# कॉलेज स्तर पर सैन्य मनोविज्ञान और मानचित्र अध्ययन सिखाने की मांग, गाजीपुर में बने मिलिट्री रिसर्च सेंटर

> गाजीपुर पीजी कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बद्रीनाथ सिंह ने रक्षा शिक्षा और सैन्य रणनीतियों में बुनियादी सुधार की वकालत की है। उन्होंने युवाओं को सेना में भेजने से पहले स्कूली स्तर पर ही तकनीकी और मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/ghazipur-ke-purva-prophesara-ki-salaha-koleja-stara-para-sikhai-jae-maipa-ridinga-aura-sainya-manovijnana-15372 · **Language:** Hindi
**Tags:** सैन्य शिक्षा, गाजीपुर, मैप रीडिंग, सैन्य मनोविज्ञान, भारतीय सेना भर्ती, राधेमोहन सिंह, रक्षा सुधार

बदलती सामरिक आवश्यकताओं को देखते हुए देश की रक्षा शिक्षा प्रणाली और युद्ध रणनीतियों में व्यापक सुधार की आवश्यकता रेखांकित की गई है। गाजीपुर पीजी कॉलेज में सैन्य विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बद्रीनाथ सिंह के अनुसार, आधुनिक युग में सैन्य अभियानों का तरीका तेजी से बदला है। इस स्थिति में केवल सीमा पर जाने के बाद प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्कूली और उच्च शिक्षा के स्तर पर ही भावी सैनिकों को मानसिक और व्यावहारिक रूप से सशक्त बनाया जाना जरूरी है।

## पाठ्यक्रम में मानचित्र अध्ययन और सैन्य मनोविज्ञान का समावेश
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ डॉ. बद्रीनाथ सिंह का सुझाव है कि NCC और प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सैन्य विद्या को शिक्षा प्रणाली में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही मानचित्र पढ़ने (मैप रीडिंग), दिशा कोण (बेयरिंग) और मापक्रम (स्केल) जैसे जटिल और आवश्यक विषयों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाना चाहिए। जब युवा इन बुनियादी तकनीकी पहलुओं को पहले से समझते होंगे, तो सेना में भर्ती होने पर उन्हें अग्रिम प्रशिक्षण में काफी आसानी होगी।

इसके साथ ही पाठ्यक्रम में सैन्य मनोविज्ञान को विशेष स्थान देने का आह्वान किया गया है। युद्ध या तनावपूर्ण स्थितियों में सैनिकों और उच्च अधिकारियों के मानसिक संतुलन और मानवीय भावनाओं को समझने के लिए यह विषय बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक दृढ़ता विकसित करने के लिए इस तरह की अकादमिक तैयारी को वे समय की मांग बताते हैं।

## भौगोलिक बनावट और रक्षा सेवाओं के चयन का संबंध
सशस्त्र बलों में युवाओं के रुझान को लेकर एक व्यावहारिक दृष्टिकोण सामने आया है। डॉ. सिंह का मानना है कि किसी क्षेत्र का भौगोलिक वातावरण वहां के युवाओं की रक्षा सेवा प्राथमिकताओं को काफी हद तक प्रभावित करता है। उनके अवलोकन के अनुसार, नदियों, जलाशयों और तटीय क्षेत्रों के निकट रहने वाले युवा आमतौर पर नौसेना में करियर बनाने को प्राथमिकता देते हैं।

दूसरी ओर, पर्वतीय और पहाड़ी इलाकों में पले-बढ़े युवाओं का झुकाव वायुसेना की तरफ अधिक देखा गया है। वहीं, विशाल मैदानी क्षेत्रों के युवा बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों का रुख करते हैं। इस भौगोलिक जुड़ाव को समझकर युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार सही मार्गदर्शन दिया जा सकता है, जिससे रक्षा बलों की भर्ती प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

## आधुनिक युद्ध का बदलता स्वरूप और अनुसंधान केंद्र की जरूरत
तकनीक और AI के प्रसार के कारण पारंपरिक जमीनी संघर्ष के तौर-तरीकों में भारी बदलाव आया है। डॉ. बद्रीनाथ सिंह ने कहा, "परमाणु युग में युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि कारखानों और तकनीक के मैदान में लड़े जाएंगे।" अब औद्योगिक इकाइयां, विनिर्माण कारखाने और डिजिटल बुनियादी ढांचे भी दुश्मनों के सीधे निशाने पर आ सकते हैं।

इस जटिल वातावरण में केवल आक्रामक रणनीति ही काफी नहीं है, बल्कि किसी भी आपातकालीन संकट के दौरान खुद को सुरक्षित रखते हुए टिके रहना सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। इस तरह की चुनौतियों से निपटने और नए युग की रणनीतियां तैयार करने के लिए देश में एक समर्पित मिलिट्री Research Center की स्थापना की आवश्यकता है।

## स्थानीय स्तर पर मार्गदर्शन और जन प्रतिनिधियों की भूमिका
गाजीपुर के पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह द्वारा किए गए प्रयासों को याद करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि युवाओं को देशभक्ति के लिए प्रेरित करने में स्थानीय नेतृत्व की अहम भूमिका होती है। वर्ष 2011 के आसपास पूर्व सांसद ने गाजीपुर के युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रोत्साहित करने और जिले के भीतर ही भर्ती रैलियों का आयोजन कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष कदम उठाए थे।

वर्तमान जनप्रतिनिधियों, जैसे सांसदों और विधायकों, को भी उसी तरह आगे आकर युवाओं के लिए अवसर तैयार करने चाहिए। यदि जिले के स्तर पर ही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और भर्ती सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, तो स्थानीय युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने का बेहतर अवसर मिलेगा और देश की सुरक्षा प्रणाली को भी इसका सीधा लाभ प्राप्त होगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** स्कूली और उच्च शिक्षा में सैन्य तकनीक एवं मनोविज्ञान शामिल होने से सेना में जाने के इच्छुक छात्रों को बेहतर तैयारी और दिशा मिलेगी।
- **गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में:** जिले में मिलिट्री रिसर्च सेंटर और स्थानीय स्तर पर भर्ती रैलियों के आयोजन की मांग से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉ. बद्रीनाथ सिंह ने सैन्य शिक्षा में किन बदलावों की सिफारिश की है?
उन्होंने स्कूली और कॉलेज स्तर पर सैन्य विज्ञान, मैप रीडिंग, बेयरिंग, स्केल और सैन्य मनोविज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया है।

### 2. भौगोलिक स्थिति का सशस्त्र बलों के चयन से क्या संबंध है?
नदियों व तटीय क्षेत्रों के युवा नौसेना, पहाड़ी इलाकों के युवा वायुसेना और मैदानी इलाकों के युवा मुख्य रूप से अर्धसैनिक बलों को चुनते हैं।

### 3. आधुनिक युद्ध के स्वरूप में क्या बदलाव आया है?
तकनीक और AI के दौर में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक कारखाने और तकनीकी बुनियादी ढांचा भी निशाने पर आ चुके हैं।

### 4. पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने गाजीपुर के युवाओं के लिए क्या किया था?
वर्ष 2011 के आसपास पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने गाजीपुर में सेना भर्ती रैलियां आयोजित कराने और स्थानीय युवाओं को प्रेरित करने के लिए प्रशासनिक पहल की थी।

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