अरब सागर की लहरों पर दौड़ेगी इलेक्ट्रिक वाटर टैक्सी, गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई एयरपोर्ट की दूरी आधे घंटे में होगी तय महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के भीषण सड़क जाम से राहत दिलाने के लिए पोर्ट ऑफ स्टॉकहोम से 11 हाई-स्पीड हाइड्रोफॉइल बोट मंगाई हैं, जो गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई एयरपोर्ट का सफर सिर्फ 30 मिनट में पूरा कराएंगी। मुंबई की व्यस्त सड़कों पर लगने वाले भीषण जाम से जूझना शहर के बाशिंदों और पर्यटकों दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। खासकर जब किसी को निर्धारित समय पर अपनी फ्लाइट या ट्रेन पकड़नी हो, तो सड़क पर लगने वाला ट्रैफिक तनाव का सबब बन जाता है। इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने और यात्रा के समय में भारी कटौती करने के मकसद से सरकार ने अरब सागर के जलमार्ग का सहारा लेने का निर्णय किया है। अब यात्री गेटवे ऑफ इंडिया से सीधे नवी मुंबई एयरपोर्ट तक का लंबा सफर समुद्री रास्ते से महज 30 मिनट में पूरा कर सकेंगे। स्वीडिश तकनीक से लैस 11 आधुनिक हाइड्रोफॉइल बोट इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पोर्ट ऑफ स्टॉकहोम से 11 खास इलेक्ट्रिक बोट मंगाई हैं। इन अत्याधुनिक बोटों को कैंडेला हाइड्रोफॉइल बोट नाम दिया गया है, जो पानी की सतह पर तैरने के बजाय उसके ऊपर उठकर चलने में सक्षम हैं। गति के मामले में यह नौका 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। क्षमता की बात करें तो एक समय में इसमें 30 यात्री आराम से सफर कर सकते हैं। यह पूरी यात्रा बिना किसी बाधा के 30 मिनट में पूरी हो जाएगी। मौजूदा समय में सड़क के रास्ते गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई एयरपोर्ट तक जाने में लोगों को कम से कम 1.30 से 2 घंटे तक का लंबा वक्त लग जाता है और साथ ही भारी मात्रा में ईंधन की खपत भी होती है। कंप्यूटर गाइडेड संचालन और ऊर्जा की भारी बचत तकनीकी विशिष्टताओं के अनुसार, यह क्रूज बोट सामान्य तौर पर 25 नॉट यानी लगभग 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से जलमार्ग पर दौड़ेगी। इसका निर्माण स्वीडन की एक विशेषज्ञ मरीन टेक कंपनी द्वारा किया गया है, जबकि इसके स्थानीय संचालन और रख-रखाव की पूरी जिम्मेदारी मुंबई की कंपनी जलविमान संभालेगी। इस बोट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका नेविगेशन पूरी तरह से कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित और निर्देशित होगा। हाइड्रोफॉइल तकनीक की बदौलत इसका अधिकांश ढांचा पानी की सतह से ऊपर उठा रहता है, जिससे जल प्रतिरोध न्यूनतम हो जाता है और संचालन में बहुत कम ऊर्जा लगती है। यह प्रणाली 80 फीसदी ऊर्जा का उपयोग करती है और शेष 20 फीसदी ताकत पानी के स्वाभाविक बहाव से हासिल कर अपनी कार्यकुशलता बढ़ाती है। साउंडप्रूफ केबिन और भविष्य में रूट विस्तार का खाका यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए बोट के अंदर के हिस्से को पूरी तरह से साउंडप्रूफ बनाया गया है, जिससे बाहर के शोर से मुक्ति मिलेगी। इसके भीतर वातानुकूलन यानी एसी के साथ-साथ वाईफाई और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हालांकि प्राथमिक चरण में इस सेवा की शुरुआत गेटवे ऑफ इंडिया और नवी मुंबई एयरपोर्ट के बीच सीधी कनेक्टिविटी के साथ की जाएगी, लेकिन योजनाकारों ने इसके नेटवर्क को भविष्य में और व्यापक बनाने की तैयारी कर रखी है। आगे चलकर इस वाटर टैक्सी नेटवर्क का विस्तार अलीबाग और एलीफैंटा आईलैंड तक भी किए जाने की योजना है। इस नए जलमार्ग विकल्प के शुरू होने से हवाई अड्डे की ओर जाने वाले यात्रियों को सड़क के भारी ट्रैफिक जाम और देरी के झंझट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकेगी। इसका आप पर असर गेटवे ऑफ इंडिया और नवी मुंबई एयरपोर्ट के बीच वाटर टैक्सी शुरू होने से हवाई यात्रियों के यात्रा समय में 1 से डेढ़ घंटे तक की सीधी बचत होगी। • भारत में: बड़े तटीय शहरों में जलमार्ग को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ने की दिशा में यह कदम एक मिसाल बनेगा। अन्य राज्य भी एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोफॉइल बोट अपनाने पर विचार कर सकते हैं। • मुंबई में: दक्षिण मुंबई से नवी मुंबई एयरपोर्ट जाने वाले मुसाफिरों को सड़क के 2 घंटे के भारी जाम से मुक्ति मिलेगी। सड़क मार्ग का ईंधन खर्च बचेगा और लोग बिना किसी देरी के ठीक 30 मिनट में एयरपोर्ट टर्मिनल तक पहुंच सकेंगे। • पर्यटन क्षेत्र में: भविष्य में एलीफैंटा और अलीबाग तक विस्तार होने से पर्यटकों को तेज और सुविधाजनक समुद्री सफर का विकल्प मिलेगा। छुट्टियों और सप्ताहांत पर इन द्वीपों की यात्रा काफी सुगम हो जाएगी। • पर्यावरण स्तर पर: पूरी तरह इलेक्ट्रिक और हाइड्रोफॉइल तकनीक पर आधारित होने के कारण यह सेवा शून्य कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करेगी। इससे शहर की सड़कों पर चलने वाली टैक्सियों और निजी गाड़ियों का प्रदूषण घटेगा। ऐसा क्यों हुआ मुंबई की सड़कों पर भारी ट्रैफिक दबाव और दक्षिण मुंबई से नवी मुंबई के बीच लगने वाले अत्यधिक समय के समाधान के रूप में इस जलमार्ग सेवा को शुरू किया गया है। सड़क मार्ग पर पीक आवर्स के दौरान लगने वाले जाम से हवाई यात्रियों की उड़ान छूटने का जोखिम बना रहता है। • सड़क जाम और लंबा सफर: गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई एयरपोर्ट तक सड़क मार्ग से जाने में फिलहाल 1.30 से 2 घंटे तक लग जाते हैं। भारी ट्रैफिक और ईंधन की अत्यधिक बर्बादी ने वैकल्पिक जलमार्ग तलाशने को मजबूर किया। • आधुनिक तकनीक की उपलब्धता: स्वीडन में विकसित कैंडेला हाइड्रोफॉइल बोट पानी के ऊपर उठकर चलने के कारण तेज गति और ऊर्जा बचत प्रदान करती हैं। इस तकनीक के आने से 30 मिनट में यह दूरी तय करना तकनीकी रूप से संभव हुआ। • ईंधन बचत और हरित ऊर्जा लक्ष्य: पारंपरिक नौकाओं की तुलना में इलेक्ट्रिक हाइड्रोफॉइल बोट 80 प्रतिशत ऊर्जा का उपयोग करती हैं और शेष पानी के बहाव से प्राप्त करती हैं। इससे कम लागत और पर्यावरण संरक्षण दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ पूरा किया जा सकेगा। सवाल-जवाब 1. वाटर टैक्सी से गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने में कितना समय लगेगा? इस इलेक्ट्रिक वाटर टैक्सी से यह सफर केवल 30 मिनट में पूरा होगा, जबकि सड़क मार्ग से इसमें 1.30 से 2 घंटे का समय लगता है। 2. इन वाटर टैक्सियों की गति और यात्री क्षमता कितनी है? यह बोट 50 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार और 25 नॉट (40-45 किमी/घंटे) की गति से चल सकती है, जिसमें एक बार में 30 यात्री बैठ सकते हैं। 3. महाराष्ट्र सरकार ने ये बोट कहां से मंगाई हैं? महाराष्ट्र सरकार ने कुल 11 कैंडेला हाइड्रोफॉइल इलेक्ट्रिक बोट पोर्ट ऑफ स्टॉकहोम से मंगाई हैं। 4. इस वाटर टैक्सी का संचालन कौन सी कंपनी करेगी? इसे स्वीडन की मरीन टेक कंपनी ने तैयार किया है और इसका संचालन मुंबई की स्थानीय कंपनी जलविमान करेगी। 5. भविष्य में इस वाटर टैक्सी के रूट को कहां तक बढ़ाया जाएगा? शुरुआती चरण के बाद इस वाटर टैक्सी सेवा का विस्तार अलीबाग और एलीफैंटा आईलैंड तक करने की योजना है। https://trendkia.com/national/gateway-of-india-se-navi-mumbai-airport-ki-duri-adhe-ghnte-men-hogi-taya-electric-water-taxi-ka-naya-ruta-42928 TrendKia — Har trend, sabse pehle.