# एसिड अटैक सर्वाइवर्स को ट्रेन किराए में छूट देने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजन विभाग की भागीदारी मांगी

> सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तेजाब हमला पीड़ितों को रियायती रेल यात्रा देने की नीति तैयार करने में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की भी भूमिका तय होनी चाहिए, ताकि बेहतर इलाज के लिए उनका सफर आसान हो सके।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/esida-ataika-sarvaivarsa-ko-trena-kirae-men-chhuta-dene-para-supreme-court-ne-divyangajana-vibhaga-ki-bhagidari-mangi-40283 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, एसिड अटैक सर्वाइवर्स, भारतीय रेलवे, रेल किराया छूट, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, अतिजीवन सोसाइटी

तेजाब हमले का दंश झेलने वाले लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूरदराज के बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में मदद करने के मकसद से रेलवे रियायत देने की कवायद चल रही है। देश की शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाले दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को इस नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में सक्रिय तौर पर शामिल किया जाना चाहिए। इससे पीड़ितों को अपने इलाज के लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक रेल यात्रा करना काफी सुगम हो सकेगा।

## नीति के मसौदे पर विचार और शीर्ष अदालत का सुझाव
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। पीठ के सामने यह तथ्य आया कि केंद्र सरकार ने याचिका दायर करने वाले एनजीओ अतिजीवन सोसाइटी सहित अन्य साझेदारों के साथ विचार-विमर्श करके पहले ही नीति का एक मसौदा तैयार कर लिया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जब अंतिम नीति को मूर्त रूप दिया जा रहा हो, तो दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की भागीदारी भी इसमें अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे नीति के सभी पहलू व्यापक और समावेशी बन सकें।

## केंद्र सरकार की सैद्धांतिक सहमति और समयसीमा
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। इससे पहले बीते 13 अगस्त को सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि वह एसिड अटैक सर्वाइवर्स को ट्रेन किराए में छूट प्रदान करने वाली नीति तैयार करने पर सैद्धांतिक रूप से राजी हो चुकी है। उस दौरान अदालत ने रेल मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह इस मानवीय मुद्दे पर खुले दिल से और उदारतापूर्वक विचार करे। इसके साथ ही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे को निर्देश दिया गया था कि वे छह सप्ताह के भीतर इस प्रस्तावित नीति का मसौदा अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड पर पेश करें।

## मरीज श्रेणी के तहत रियायत देने का विकल्प
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने पीठ के समक्ष बताया कि केंद्र सरकार एसिड अटैक पीड़ितों को यह सुविधा 'मरीज कैटेगरी' के अंतर्गत देने पर विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को पीड़ितों को दिव्यांगजन की एक अलग श्रेणी में शामिल करने को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि वर्तमान समय में उस दिव्यांग वर्ग के अन्य लोगों को रेलवे की ओर से किराए में किसी तरह की छूट नहीं दी जाती है। इस तकनीकी अड़चन को देखते हुए सरकार इसे चिकित्सा या मरीज श्रेणी के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रस्ताव कर रही है।

## इसका आप पर असर
एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा सस्ती होने से उच्च स्तरीय चिकित्सा देखभाल तक पहुंच आसान बनेगी।

- **किराए में राहत:** प्रस्तावित नीति लागू होने के बाद तेजाब हमले के पीड़ितों को इलाज के लिए रेल यात्रा पर रियायती टिकट मिल सकेंगे। इससे दूसरे शहरों के बड़े अस्पतालों में जाने वाले मरीजों का आर्थिक बोझ काफी कम होगा।
- **मरीज श्रेणी में लाभ:** सरकार इस छूट को मरीज वर्ग के तहत लागू करने की योजना बना रही है। नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर यह छूट मिलना शुरू होगी।
- **समान व्यवस्था:** वर्तमान में दिव्यांग वर्ग की कुछ श्रेणियों को रेल किराए में छूट नहीं मिलती है। मरीज श्रेणी में जोड़े जाने से तकनीकी अड़चनों के बिना सीधे और त्वरित लाभ मिलना संभव होगा।
- **नीति का दायरा:** सामाजिक न्याय मंत्रालय के तहत दिव्यांगजन विभाग के जुड़ने से नियम सर्वाइवर्स की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनेंगे। नीति अंतिम रूप लेने के बाद रेलवे के सभी जोनों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
एसिड अटैक पीड़ितों को पुनर्निर्माण सर्जरी और लगातार चिकित्सा के लिए अक्सर विशेष अस्पतालों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिसे लेकर रियायती रेल यात्रा की मांग की गई थी।

- **न्यायिक याचिका और मांग:** एनजीओ अतिजीवन सोसाइटी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए रियायती ट्रेन यात्रा की व्यवस्था करने की मांग की थी। पीड़ितों के इलाज का बड़ा हिस्सा दूरदराज के उन्नत अस्पतालों में ही संभव हो पाता है।
- **सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी:** केंद्र सरकार ने 13 अगस्त को अदालत को बताया था कि वह रियायत देने के सिद्धांत पर सहमत है। इसके बाद विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करके एक नीति का मसौदा तैयार किया गया।
- **वर्गीकरण से जुड़ी तकनीकी बाधा:** सरकार के अनुसार कुछ दिव्यांग श्रेणियों को रेलवे में रियायत नहीं मिलती, इसलिए अलग दिव्यांग वर्ग बनाने में आपत्तियां थीं। इसी कारण इसे मरीज श्रेणी के तहत शामिल करने का रास्ता तलाशा जा रहा है।
- **अदालत का मार्गदर्शन:** नीति को समग्र और प्रभावी बनाने के लिए पीठ ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव दिया है। छह सप्ताह में मसौदा पेश होने के बाद अंतिम नीति तय की जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने रेल किराए में रियायत को लेकर क्या निर्देश दिया?
अदालत ने कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों के लिए रेल किराए में रियायत की नीति तैयार करने में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

### 2. मामले की सुनवाई किस बेंच ने की?
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।

### 3. केंद्र सरकार यह छूट किस श्रेणी के तहत देने का प्रस्ताव कर रही है?
केंद्र सरकार इस सुविधा को दिव्यांग वर्ग के बजाय मरीज श्रेणी के तहत देने का प्रस्ताव रख रही है।

### 4. केंद्र सरकार ने इस नीति पर सैद्धांतिक सहमति कब जताई थी?
केंद्र सरकार ने 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह इस तरह की रियायती नीति बनाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है।

### 5. इस मामले में याचिकाकर्ता कौन है?
इस मामले में गैर सरकारी संगठन अतिजीवन सोसाइटी याचिकाकर्ता पक्ष के रूप में शामिल है।

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