# एसिड की बेलगाम बिक्री और हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा ठोस जवाब

> सुप्रीम कोर्ट ने देश में एसिड हमलों की घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि केवल सर्कुलर जारी करने या सहानुभूति दिखाने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर एसिड के दुरुपयोग को रोकने की ठोस योजना पेश करने का आदेश दिया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/esida-ki-belagama-bikri-aura-hamalon-para-supreme-court-sakhta-kendra-se-manga-thosa-javaba-52256 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई सूर्यकांत, एसिड हमला, शाहीन मलिक, अर्चना पाठक दवे, केंद्र सरकार, कानून व्यवस्था

देशभर में एसिड हमलों के लगातार सामने आ रहे मामलों को लेकर देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई एक अहम सुनवाई के दौरान इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई कि केंद्र सरकार के स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद होने के बावजूद बाजार में एसिड की अनियंत्रित उपलब्धता बनी हुई है। अदालत ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि कागजों पर नियम तैयार होने के बाद भी यदि ऐसी बर्बर घटनाएं नहीं रुक रही हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक स्तर पर अमल की विफलता को दर्शाता है।

## सहानुभूति और कागजी आदेशों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने की जरूरत
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि पीड़ितों के प्रति केवल संवेदना जताना या प्रतिबंध संबंधी सर्कुलर निकालकर छोड़ देना समस्या का स्थाई हल नहीं हो सकता। पीठ ने रेखांकित किया कि सरकारी तंत्र को यह सुनिश्चित करना ही होगा कि खुदरा एसिड की बिक्री पर लगाम लगाने वाले कानूनी प्रावधानों का पालन प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पूरी सख्ती से जमीन पर दिखाई दे।

## प्रशासनिक खामियों और लचर निगरानी का उठाया जा रहा फायदा
सुनवाई के दौरान पीठ ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जब एसिड की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था पहले से तय है, तो फिर ये हमले क्यों जारी हैं। अदालत ने कहा कि ये घटनाएं साफ तौर पर साबित करती हैं कि व्यवस्था में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं, जिनका असामाजिक तत्व बेखौफ होकर फायदा उठा रहे हैं। पीठ का मानना था कि यदि ऐसी त्रासदियां बार-बार घट रही हैं, तो यह स्वीकार करना होगा कि मौजूदा नीतियां अपने जमीनी लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम साबित हुई हैं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ किया कि इस संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को आपसी समन्वय से काम करना होगा और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।

## केंद्र सरकार ने स्वीकारी जमीनी अमल की कमजोरी, मांगा गया हलफनामा
मामले में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने अदालत को अवगत कराया कि एसिड की खुदरा बिक्री रोकने के लिए सभी राज्यों को विस्तृत दिशानिर्देश पहले ही प्रेषित किए जा चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्यों के स्तर पर इन नियमों को जमीन पर उतारने की वास्तविक स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का औपचारिक निर्देश दिया। इस हलफनामे में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि खुले बाजार में बेचे जाने वाले एसिड के अवैध उपयोग और दुरुपयोग को रोकने के लिए आने वाले दिनों में क्या व्यावहारिक और कड़े उपाय किए जाएंगे।

## सजा बढ़ाने का सुझाव और पीड़िता शाहीन मलिक की याचिका
उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत पूर्व में भी इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधानों को सख्त करने और मामलों में आरोपी पर ही स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने का कानूनी दायित्व डालने जैसे विकल्पों पर चर्चा कर चुकी है। मंगलवार को यह पूरी सुनवाई एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका के संदर्भ में हुई। इस याचिका में अदालत से यह मानवीय गुहार लगाई गई है कि एसिड हमलों की शिकार महिलाओं और पीड़ितों को दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें शासन की सभी जरूरी सामाजिक और आर्थिक कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। अदालत के ताजा रुख से यह स्पष्ट संदेश गया है कि नियम बनाने के साथ-साथ अब प्रशासनिक जवाबदेही तय करना अनिवार्य होगा।

## इसका आप पर असर
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख से एसिड की अवैध खुदरा बिक्री पर प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने और पीड़ितों को सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

- **आम नागरिकों की सुरक्षा:** खुदरा दुकानों पर एसिड की अनियंत्रित और खुली बिक्री पर पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन की निगरानी काफी सख्त हो जाएगी। खरीदारों के पहचान पत्रों की जांच और बिक्री का रिकॉर्ड रखने के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
- **एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकार:** याचिका पर होने वाले आगामी फैसलों से पीड़ितों को दिव्यांग श्रेणी के तहत सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, पेंशन और मुफ्त इलाज की सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे लंबे समय से पुनर्वास और चिकित्सा खर्च से जूझ रहे पीड़ितों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
- **लापरवाह अधिकारियों पर शिकंजा:** स्थानीय बाजारों में अवैध एसिड बिकने पर अब संबंधित क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय होगी। यदि नियमों में ढिलाई बरती गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- **न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव:** कोर्ट द्वारा सजा बढ़ाने और सबूत के भार को लेकर की गई चर्चाओं से भविष्य में कानूनी संशोधन हो सकते हैं। इससे एसिड हमलावरों के खिलाफ मुकदमों में जल्द सजा सुनिश्चित कराने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी हस्तक्षेप देश में एसिड की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले नियमों के लचर क्रियान्वयन और लगातार हो रहे हमलों के कारण आवश्यक हुआ।

- **दिशानिर्देशों का कमजोर जमीनी क्रियान्वयन:** केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को नियम और मानक संचालन प्रक्रियाएं भेजे जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर रासायनिक पदार्थों की खुदरा दुकानों की निगरानी नहीं हो पा रही थी। इसी प्रशासनिक शिथिलता के कारण असामाजिक तत्वों को एसिड आसानी से उपलब्ध होता रहा।
- **शाहीन मलिक की जनहित याचिका:** एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर पीड़ितों को दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल करने की मांग की। इस याचिका की सुनवाई के दौरान ही पूरे देश में एसिड बिक्री की स्थिति पर व्यापक बहस शुरू हुई।
- **कानूनी खामियों का अनुचित लाभ:** बाजारों में बिना रोक-टोक और बिना किसी पहचान पत्र के एसिड मिल जाने से नियमों का उद्देश्य विफल हो रहा था। अदालत ने पाया कि जब तक अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, केवल कागजी सर्कुलर अपराध रोकने में सक्षम नहीं होंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट में एसिड हमले के मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।

### 2. अदालत ने एसिड बिक्री के मौजूदा नियमों को लेकर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि केवल सर्कुलर जारी करने या सहानुभूति दिखाने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि लोग लचर निगरानी का फायदा उठाकर बेरोकटोक एसिड खरीद रहे हैं।

### 3. केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने क्या दलील दी?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने बताया कि राज्यों को दिशानिर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन कमजोर बना हुआ है।

### 4. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने केंद्र को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि खुलेआम बिकने वाले एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

### 5. यह जनहित याचिका किसने और किस मांग के साथ दायर की थी?
यह याचिका एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक ने दायर की थी, जिसमें पीड़िताओं को दिव्यांगों की श्रेणी में शामिल कर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की गई है।

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