# चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के तीखे आरोप, यूपी में सपा-कांग्रेस खींचतान और बिहार में बेटियों की सुरक्षा पर गरमाई सियासत

> मुख्य चुनाव आयुक्त पर राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया, वहीं उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर सपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/election-commission-para-rahul-gandhi-ke-tikhe-aropa-up-men-sp-congress-khinchatana-aura-bihar-men-betiyon-ki-suraksha-para-garama-38565 · **Language:** Hindi
**Tags:** चुनाव आयोग, राहुल गांधी, ज्ञानेश कुमार, सुधांशु त्रिवेदी, अखिलेश यादव, बिहार अपराध, रायबरेली, उत्तर प्रदेश राजनीति

देश के सियासी गलियारों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर छिड़ी तीखी बयानबाजी ने चुनावी माहौल में सरगर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर देशद्रोही होने तक का संगीन इल्ज़ाम लगाते हुए दावा किया कि वर्ष 2023 के बाद जितने भी चुनाव संपन्न हुए, वे सभी पूरी तरह फर्जी थे। राहुल गांधी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सभी चुनावी जीत 'वोट चोरी' के सहारे हासिल की हैं। उनका कहना था कि जब सरकार ही वोट चोरी से वजूद में आई, तो 2023 के बाद पारित किए गए सारे कानून भी असंवैधानिक हो जाते हैं। राहुल ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह पिछले तीन सालों से जिस गड़बड़ी की बात उठा रहे थे, उस पर अब दो अन्य चुनाव आयुक्तों की भी सहमति की बात सामने आ चुकी है। उनका तर्क था कि अमूमन सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी इनकंबेंसी सभी सरकारों के सामने आती है, मगर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जनता की कोई नाराजगी नतीजों में नहीं दिखती, जिसकी इकलौती वजह यह है कि ज्ञानेश कुमार वोट चोरी में बीजेपी को सीधा फायदा पहुंचा रहे हैं।

## बीजेपी का तीखा पलटवार और पुराने चुनावी इतिहास की याद
राहुल गांधी के इन दावों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के समूचे चुनावी इतिहास को सामने रखते हुए जोरदार जवाबी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस दौर में कांग्रेस लगातार चुनाव जीता करती थी, उस समय मतदाताओं के पास वोटर आईडी कार्ड नहीं हुआ करते थे और धड़ल्ले से पोलिंग बूथ लूटे जाते थे। व्यवस्था में सुधार के तहत जबसे सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और मतदाताओं के लिए वोटर कार्ड अनिवार्य किए गए, तब से वोटों की खुली लूट पर विराम लगा और कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना बेहद मुश्किल हो गया। बीजेपी प्रवक्ता ने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि कांग्रेस अब तक 92 बार चुनावी मैदान में हार का सामना कर चुकी है और अपनी इसी नाकामी को छिपाने के लिए अब ऐसे निराधार बहाने गढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य मकसद ज्ञानेश कुमार को सीधे तौर पर धमकाना था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने यह तो जरूर गिनाया कि पिछले तीन सालों में उन्होंने वोट चोरी को लेकर क्या-क्या बयान दिए, लेकिन वह कोई भी नया तथ्य या प्रमाण सामने नहीं रख सके। उन्होंने तंज कसा कि राहुल ने दस बार अलग-अलग अंदाज में कहा कि उनके पास पूरी जानकारी है जिसे वह तीन-चार महीने में सार्वजनिक करेंगे, लेकिन जब सबूत हैं तो उन्हें तुरंत उजागर क्यों नहीं किया जाता।

## चुनाव आयोग का आंतरिक विवाद और आंकड़ों की हकीकत
सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी रेखांकित किया कि मीडिया में आई संबंधित जानकारी दरअसल दो चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच कामकाज के आंतरिक प्रशासनिक मतभेदों से जुड़ी है। उस पूरे प्रकरण में कहीं भी यह बात दर्ज नहीं है कि ज्ञानेश कुमार अथवा केंद्र सरकार ने चुनाव प्रक्रिया में कोई हेराफेरी या धांधली की है। इसके विपरीत दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह तक कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार की भी नहीं सुनते और फॉर्म-6 में बदलाव का कदम उठाने से पहले उन्हें सरकार से विचार-विमर्श करना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया। इसके साथ ही बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में 49 साल, ओडिशा में 26 साल, उत्तर प्रदेश में 37 साल और गुजरात में 31 साल से कांग्रेस सत्ता से बाहर है, तो क्या कांग्रेस इसे भी वोट चोरी का ही नतीजा मानती है। उन्होंने इस तर्क को भी पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया कि बीजेपी पर कभी सत्ता विरोधी लहर का असर नहीं पड़ता। रिकॉर्ड के मुताबिक 2014 से लेकर अब तक करीब बीस ऐसे चुनाव रहे हैं जिनमें बीजेपी को एंटी इनकंबेंसी के चलते शिकस्त का सामना करना पड़ा। ऐसे में बिना किसी ठोस दस्तावेजी साक्ष्य के बार-बार वोट चोरी का शोर मचाना केवल खोखली बयानबाजी है।

## उत्तर प्रदेश में अखिलेश की यात्रा और गठबंधन में दरार
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रिश्तों के बीच की तल्खी खुलकर सामने आ गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने चुनावी प्रचार अभियान का आगाज किया। उनके स्वागत के लिए खास तौर पर बुलडोजर मंगवाए गए थे और इन्हीं बुलडोजरों के सहारे उन पर विशाल मालाएं पहनाई गईं। दिलचस्प बात यह रही कि अखिलेश यादव ने यह शुरुआत राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से की, लेकिन इस पूरे शक्ति प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस का कोई भी बड़ा या छोटा नेता नजर नहीं आया। गठबंधन में सीटों के तालमेल को लेकर दोनों दलों के बीच भीतर ही भीतर भारी खींचतान चल रही है, जिसका सीधा असर अखिलेश यादव के भाषण में भी देखने को मिला। उन्होंने सख्त तेवर दिखाते हुए साफ किया कि कोई भी दल अथवा नेता यह मुगालता न पाले कि केवल मांगने भर से गठबंधन में सीट मिल जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह उसी दल को वही सीट आवंटित करेंगे, जहां उसकी जीत की पुख्ता गारंटी होगी।

## नेताओं के बीच जुबानी जंग और मुस्लिम वोटों की होड़
अखिलेश यादव की इस रथयात्रा को लेकर दोनों ही पार्टियों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया। कांग्रेस की ओर से इमरान मसूद और आसिम वकार ने मोर्चा संभालते हुए बयानबाजी की, तो पलटवार के लिए समाजवादी पार्टी ने इकरा हसन, एस. टी. हसन और आशु मलिक को आगे कर दिया। सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस नेताओं को अपनी सीमाओं में रहने की नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस भले ही राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टी हो, लेकिन उत्तर प्रदेश की जमीन पर उसे अखिलेश यादव के नेतृत्व के पीछे ही चलना होगा। इस बीच राजनीतिक हलकों में अखिलेश के रथ के रंग को लेकर भी विवाद छिड़ गया। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बयान जारी करते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने अपनी यात्रा के रथ का रंग भगवा कर लिया है, इसलिए मुस्लिम समुदाय को इस रथयात्रा से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। कुछ लोगों ने उनके भगवा रथ पर सवाल खड़े किए तो कइयों को उनका चुनावी पोस्टर रास नहीं आया। हालांकि जमीनी समीकरणों पर नजर डालें तो रायबरेली सीट को भले ही कांग्रेस का परंपरागत गढ़ कहा जाता हो, लेकिन वहां कांग्रेस हमेशा सपा के संगठनात्मक समर्थन से जीतती आई है और खुद राहुल गांधी भी लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की मदद से ही विजयी हुए थे। ऐसे में रायबरेली से यात्रा शुरू करने पर कांग्रेस नेताओं का यह कहना कि उनसे पहले पूछा जाना चाहिए था, महज दबाव बनाने की सियासत का हिस्सा जान पड़ता है। एक तरफ जहां सपा और कांग्रेस दोनों की निगाहें मुस्लिम वोट बैंक पर टिकी हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरा ध्यान सनातनी वोटों की एकजुटता पर केंद्रित है।

## बिहार में बेटियों के साथ बदसलूकी और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
बिहार से महिलाओं और बच्चियों के साथ खुलेआम बर्बरता की विचलित करने वाली खबरें लगातार सामने आ रही हैं। जमुई की घटना के बाद अब दरभंगा, बांका और समस्तीपुर जैसे जिलों में बेटियों के साथ सरेआम दुर्व्यवहार के मामले उजागर हुए हैं। समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम इलाके में कुछ असामाजिक तत्वों ने एक नाबालिग बच्ची को सड़क पर जबरन घेर लिया। मनचलों ने उसके साथ घिनौनी बदसलूकी की और इस शर्मनाक कृत्य का बकायदा मोबाइल से वीडियो भी रिकॉर्ड किया। खौफ और सामाजिक लोकलाज के कारण पीड़ित बच्ची ने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई, जिसके बाद बेखौफ बदमाशों ने उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जब यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, तब जाकर पुलिस हरकत में आई और छानबीन में पता चला कि यह घिनौनी वारदात 15 सितंबर की थी। वीडियो फुटेज की पड़ताल के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की शिनाख्त राहुल कुमार, अवधेश पासवान, रामबाबू सहनी और विकास कुमार के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कुछ ही घंटों के भीतर चारों आरोपियों को दबोच लिया। समस्तीपुर पुलिस प्रशासन का कहना है कि वारदात के वक्त सड़क पर जो लोग तमाशबीन बने खड़े थे, उनकी पहचान करके भी पूछताछ की जाएगी।

## मंत्रियों के विवादित बोल और सत्ता-विपक्ष में तीखी तकरार
इसी तरह बांका जिले में मंदार पर्वत की सैर करने आई एक अन्य युवती के साथ भी छेड़खानी और मारपीट की सनसनीखेज वारदात हुई। वहां भी गुंडों ने अपनी करतूत का वीडियो तैयार कर इंटरनेट पर पोस्ट कर दिया, जिसके बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। बेटियों की सुरक्षा को लेकर बिहार का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और उनके मन से पुलिस प्रशासन का डर खत्म हो चुका है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि बिहार में पुलिस का इकबाल पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने मांग की कि पुलिस को अपराधियों में कानून का सख्त खौफ पैदा करना चाहिए क्योंकि बहन-बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती। दूसरी ओर जनता दल यूनाइटेड के नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं तो अमेरिका और जापान जैसे विकसित मुल्कों में भी आम हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस पूरे मामले को सरकार की छवि धूमिल करने की सोची-समझी साजिश करार देते हुए दावा किया कि कुछ शरारती तत्व जानबूझकर बेटियों के साथ ऐसी शर्मनाक हरकतें करते हैं, वीडियो बनाते हैं और फिर उसे इंटरनेट पर डालकर सरकार को बदनाम करने का प्रयास करते हैं। हालांकि ऐसे संवेदनशील मामलों में सरकार का गैर-जरूरी बचाव करना अपराधियों के हौसले बढ़ाने जैसा ही साबित होता है। हकीकत यही है कि वीडियो वायरल होने के बाद ही पुलिस की नींद खुलना यह साबित करता है कि अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं बचा है और पीड़ित परिवार डर के मारे थाने जाने से कतरा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
इस सियासी घमासान और प्रशासनिक घटनाक्रमों का आम नागरिकों की लोकतांत्रिक भागीदारी और जमीनी सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।

- **मतदान प्रक्रिया पर विश्वास:** चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठते सवालों से आम मतदाताओं में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अपने वोट की ताकत को लेकर संदेह पैदा होता है। नागरिकों को चुनावी सुधारों और मतदाता सूची में अपने नाम के सत्यापन के प्रति अधिक जागरूक रहना होगा।
- **गठबंधन और चुनावी विकल्प:** विपक्षी दलों के बीच सीटों की खींचतान से विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के सामने स्पष्ट विकल्प चुनने की चुनौती खड़ी होती है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम की स्थिति बनने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
- **सड़क सुरक्षा और महिला गरिमा:** सार्वजनिक स्थानों पर बेटियों के साथ छेड़खानी और वीडियो वायरल होने की घटनाएं महिलाओं की निर्भीक आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। परिवारों में असुरक्षा का माहौल बनता है जिससे बेटियों की शिक्षा और कामकाजी आजादी पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
- **पुलिस हेल्पलाइन और तत्परता:** घटनाओं के तुरंत बाद रिपोर्ट न होकर वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई होना आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। नागरिकों को बिना डरे तुरंत नजदीकी पुलिस थाने और महिला हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करने की जरूरत है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव और सुरक्षा संकट चुनाव आयोग में प्रशासनिक असहमतियों, चुनावी गठबंधन की रस्साकशी और लचर पुलिसिंग के कारण सामने आया है।

- **चुनाव आयोग का विवाद:** मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच फॉर्म-6 और प्रशासनिक फैसलों को लेकर आपसी मतभेद थे, जिसे राहुल गांधी ने वोट चोरी का आधार बनाकर पेश किया। बीजेपी ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि आयोग में आंतरिक विचार-विमर्श सामान्य है और इसे चुनावी धांधली का सबूत नहीं माना जा सकता।
- **यूपी में गठबंधन की खींचतान:** अखिलेश यादव द्वारा राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से बिना कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी के प्रचार शुरू करने से गठबंधन में वर्चस्व की लड़ाई तेज हुई। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में बड़े भाई की भूमिका में रहकर केवल जीतने लायक सीटों पर ही कांग्रेस को हिस्सेदारी देना चाहती है।
- **बिहार में लचर कानून-व्यवस्था:** अपराधियों में स्थानीय पुलिस का खौफ खत्म होने के चलते मनचले सरेआम बच्चियों को घेरकर बदसलूकी करने और वीडियो वायरल करने की जुर्रत कर रहे हैं। पीड़ितों में सामाजिक डर और पुलिस तक तुरंत पहुंच न होने के कारण ऐसी वारदातों पर तुरंत लगाम नहीं लग पा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्या आरोप लगाए हैं?
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोही होने और 2023 के बाद के सभी चुनावों में बीजेपी के लिए वोट चोरी कराने का आरोप लगाया है।

### 2. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों का क्या जवाब दिया?
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सीसीटीवी और वोटर कार्ड आने से बूथ लूटना बंद हुआ और कांग्रेस 92 चुनाव हारने के बाद अब बहाने बना रही है।

### 3. चुनाव आयोग के विवाद को लेकर रिपोर्ट में क्या सामने आया था?
रिपोर्ट के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त और दो आयुक्तों के बीच फॉर्म-6 बदलने और आंतरिक फैसलों को लेकर प्रशासनिक मतभेद थे, धांधली का कोई सबूत नहीं था।

### 4. अखिलेश यादव ने रायबरेली में सीट बंटवारे को लेकर क्या संदेश दिया?
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि गठबंधन में सीट मांगने से नहीं मिलेगी, बल्कि उसी पार्टी को सीट दी जाएगी जिसकी जीत की पक्की गारंटी होगी।

### 5. समस्तीपुर में नाबालिग लड़की से बदसलूकी के मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद समस्तीपुर पुलिस ने राहुल कुमार, अवधेश पासवान, रामबाबू सहनी और विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

### 6. बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिराग पासवान ने क्या कहा?
चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है और अपराधियों में कानून का डर पैदा करने के साथ बहन-बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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