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  "title": "फरीदाबाद के हरी विहार में सीवर के पानी से नारकीय हालात, गलियों में कीचड़ देखकर रिश्तेदार भी लौट रहे खाली हाथ",
  "summary": "बल्लभगढ़ की सुभाष कॉलोनी स्थित हरी विहार वार्ड नंबर 45 में पिछले कई सालों से सीवर का गंदा पानी और कीचड़ भरा रहने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे शादी के रिश्ते तक टूटने की नौबत आ गई है।",
  "content": "हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ क्षेत्र की सुभाष कॉलोनी में गंदगी और उफनते सीवर ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। यहां वार्ड नंबर 45 के अंतर्गत आने वाले हरी विहार में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि घरों की दहलीज तक काला बदबूदार पानी भरा रहता है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि जब भी किसी बेटे या बेटी के विवाह के लिए रिश्तेदार या अगुआ बातचीत करने आते हैं, तो वे रास्ते की यह दुर्दशा देखकर भड़क जाते हैं और बिना बात आगे बढ़ाए वापस लौट जाते हैं। जलभराव और गंदगी के इस खौफ की वजह से आम रिश्तेदार भी इस इलाके में कदम रखने से कतराने लगे हैं। वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या ने नागरिकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक खुशियों पर गहरा आघात किया है।\n\nसालों से अनसुनी हो रही बुनियादी शिकायतें\nस्थानीय बाशिंदों का कहना है कि चुनाव के दिनों में जनप्रतिनिधि और नेता हाथ जोड़कर वोट मांगने के लिए नियमित रूप से गलियों के चक्कर लगाते हैं। उस दौरान नाली निर्माण, सीवर की संपूर्ण सफाई और पक्की सड़क बनाने के लंबे-चौड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जैसे ही मतदान समाप्त होता है, कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या राजनेता इन गलियों की सुध लेने नहीं पहुंचता। मंजू बाला के अनुसार जब से यहां नालियों का निर्माण हुआ है, तभी से यह संकट लगातार गहराता जा रहा है। करीब दो से तीन साल का समय बीत चुका है, लेकिन बार-बार नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बाद भी कोई स्थाई हल नहीं निकाला गया। रोज सुबह-शाम नालियों से गंदा पानी बाहर उफनता रहता है और गलियों में रुका रहता है, जिससे ऐसा महसूस होता है कि इंसान जानवरों से भी बदतर परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।\n\nस्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों के लिए बना जोखिम\nजलभराव का सबसे गंभीर असर छोटे बच्चों और विद्यार्थियों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। देववती बताती हैं कि गटर का दूषित पानी लगातार गलियों में बहता रहता है, जिसके कारण बच्चों का पैदल स्कूल जाना लगभग असंभव हो जाता है। कई बार बच्चे संतुलन खोकर कीचड़ और गंदे पानी में गिर जाते हैं, जिससे उनकी वर्दी खराब हो जाती है और उनकी पढ़ाई भी छूट जाती है। यह समस्या पिछले तीन-चार साल से लगातार बनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर केवल खोखले आश्वासन ही मिल रहे हैं।\n\nइसी तरह की पीड़ा बयां करते हुए सितारा ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर भरे गंदे पानी के कारण बच्चे रोज चोटिल हो रहे हैं। पानी के नीचे छिपे गड्ढे और कीचड़ की वजह से फिसलने का डर हमेशा बना रहता है। गली की स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ चुकी है कि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना परिजनों के लिए रोजाना की एक बड़ी चुनौती बन गया है।\n\nसीवर सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता और मशीन खराबी का बहाना\nस्थानीय निवासी रामा के अनुसार गलियों में जमा पानी इतना गहरा हो जाता है कि दोपहिया वाहन और मोटरसाइकिलें तक उसमें डूब जाती हैं। सीवर सफाई के लिए जो सफाई कर्मचारी आते हैं, वे केवल खानापूर्ति करके चले जाते हैं। वे सफाई पाइप को थोड़ा सा गटर में डालते हैं और बिना काम पूरा किए वहां से निकल जाते हैं। जब मोहल्ले के लोग उनसे सीवर लाइन की पूरी मिट्टी निकालने और गहराई से सफाई करने का आग्रह करते हैं, तो वे अकसर मशीन खराब होने का बहाना बना देते हैं। पूरी सीवर लाइन मिट्टी और कचरे से पटी पड़ी है, जिससे निकासी बंद होकर गंदा पानी उल्टे लोगों के घरों की ओर वापस बहने लगता है।\n\nरसोई तक घुसा सीवर का गंदा पानी, बीमारियों का मंडरा रहा साया\nसविता डागर बताती हैं कि गंदगी और दुर्गंध के कारण घरों में सांस लेना भी मुश्किल हो चुका है। जलभराव के चलते लोगों का घर से बाहर निकलना और बाजार जाना तक रुक गया है। चारों तरफ ठहरे हुए गंदे पानी की वजह से संक्रामक और गंभीर बीमारियां फैलने की निरंतर आशंका बनी हुई है।\n\nघर के भीतर के दर्दनाक हालात साझा करते हुए राजवती ने बताया कि सीवर का दूषित पानी उनके घर की रसोई तक पहुंच जाता है। जब भोजन पकाने और खाने की जगह पर ही बदबूदार पानी भरा हो, तो कोई परिवार कैसे गुजारा कर सकता है। भोजन तैयार करना और रोजमर्रा के काम निपटाना हर दिन का एक भयानक संघर्ष बन गया है, जिससे परिवार के हर सदस्य को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी उठानी पड़ रही है।\n\nसुबह छह बजे पार्षद के दरवाजे पहुंचे लोग, फिर भी नहीं मिला समाधान\n54 वर्षीय लालजीत चौहान ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि मोहल्ले में नन्हे बच्चों से लेकर 54 साल तक के बुजुर्ग सभी इस स्थिति से त्रस्त हैं। करीब चार वर्षों से इस गली की हालत लगातार बिगड़ती चली गई है। उन्होंने बताया कि समस्या इतनी गंभीर हो गई कि स्थानीय लोग सुबह छह बजे ही अपनी परेशानी लेकर पार्षद के घर पहुंच गए, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस समाधान जमीन पर नहीं उतारा गया। हालात ऐसे हैं कि छोटे बच्चों को गोद में उठाकर ही गंदे पानी से बाहर निकालना पड़ता है। गली में हर समय पानी भरे रहने के कारण मकान मालिकों को भी किरायेदारों और आने-जाने वाले लोगों के ताने सुनने पड़ते हैं।\n\nतीन दशकों के निवास के बाद भी विकास से कोसों दूर\nहरी विहार में रहने वाली भगवान देवी का कहना है कि गली की मरम्मत और सीवर की व्यवस्थित निकासी तुरंत की जानी चाहिए ताकि लोग बिना किसी बाधा के आ-जा सकें और बच्चे सुरक्षित माहौल में खेल सकें। उन्होंने बताया कि इस इलाके में लोग पिछले 20 से 30 वर्षों से मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन इतने लंबे अर्से के बाद भी इस गली के बुनियादी विकास पर कोई काम नहीं हुआ है।\n\nवहीं राज मंगल यादव ने कहा कि वे पिछले चार वर्षों से हरी विहार की इस गली की दुर्दशा को देख रहे हैं। यहां अब तक विकास का कोई भी वास्तविक कार्य नहीं किया गया है। बारिश के मौसम में यह संकट कई गुना बढ़ जाता है और पूरी गली तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे अपने ही घरों में नारकीय जीवन जीने पर विवश हैं और प्रशासन से उनकी सिर्फ एक ही मांग है कि इस जलभराव व सीवर समस्या का अविलंब पक्का समाधान किया जाए।\n\nइसका आप पर असर\nबल्लभगढ़ के हरी विहार में सीवर भराव के कारण स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक जीवन पर सीधा बुरा प्रभाव पड़ रहा है।\n\n• फरीदाबाद में: जलभराव और उफनते गटरों के कारण हरी विहार के लोगों के लिए दैनिक आवागमन और बच्चों का स्कूल जाना जोखिम भरा बना हुआ है। दूषित पानी रसोई तक पहुंचने से जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।\n• सामाजिक स्तर पर: कीचड़ और बदबूदार रास्तों को देखकर शादी के रिश्ते तय करने आने वाले लोग बातचीत आगे बढ़ाए बिना लौट रहे हैं। इससे प्रभावित परिवारों की सामाजिक प्रतिष्ठा और विवाह योग्य युवाओं के रिश्तों पर सीधा असर पड़ रहा है।\n• बुनियादी ढांचे पर: सीवर लाइनों में भारी मिट्टी जमा होने से दोपहिया वाहन डूब रहे हैं और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंच रहा है। नागरिकों को अपने दैनिक कामकाज निपटाने के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।\n• प्रशासनिक जवाबदेही पर: बार-बार शिकायतों और सुबह छह बजे पार्षद से मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से नागरिक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। लोगों को अब उच्चाधिकारियों से सीवर की व्यापक सफाई की मांग तेज करनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहरी विहार में सीवर भराव की मुख्य वजह नालियों की दोषपूर्ण बनावट, सीवर लाइन में जमी भारी गाद और नगर निगम की नियमित सफाई का अभाव है।\n\n• दोषपूर्ण नाली और सीवर संरचना: जब से इलाके में नालियों का निर्माण हुआ है, तभी से निकासी की समुचित ढलान न होने से गंदा पानी बाहर बह रहा है। करीब दो से तीन वर्षों से निकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।\n• सीवर लाइनों में सिल्ट और कचरे का जमाव: सीवर पाइपों के अंदर भारी मात्रा में मिट्टी और ठोस कचरा भरा पड़ा है, जिससे पानी का बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है। उचित तरीके से सफाई न होने के कारण दूषित पानी रिवर्स होकर लोगों के घरों और रसोई में घुस रहा है।\n• सफाई कर्मचारियों की लापरवाही और मशीनों का अभाव: सफाई कर्मचारी केवल औपचारिकता निभाते हुए पाइप को थोड़ा सा डालकर चले जाते हैं। पूरी सफाई मांगने पर मशीन खराब होने का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।\n• जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अनदेखी: चुनाव बीत जाने के बाद पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी शिकायतों की सुध नहीं लेते। 20 से 30 वर्षों पुरानी इस आबादी में सीवर सुधार पर कोई स्थायी विकास कार्य नहीं किया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह समस्या फरीदाबाद के किस इलाके की है?\nयह समस्या फरीदाबाद के बल्लभगढ़ अंतर्गत सुभाष कॉलोनी के हरी विहार, वार्ड नंबर 45 की है।\n\n2. गंदगी और जलभराव के कारण परिवारों को सामाजिक स्तर पर क्या परेशानी हो रही है?\nबेटे-बेटियों के विवाह के लिए रिश्ते देखने आने वाले लोग गली में भरा गंदा पानी और कीचड़ देखकर नाराज होकर वापस लौट जाते हैं।\n\n3. सीवर साफ करने वाले कर्मचारियों पर स्थानीय लोगों ने क्या आरोप लगाए?\nलोगों का आरोप है कि कर्मचारी पाइप को थोड़ा सा अंदर डालकर वापस चले जाते हैं और पूरी सफाई मांगने पर मशीन खराब होने का बहाना बनाते हैं।\n\n4. घरों के भीतर गंदे पानी से क्या नुकसान हो रहा है?\nसीवर का गंदा पानी लोगों की रसोई तक पहुंच जाता है, जिससे खाना बनाना और रहना मुश्किल हो गया है तथा बीमारी फैलने का डर बना हुआ है।\n\n5. समस्या के समाधान के लिए लोगों ने पार्षद से कब संपर्क किया?\nस्थानीय नागरिक सुबह छह बजे पार्षद के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे, लेकिन इसके बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।\n\n6. स्थानीय निवासी इस क्षेत्र में कितने समय से रह रहे हैं?\nइलाके के लोग यहां लगभग 20 से 30 वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन इतने वर्षों में भी गली का पक्का विकास नहीं कराया गया।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-26",
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