# फिरोजाबाद की बोहरान गली कैसे बनी कांच की चूड़ियों का विश्व प्रसिद्ध बाजार, सादी बनावट से शुरू हुआ था सफर

> कांच नगरी फिरोजाबाद के घंटाघर के समीप स्थित 150 से 200 साल पुरानी बोहरान गली का बाजार आज देश-दुनिया में कांच की चूड़ियों और कंगन के लिए विशेष पहचान रखता है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/firozabad-ki-bohran-gali-kaise-bani-kancha-ki-churiyon-ka-vishva-prasiddha-bajara-sadi-banavata-se-shuru-hua-tha-saphara-35062 · **Language:** Hindi
**Tags:** फिरोजाबाद, कांच की चूड़ियां, बोहरान गली, घंटाघर, उत्तर प्रदेश, हस्तशिल्प बाजार, कांच उद्योग

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद को पूरे विश्व में कांच की नगरी के रूप में पहचाना जाता है। महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली कांच की चूड़ियों का निर्माण इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है। शहर में तैयार होने वाली विविध प्रकार की चूड़ियों की बिक्री के लिए एक विशाल बाजार सजता है, जहां खरीदारी के सिलसिले में भारत के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी खरीदार पहुंचते हैं। आज भले ही यह बाजार बेहद विशाल और आधुनिक डिजाइनों से गुलजार दिखता हो, लेकिन इसकी शुरुआत दशकों पहले बेहद सादे स्तर पर हुई थी, जब स्थानीय कारोबारी सिर्फ बिना सजावट वाली सादी चूड़ियां बनाकर बेचा करते थे। उस दौर में गिनी-चुनी दुकानें हुआ करती थीं और लोग अपने रिहाइशी मकानों के निचले हिस्से में चूड़ियां रखकर कारोबार चलाते थे।

## 150 से 200 साल पुराना इतिहास और कारीगरी की शुरुआत
फिरोजाबाद में चूड़ियों के कारोबार से जुड़े बी.एस. गुप्ता के अनुसार, मशहूर चूड़ी बाजार गली बोहरान का इतिहास शहर में चूड़ी निर्माण की शुरुआत के साथ ही जुड़ा हुआ है। लगभग 150 से 200 वर्ष पहले स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने इस हुनर और व्यापार की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में कारीगर त्रिकोणीय आकार के एक छोटे से बेलन का सहारा लेकर अलग-अलग नाप और साइज की चूड़ियां तैयार करते थे। समय बीतने के साथ यह घरेलू हुनर एक व्यवस्थित रूप लेने लगा और कांच के छोटे-छोटे उद्योग स्थापित होने लगे।

इसी विकास क्रम के दौरान फिरोजाबाद के घंटाघर के नजदीक स्थित गली बोहरान में चूड़ियों की दुकानें सजनी शुरू हुईं। उस समय घंटाघर के पास से गुजरने वाला मार्ग ही आगरा जाने का मुख्य रास्ता हुआ करता था, जिससे वहां आवाजाही हमेशा बनी रहती थी। इसी रणनीतिक स्थान का लाभ उठाते हुए स्थानीय निवासियों ने बोहरान गली में अपने घरों के नीचे दुकानें स्थापित कीं और साथ ही चूड़ियों के गोदाम भी तैयार कर लिए। यहां से अन्य शहरों के व्यापारियों को माल भेजा जाने लगा और धीरे-धीरे यह गली थोक और खुदरा व्यापार का केंद्र बन गई।

## सादी चूड़ियों से सुनहरी बर्क और हिल्ल डिजाइन तक का सफर
प्रारंभिक दौर में बोहरान गली की दुकानों पर सिर्फ सादी चूड़ियां बिकती थीं, जिनमें किसी प्रकार की अतिरिक्त सजावट या नक्काशी नहीं होती थी। वक्त के साथ कारीगरों ने अपने काम में नए प्रयोग शुरू किए। चूड़ियों की कटिंग की कला विकसित हुई और बाद में कुशल कारीगरों ने सोने की बर्क लगाकर विशेष प्रकार की हिल्ल चूड़ियों का निर्माण करना शुरू किया। इन नवाचारों ने फिरोजाबाद की चूड़ियों को एक विशिष्ट आकर्षण दिया, जिससे बोहरान गली का बाजार समय के साथ सबसे प्राचीन और विख्यात चूड़ी केंद्र में तब्दील हो गया।

## हजारों दुकानों में फैली विस्तृत वैरायटी और खरीदारों का भरोसा
वर्तमान समय में बोहरान गली का बाजार फैंसी चूड़ियों और खूबसूरत कंगनों के विशाल संग्रह के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ के निवासी और फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉ. अमित यादव ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गली बोहरान में खरीदारी करने पहुंचे हैं। उनका कहना है कि यह बाजार अत्यंत विशाल और सुंदर है, जहां हजारों की संख्या में चूड़ियों की दुकानें मौजूद हैं और एक से बढ़कर एक अनूठे डिजाइन उपलब्ध हैं।

वहीं खरीदारी के लिए पहुंचीं डॉ. कल्पना यादव ने बताया कि बोहरान गली के बाजार में अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण और सही चूड़ियां मिलती हैं। यहां चूड़ियों के दाम काफी किफायती और वाजिब रहते हैं, जिसके चलते लोग दूर-दराज से विशेष रूप से इसी बाजार में खरीदारी करने के लिए आते हैं।

## इसका आप पर असर
फिरोजाबाद की बोहरान गली का बाजार खरीदारों और खुदरा व्यापारियों को सीधे विनिर्माण केंद्र से जुड़कर किफायती दाम पर विविध कांच की चूड़ियां प्राप्त करने का अवसर देता है।

- **भारत में:** देश भर से आने वाले खुदरा व्यापारी और ग्राहक यहां से थोक और खुदरा भाव में प्रामाणिक कांच की चूड़ियां खरीद सकते हैं। इससे बिचौलियों के बिना सीधे ऐतिहासिक विनिर्माण क्लस्टर से नवीनतम डिजाइनों का चयन संभव होता है।
- **फिरोजाबाद में:** स्थानीय निवासियों और चिकित्सा जैसे पेशेवरों के लिए यह बाजार किफायती दामों में व्यापक विकल्प उपलब्ध कराता है। हजारों दुकानों के इस केंद्र से शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कांच कारीगरी को लगातार संबल मिलता है।
- **त्योहारों और शादी की खरीदारी:** विवाह और पारंपरिक समारोहों की तैयारी कर रहे परिवारों को एक ही स्थान पर सादी से लेकर सोने की बर्क वाली हिल्ल चूड़ियां मिल जाती हैं। सही कीमत और बड़ी संख्या में दुकानों के विकल्प खरीदारों को बजट में उत्कृष्ट चयन की सुविधा देते हैं।
- **कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए:** 150 से 200 साल पुराने इस व्यापारिक केंद्र से स्थानीय कारीगरों को अपनी कटिंग और फैंसी कंगन कला का सीधा बाजार मिलता है। गोदामों और दुकानों की मौजूदगी से माल का अंतरराज्यीय प्रेषण सुगम रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
बोहरान गली का एक साधारण आवासीय क्षेत्र से प्रसिद्ध चूड़ी बाजार में बदलना आगरा मुख्य मार्ग पर इसकी रणनीतिक स्थिति और स्थानीय कारीगरों के तकनीकी विकास का प्रत्यक्ष परिणाम था।

- **शुरुआती कारीगरी की स्थापना:** लगभग 150 से 200 वर्ष पूर्व मुस्लिम समाज के कारीगरों ने त्रिकोणीय आकार के छोटे बेलन से अलग-अलग साइज की चूड़ियां ढालना शुरू किया। इसी प्रारंभिक हुनर ने आगे चलकर शहर में संगठित कांच कुटीर उद्योगों की नींव तैयार की।
- **आगरा मुख्य मार्ग का रणनीतिक लाभ:** फिरोजाबाद के घंटाघर के समीप से गुजरने वाली सड़क उस दौर में आगरा जाने का मुख्य रास्ता हुआ करती थी। इस निरंतर आवागमन को देखते हुए स्थानीय लोगों ने अपने मकानों के निचले हिस्से में दुकानें और गोदाम बनाकर व्यापार को विस्तार दिया।
- **डिजाइन और कटिंग का तकनीकी विकास:** बाजार केवल सादी चूड़ियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कारीगरों ने कटिंग का हुनर सीखा और सोने की बर्क वाली हिल्ल चूड़ियां बनानी शुरू कीं। उत्पाद की बढ़ती गुणवत्ता और सजावट ने बाहर के व्यापारियों को अपनी ओर आकर्षित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. फिरोजाबाद की बोहरान गली मार्केट कितने साल पुरानी है?
यह प्रसिद्ध बाजार लगभग 150 से 200 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत फिरोजाबाद में चूड़ियों के निर्माण के साथ ही हुई थी।

### 2. शुरुआती दौर में बोहरान गली में किस तरह की चूड़ियां बेची जाती थीं?
शुरुआत में इस बाजार में बिना किसी सजावट वाली केवल सादी कांच की चूड़ियां ही बनाकर बेची जाती थीं।

### 3. बोहरान गली में चूड़ियों के व्यापार की शुरुआत किसने की थी?
बी.एस. गुप्ता के अनुसार, लगभग 150 से 200 साल पहले स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने त्रिकोणीय बेलन से चूड़ियां बनाकर इस व्यापार को शुरू किया था।

### 4. बोहरान गली बाजार घंटाघर के पास क्यों फला-फूला?
घंटाघर के पास का रास्ता उस समय आगरा जाने का मुख्य मार्ग था, जिसके चलते लोगों ने वहां अपने घरों के नीचे दुकानें और गोदाम बना लिए।

### 5. सादी चूड़ियों के बाद बाजार में कौन से नए डिजाइन शामिल हुए?
कारीगरों ने चूड़ियों की कटिंग शुरू की और सोने की बर्क लगाकर विशेष हिल्ल चूड़ियां तैयार करना आरंभ किया।

### 6. वर्तमान में ग्राहक बोहरान गली में खरीदारी के लिए क्यों आते हैं?
यहां हजारों दुकानों में चूड़ियों और फैंसी कंगनों के अनगिनत डिजाइन मिलते हैं और उनकी कीमतें भी काफी वाजिब व सस्ती रहती हैं।

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