# गंगा के बढ़ते जलस्तर से कानपुर में बाढ़ का अलर्ट, प्रशासन ने खोले बैराज के सभी 30 गेट

> पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के कारण कानपुर में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पास पहुंच गया है, जिसके बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-07-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/ganga-ke-barhate-jalastara-se-kanpur-men-barha-ka-alarta-prashasana-ne-khole-barrage-ke-sabhi-30-gate-10426 · **Language:** Hindi
**Tags:** कानपुर समाचार, गंगा नदी, गंगा बैराज, उत्तर प्रदेश बाढ़, जल पुलिस, बाढ़ अलर्ट

पहाड़ों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी के भारी बहाव के कारण गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कानपुर और उसके नजदीकी तटीय इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। शुक्रवार को गंगा बैराज के अपस्ट्रीम पर नदी का जलस्तर बढ़कर 112.99 मीटर दर्ज किया गया, जो लगभग 113 मीटर के करीब है। यह जलस्तर खतरे के चेतावनी बिंदु के बिल्कुल बराबर पहुंच चुका है। गंगा नदी के पानी के इस बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने और आस-पास के मैदानी इलाकों को जलमग्न होने से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बैराज के सभी 30 गेटों को पूरी तरह से खोल दिया है।

## लगातार पानी आने से बना हुआ है खतरा
हालांकि, शुक्रवार दोपहर तक जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 112.75 मीटर पर आ गया, लेकिन इससे बाढ़ का खतरा टला नहीं है। उत्तराखंड के हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के ही नरौरा से लगातार बहुत बड़ी मात्रा में पानी कानपुर की तरफ छोड़ा जा रहा है। इसी निरंतर बहाव के चलते नदी का जलस्तर कभी भी दोबारा बढ़ सकता है। सिंचाई विभाग के तकनीकी अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि गंगा बैराज के द्वारों को तुरंत न खोला जाता, तो पानी का भारी दबाव तटवर्ती इलाकों को अपनी चपेट में ले लेता। गंगा नदी की इस स्थिति को देखते हुए विभाग की विशेष टीमें अब हर घंटे पानी के उतार-चढ़ाव का आकलन कर रही हैं और पल-पल की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

## तटीय और निचले गांवों में अलर्ट जारी
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों में यदि अगले कुछ दिनों तक वर्षा का यही क्रम जारी रहता है, तो गंगा के मैदानी इलाकों में पानी का फैलाव और अधिक बढ़ जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर चैनपुरवा समेत कई निचले और तटीय गांवों में नदी का पानी प्रवेश कर सकता है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम लगातार बांधों और तटबंधों की मजबूती की जांच कर रही है ताकि किसी भी संभावित रिसाव या नुकसान को तुरंत रोका जा सके।

## प्रशासन मुस्तैद, 30 से अधिक बाढ़ चौकियां सक्रिय
बाढ़ की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाल ही में कानपुर के जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर के साथ मिलकर गंगा के किनारे बसे संवेदनशील इलाकों का जमीनी दौरा किया था। इस निरीक्षण के तुरंत बाद प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए गंगा बैराज और उसके आस-पास के संवेदनशील गांवों में 30 से अधिक बाढ़ चौकियों को सक्रिय करने का आदेश जारी कर दिया है। इन चौकियों पर चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले कर्मचारी जलस्तर की निगरानी करेंगे और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में पहुंचाने का काम करेंगे। राहत और बचाव दल को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी परिस्थिति से निपटा जा सके।

## प्रमुख घाटों पर सुरक्षा सख्त, नौका संचालन पर रोक
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने कानपुर शहर के प्रमुख घाटों पर लोगों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। अटल घाट, सरसैया घाट और परमट घाट सहित सभी महत्वपूर्ण घाटों पर जल पुलिस की गश्त और तैनात रहने वाले जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है। आम जनता और श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने या नदी के किनारे के अत्यधिक नजदीक जाने से पूरी तरह से रोक दिया गया है। एहतियात बरतते हुए नदी में नावों के संचालन को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही, कानपुर बोट क्लब ने भी पर्यटकों और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगामी अक्टूबर महीने तक बोटिंग गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने बताया कि प्रशासन हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहा है और बाढ़ संभावित गांवों की विशेष निगरानी की जा रही है। यदि किसी भी गांव में पानी घुसने या किसी ग्रामीण के फंसने की खबर मिलती है, तो तुरंत बचाव अभियान शुरू किया जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ों में अभी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत अधिकारियों को सूचित करने की अपील की है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होने से मैदानी इलाकों में बहने वाली नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा खतरे बढ़ जाते हैं।
- **कानपुर में:** गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों और घाटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, बोटिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और निचले गांवों के निवासियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. गंगा बैराज के सभी 30 गेट क्यों खोले गए?
पहाड़ों में अत्यधिक बारिश के कारण गंगा का जलस्तर 112.99 मीटर (चेतावनी बिंदु) तक पहुंच गया था। पानी के दबाव को कम करने और आस-पास के क्षेत्रों में जलभराव को रोकने के लिए सभी 30 गेट खोले गए हैं।

### 2. कानपुर में गंगा के जलस्तर में क्या बदलाव दर्ज किया गया?
शुक्रवार सुबह जलस्तर 112.99 मीटर पर था जो लगभग 113 मीटर है। हालांकि, दोपहर तक यह थोड़ा घटकर 112.75 मीटर दर्ज किया गया, लेकिन लगातार हो रहे इनफ्लो के कारण खतरा बरकरार है।

### 3. प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कौन सी चौकियां सक्रिय की हैं?
प्रशासन ने गंगा बैराज के आस-पास और संवेदनशील गांवों में स्थिति की लगातार निगरानी के लिए 30 से अधिक बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया है।

### 4. कानपुर में बोटिंग पर कब तक रोक लगाई गई है?
बढ़ते जलस्तर और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए कानपुर बोट क्लब ने आगामी अक्टूबर महीने तक बोटिंग गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

### 5. किन गांवों में बाढ़ का सबसे अधिक खतरा है?
गंगा का जलस्तर बढ़ने से चैनपुरवा समेत कई अन्य निचले और तटीय गांवों में नदी का पानी घुसने की आशंका सबसे अधिक बनी हुई है।

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