने मौके पर मौजूद रही। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार खुद सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए मैदान में उतरे। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के धरने या मार्च की आधिकारिक इजाजत नहीं दी गई थी, जिसके चलते नियम तोड़ने वाले कार्यकर्ताओं को बसों में भरकर हिरासत में भेज दिया गया।

इसी दौरान वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी जंतर मंतर पहुंचकर विरोध की कमान संभालने की कोशिश की। इससे पहले करीब तीन महीने पूर्व हुए प्रदर्शनों में वामपंथी संगठनों की अहम भूमिका रही थी, लेकिन इस बार सुरक्षाबलों ने उनकी योजना को आगे नहीं बढ़ने दिया। छात्र नेता नेहा बोरा ने जंतर मंतर पर पुलिसकर्मियों से भिड़ने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के आगे कोई सभा आयोजित नहीं हो सकी। दिल्ली पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें से दो प्राथमिकियां संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई हैं, जबकि एक मामला कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

## मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन और नाबालिग बच्चे को ढाल बनाने का आरोप
दिल्ली के बाद प्रदर्शन की आंच मुंबई तक पहुंच गई। मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से सभा आयोजित की गई। इस दौरान अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई और भाषण देते हुए पुलिस उपायुक्त की तुलना जनरल डायर से कर डाली। इसके साथ ही उन्होंने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखे बयान दिए। मुंबई पुलिस की तरफ से भी इस मार्च या जनसभा की कोई आधिकारिक अनुमति जारी नहीं की गई थी, जिसके चलते मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ बिना इजाजत आंदोलन करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली है।

शिवाजी पार्क के इस आयोजन में एक नाबालिग बच्चे को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। आरोप सामने आया है कि भीड़ के ऊपर एक बच्चे को उठाकर भड़काऊ नारेबाजी कराई गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन शुरू होने से पहले ग्रुप चैट में नाबालिगों को लाने की योजना बनाई गई थी ताकि पुलिस की संभावित कार्रवाई के दौरान बच्चों को सुरक्षा ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा सके। यह औपचारिक शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद की ओर से सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो और वीडियो के आधार पर दर्ज कराई गई थी।

## राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, सात दिन में मांगी रिपोर्ट
सतीश वैद की शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया। आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया। इस प्रकरण की सुनवाई एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा की गई। पीठ ने बच्चों के कथित राजनीतिक और ढाल के रूप में इस्तेमाल को गंभीर चिंता का विषय माना है।

आयोग ने इस संबंध में मुंबई पुलिस कमिश्नर, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के शिकायत निवारण अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। एनएचआरसी ने इन सभी संबंधित पक्षों और प्रशासनिक एजेंसियों से सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

## 10 अक्टूबर को दोबारा प्रदर्शन की चेतावनी और चुनाव आयोग का मतदाता अभियान
प्रशासनिक सख्ती और एफआईआर के बावजूद आयोजकों ने अपने आंदोलन को वापस लेने से इनकार किया है। कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने देर रात बयान जारी करते हुए कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को देश भर से कार्यकर्ता दोबारा दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचेंगे। उन्होंने इस आह्वान को 'जंतर मंतर 2.0' और 'चलो दिल्ली' का नाम दिया है। वहीं दूसरी तरफ छात्र नेता नेहा बोरा ने भी शनिवार दोपहर 1 बजे जंतर मंतर पर दोबारा जुटने का ऐलान किया है, जबकि इलाके में धारा 163 पहले की तरह लागू है।

सड़क पर चल रहे इस हंगामे के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत जिन नागरिकों के नाम सूची से छूट गए हैं, वे फॉर्म 6 भरकर नाम दर्ज करा सकते हैं। आयोग का विशेष ध्यान पहली बार मतदान करने योग्य बने युवाओं को जोड़ने पर है। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ प्रति सप्ताह 20 से 25 घरों का दौरा करेंगे और इस पूरे कार्य को पूरा करने के लिए एक महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

## सड़क पर एकजुटता, लेकिन यूपी में सीटों पर कांग्रेस और सपा में टकराव
विपक्षी दल एक तरफ जहां मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोप लगाकर सड़कों पर मोर्चा संभाल रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि नाम जोड़ने की खिड़की सभी पात्र नागरिकों के लिए खुली है। इस बीच विपक्षी खेमे के भीतर सीटों की हिस्सेदारी को लेकर गंभीर खींचतान शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी गठबंधन में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा ठोक रही है और 150 से कम सीटों पर समझौता न करने की बात कह रही है।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मांग को खारिज करते दिख रहे हैं। समाजवादी पार्टी का रुख है कि कांग्रेस को 50 सीटें देना भी व्यावहारिक नहीं है। बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने एक आंतरिक बैठक के दौरान राज्य की 350 सीटों पर अपनी पार्टी की चुनावी तैयारी तेज कर दी है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस केवल 6 सीटें ही जीत पाई थी। इसी चुनावी जनाधार का हवाला देकर समाजवादी पार्टी अब राज्य के भीतर कांग्रेस को उसकी वास्तविक राजनीतिक स्थिति का अहसास करा रही है। ऐसे में सड़क पर साझा विरोध प्रदर्शनों के बावजूद सीटों के बंटवारे पर गठबंधन का आंतरिक संकट खुलकर सामने आ गया है।

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक खींचतान के बीच आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा व्यावहारिक असर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा पाबंदियों से जुड़ा है।

- **मतदाता सूची में नाम जोड़ना:** यदि आपका नाम मतदाता सूची से हट गया है, तो आप फॉर्म 6 भरकर दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। बीएलओ एक महीने के भीतर प्रति सप्ताह 20 से 25 घरों का दौरा कर नए और छूटे मतदाताओं को जोड़ेंगे।
- **दिल्ली में:** नई दिल्ली और जंतर मंतर क्षेत्र में जाने वाले नागरिकों को धारा 163 लागू होने के कारण पुलिस जांच और पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है। बिना अनुमति किसी भी भीड़ या सभा का हिस्सा बनने पर हिरासत और कानूनी कार्रवाई का जोखिम रहेगा।
- **मुंबई में:** शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। बिना आधिकारिक मंजूरी के आयोजित होने वाले मार्च और प्रदर्शनों में शामिल होने से बचें।
- **राजनीतिक असर:** उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन की सीटों पर खींचतान के कारण स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों के चयन और राजनीतिक समीकरणों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और आगामी चुनावों में विपक्षी दलों की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की होड़ के कारण पैदा हुआ है।

- **इस्तीफे की मांग और आरोप:** विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मतदाता सूची से नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली और मुंबई में बिना अनुमति के प्रदर्शन आयोजित किए गए।
- **अनुमति न मिलना और कानूनी पाबंदियां:** दिल्ली में धारा 163 लागू होने और मुंबई में पुलिस की पूर्व स्वीकृति न मिलने के कारण सुरक्षाबलों ने आयोजनों को रोककर प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज की।
- **नाबालिग को शामिल करने का विवाद:** मुंबई प्रदर्शन में बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाकर नारेबाजी कराने और उसे ढाल बनाने के आरोप के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हस्तक्षेप किया।
- **यूपी में सीटों का अंदरूनी विवाद:** 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिलने के कारण अखिलेश यादव ने 350 सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है, जिससे कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर मतभेद बढ़ गया।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को क्यों हिरासत में लिया गया?
नई दिल्ली क्षेत्र में धारा 163 लागू थी और प्रदर्शनकारियों के पास सभा करने की कोई आधिकारिक पुलिस अनुमति नहीं थी।

### 2. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कितनी एफआईआर दर्ज की हैं?
दिल्ली पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें दो संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज हुई है।

### 3. मुंबई के शिवाजी पार्क मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने क्या कदम उठाया?
आयोग ने नाबालिग बच्चे को ढाल बनाने के आरोपों पर मुंबई पुलिस, आईटी मंत्रालय, सोशल मीडिया एक्स और महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस भेजकर 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।

### 4. चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है?
आयोग ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए मतदाताओं को फॉर्म 6 भरने और बीएलओ को प्रति सप्ताह 20 से 25 घरों का दौरा करने का निर्देश दिया है।

### 5. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच क्या विवाद है?
कांग्रेस पार्टी कुल 403 में से 150 सीटों की मांग कर रही है, जबकि 37 लोकसभा सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी उसे 50 सीटें देने को भी तैयार नहीं दिख रही है।

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