# फ्लाईदुबई विमान अपहरण साजिश के बीच भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार का अदम्य साहस और चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई

> फ्लाईदुबई के विमान को क्रैश कराने की आतंकी साजिश को भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने जान पर खेलकर नाकाम किया, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की याचिका खारिज कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/flydubai-vimana-apaharana-sajisha-ke-bicha-bharatiya-kaiptana-smit-machhar-ka-adamya-sahasa-aura-chunava-ayoga-para-suprima-korta--44009 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्मित मच्छार, फ्लाईदुबई, बेंजामिन नेतन्याहू, ज्ञानेश कुमार, सुप्रीम कोर्ट, हमाम अल-हम्मामी

हवाई सुरक्षा और राष्ट्रीय राजनीति के मोर्चे पर दो बेहद संवेदनशील घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां फ्लाईदुबई की उड़ान में एक भयावह आतंकी साजिश को भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने अपने अदम्य साहस और सूझबूझ से नाकाम कर 180 यात्रियों की जान बचाई, वहीं दूसरी तरफ देश की शीर्ष अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग वाली याचिका पर तत्काल अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। दोनों ही मामलों में जांच और विमर्श का दायरा काफी गहरा है।

## कॉकपिट में खौफनाक साजिश और कैप्टन स्मित मच्छार का पराक्रम
फ्लाईदुबई की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान उस समय रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर पैदा हो गया, जब ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने विमान को इजरायल के तेल अवीव हवाई अड्डे पर क्रैश कराने की कोशिश की। संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा एजेंसियों की हिरासत में मौजूद अल-हम्मामी से की जा रही पूछताछ में सामने आया है कि वह एक प्रशिक्षित जिहादी है और कई वर्षों से इजरायल जाने वाली किसी उड़ान को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। उसने इसी नापाक इरादे को पूरा करने के लिए सुनियोजित तरीके से फ्लाईदुबई में नौकरी हासिल की थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उसने पहले भी एक बार विमान को क्रैश कराने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय फ्लाइट में उसके किसी करीबी के सवार होने की वजह से उसने अपना कदम पीछे खींच लिया था।

विमान में घटी घटना का ब्योरा देते हुए भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर बताया कि उड़ान भरने के कुछ घंटों बाद को-पायलट ने कॉकपिट में नमाज पढ़ने की इच्छा जाहिर की। स्मित मच्छार ने पेशेवर भरोसे के तहत उसे नमाज के लिए जगह दी और दूसरी तरफ मुड़कर अपने काम में व्यस्त हो गए। नमाज पूरी करने के तुरंत बाद अल-हम्मामी ने पीछे से क्रैश एक्स (आपातकालीन कुल्हाड़ी) से कैप्टन स्मित के सिर पर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावर ने स्मित पर कुल्हाड़ी से तब तक ताबड़तोड़ वार किए जब तक कि वह गंभीर रूप से लहूलुहान होकर अपनी सीट से नीचे नहीं गिर गए।

सिर से भारी मात्रा में खून बहने और आंखों के आगे अंधेरा छाने के बावजूद कैप्टन स्मित ने महसूस किया कि विमान तेजी से नीचे की ओर गोता खा रहा है और को-पायलट उसे क्रैश कराने पर आमादा है। लगभग अचेत अवस्था में भी स्मित ने असाधारण मानसिक दृढ़ता दिखाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। हमलावर ने उन्हें रोकते हुए दोबारा दरवाजा बंद कर दिया और फिर से उन पर हमला किया। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कैप्टन स्मित ने एक बार फिर पूरी ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा दूसरी बार खोल दिया। दरवाजा खुलते ही सतर्क यात्री तेजी से कॉकपिट के भीतर दाखिल हुए और उन्होंने हमलावर पायलट को दबोच लिया, जिससे विमान में सवार 180 लोगों की जान बच गई।

## अंतरराष्ट्रीय जांच, इजरायल में सम्मान और राजनीतिक चुप्पी
अल-हम्मामी वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात की जेल में बंद है और वहां की पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है। इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ताल शुरू हो गई है। ऑस्ट्रेलियाई काउंटर-टेररिज्म यूनिट भी मामले की जांच में जुटी है, क्योंकि अल-हम्मामी ने दस वर्ष पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित आरएमआईटी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी, जहां पढ़ाई के दौरान ही वह कट्टरपंथियों के संपर्क में आकर प्रभावित हुआ था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस साजिश पर कड़े सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब ओमान के साथ इजरायल के औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, तो एक ओमानी पायलट को तेल अवीव जाने वाली उड़ान के संचालन की अनुमति कैसे दी गई। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि हमलावर के पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है और इजरायल इस पूरे षड्यंत्र की तह तक जाएगा।

इधर, कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज संयुक्त अरब अमीरात के मिलिट्री अस्पताल में चल रहा है और उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। इजरायल में उनकी बहादुरी की जमकर सराहना की जा रही है। तेल अवीव, येरूशलम और हाइफा जैसे प्रमुख शहरों में बड़े-बड़े बिलबोर्ड्स लगाए गए हैं, जिन पर कैप्टन स्मित की तस्वीर के साथ देवनागरी लिपि में धन्यवाद नायक लिखा गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को फोन कर उनकी हिम्मत की सराहना की, इजरायली नागरिकों की रक्षा के लिए आभार जताया और उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह में पारंपरिक मशाल प्रज्वलित करने के लिए इजरायल आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया।

हालांकि, इस अदम्य वीरता के बीच भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गंभीर संकट के क्षणों में हनुमान चालीसा का पाठ कर मानसिक संबल जुटाने वाले इस बहादुर पायलट के पराक्रम पर देश के प्रमुख विपक्षी दलों और राहुल गांधी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, न ही कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर इसका कोई उल्लेख दिखा। इस चुप्पी पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या अंतरराष्ट्रीय और मानवीय रक्षा से जुड़े ऐसे पराक्रम को भी संकीर्ण राजनीतिक चश्मे और ध्रुवीकरण के नजरिए से देखा जा रहा है।

## मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
दूसरी ओर, सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल मीडिया में छपी खबरों या अखबारों की रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक पदों के खिलाफ कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मनमाने तरीके से कामकाज चला रहे हैं और उन्होंने एसआईआर (विशेष सारांश संशोधन) से संबंधित ऐसे 14 निर्णय लिए, जिन पर आयोग के बाकी दो चुनाव आयुक्तों ने लिखित असहमति जताई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू, चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी सीमा खन्ना को औपचारिक नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

## संवैधानिक प्रक्रिया, फॉर्म-6 विवाद और न्यायपालिका का संतुलन
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने यह व्यवस्था दी कि यदि रिकॉर्ड की जांच में यह साबित होता है कि निर्वाचन आयोग द्वारा फैसले सर्वसम्मति या तय नियमों के बिना लिए गए हैं, तो उन फैसलों को वापस लिया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित दस्तावेज देखना अनिवार्य है। इसके अलावा, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी थी। दरअसल, नौ दिन पहले चुनाव आयोग ने यह कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न किए गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त है, जिसे अदालत ने पूरी तरह गलत करार दिया। अब इस बात की भी जांच की जाएगी कि फॉर्म-6 में संशोधन किस आधार पर और कैसे किए गए।

इस कानूनी विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने एक सार्वजनिक टिप्पणी में कहा कि ऐसी कोई भी प्रशासनिक प्रक्रिया जो लाखों नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करती हो, वह मनमानी है और संविधान की मूल भावना पर हमला है, जिसे कोई भी अदालत उचित नहीं ठहरा सकती। इस टिप्पणी को विपक्षी दलों द्वारा प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इस पृष्ठभूमि में अदालत ने रेखांकित किया कि न्यायिक प्रक्रिया दोनों पक्षों को सुने बिना एकतरफा दबाव या अखबारों की सुर्खियों के आधार पर संचालित नहीं हो सकती। सभी पक्षों को अपने साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे ताकि संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप निर्णय लिया जा सके।

## इसका आप पर असर
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय उड़ान सुरक्षा और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता अधिकारों की पारदर्शिता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **हवाई यात्रियों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में कॉकपिट क्रू की पृष्ठभूमि जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल अब और अधिक कड़े किए जाएंगे। खाड़ी देशों से यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों को उड़ानों में अतिरिक्त सुरक्षा जांच का सामना करना पड़ सकता है।
- **मतदाताओं के लिए:** मतदाता पंजीकरण और फॉर्म-6 में संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। यदि चुनाव आयोग के नियमों में बदलाव की पुष्टि होती है तो संशोधन नियमों में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** संवैधानिक संस्थाओं में असहमति और निर्णय प्रक्रिया पर शीर्ष अदालत के नोटिस से चुनावी निष्पक्षता को बल मिलेगा। चार सप्ताह बाद आने वाले जवाब से चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज की स्थिति स्पष्ट होगी।
- **वैश्विक सुरक्षा सहयोग:** विमान अपहरण और कट्टरपंथ से निपटने के लिए भारत, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया तेज होगी। यह कदम विदेशी एयरलाइंस में कार्यरत पायलटों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम एक कट्टरपंथी पायलट की सोची-समझी आतंकी साजिश और चुनाव आयोग के प्रशासनिक निर्णयों पर उठे कानूनी विवाद के कारण सामने आया।

- **विमान पर आतंकी हमला:** ओमानी को-पायलट ने कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित होकर तेल अवीव में विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की पूर्व-नियोजित योजना बनाई थी। उसने नमाज पढ़ने के बहाने कैप्टन पर पीछे से आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला कर नियंत्रण छीनने का प्रयास किया।
- **कट्टरपंथ की पृष्ठभूमि:** हमलावर एक दशक पूर्व ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान चरमपंथी तत्वों के प्रभाव में आया था। उस दौरान मिले प्रशिक्षण और संपर्कों की वजह से वह लगातार इजरायल की उड़ानों को निशाना बनाने की फिराक में था।
- **निर्वाचन आयोग में मतभेद:** मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा दोनों चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद एसआईआर से जुड़े 14 फैसले लेने के आरोपों के चलते याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि ये निर्णय आयोग में तय आम सहमति के बिना मनमाने ढंग से लिए गए।
- **फॉर्म-6 पर न्यायिक पड़ताल:** चुनाव आयोग द्वारा यह दावा किए जाने के बाद विवाद बढ़ा कि फॉर्म-6 घोषणापत्र को अदालत की मंजूरी प्राप्त थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत अब यह जांच कर रही है कि संशोधन किन परिस्थितियों में किए गए।

## सवाल-जवाब

### 1. कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट में यात्रियों की जान कैसे बचाई?
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने अदम्य साहस दिखाते हुए दो बार कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे यात्रियों ने अंदर घुसकर हमलावर को काबू में कर लिया।

### 2. हमलावर पायलट हमाम अल-हम्मामी का क्या इरादा था?
अल-हम्मामी फ्लाईदुबई के इस विमान को इजरायल के तेल अवीव हवाई अड्डे पर ले जाकर क्रैश कराना चाहता था।

### 3. इजरायल ने कैप्टन स्मित की बहादुरी का सम्मान किस तरह किया?
इजरायल के कई शहरों में कैप्टन स्मित के धन्यवाद वाले बिलबोर्ड लगाए गए और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने का निमंत्रण दिया।

### 4. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई थी?
याचिका में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बिना सहमति के 14 अहम फैसले लिए, इसलिए उन्हें पद से निलंबित किया जाए, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

### 5. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के मामले में क्या आदेश दिया?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

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