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  "type": "article",
  "title": "गजनी के हमले के एक हजार साल बाद सोमनाथ और मोढेरा की अटूट जीवटता पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ताजा संबोधन में भारत की ऐतिहासिक जीवटता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे सोमनाथ और मोढेरा जैसे प्राचीन मंदिर भीषण आक्रमणों के बाद भी आज सीना ताने खड़े हैं, और मोढेरा अब देश के पहले पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित गांव के रूप में नई पहचान बना चुका है।",
  "content": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में देश को संबोधित किया। इस संबोधन के दौरान उन्होंने साल की शुरुआत में मनाए गए 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय इतिहास की उस अटूट जीवटता और संघर्ष क्षमता को याद किया जिसने सदियों के अत्याचार और क्रूर हमलों के बाद भी अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और राष्ट्रीय स्वाभिमान को हमेशा सहेज कर रखा है।\n\nसोमनाथ और देश के स्वाभिमान की ऐतिहासिक गाथा\nPM मोदी ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए देशवासियों को याद दिलाया कि आज से ठीक एक हजार साल पहले, यानी साल 1026 में, आक्रांता मोहम्मद गजनी ने भारत के गौरवशाली सोमनाथ मंदिर पर हमला कर उसे भारी नुकसान पहुँचाया था। उस समय विदेशी हमलावरों का मुख्य उद्देश्य भारत की आध्यात्मिक शक्ति, समृद्धि और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह से मिटाना था। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि सोमनाथ को नष्ट करने की मंशा रखने वाले हमलावरों का आज दुनिया में कोई वजूद तक नहीं बचा है। इसके विपरीत, सोमनाथ का भव्य मंदिर आज भी विशाल समुद्र के किनारे पूरी भव्यता, गरिमा और स्वाभिमान के साथ अडिग खड़ा है। यह पवित्र स्थल पूरे देश को अमरता और कभी न टूटने वाले हौसले का आशीर्वाद दे रहा है। इसी गौरवमयी इतिहास और जीवटता को सम्मान देने के लिए इस वर्ष सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य आयोजन किया गया था।\n\nमोढेरा सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक संघर्ष और संकल्प\nअपने संबोधन में PM मोदी ने इतिहास की एक और महत्वपूर्ण घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिस वर्ष सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया गया था, यानी 1026 में, ठीक उसी समय गुजरात के मोढेरा में स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर को भी आक्रमणकारियों के भीषण कोप का सामना करना पड़ा था। इस तरह मोढेरा सूर्य मंदिर के विध्वंस को भी अब पूरे 1,000 साल बीत चुके हैं। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर उस समय बिल्कुल नया था। इसका निर्माण आक्रमण से ठीक एक साल पहले, यानी साल 1025 में राजा भीमदेव प्रथम ने करवाया था। राजा भीमदेव प्रथम ने इस मंदिर को बेहद खूबसूरती और वास्तुकला की बारीकियों के साथ बनवाया था, लेकिन निर्माण के मात्र एक साल बाद ही इसे खंडित कर दिया गया।\n\nविपरीत परिस्थितियों में राजा भीमदेव प्रथम का साहस\nPM मोदी ने कहा कि सोमनाथ जैसे परम आस्था के बड़े केंद्रों का विध्वंस और देश के अन्य हिस्सों में लगातार हो रहे हमले किसी भी समाज या शासन का मनोबल पूरी तरह से तोड़ने के लिए काफी थे। ऐसे विकट समय में अक्सर शासक हार मान लेते हैं, लेकिन राजा भीमदेव प्रथम ने विपरीत परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय अप्रतिम साहस और वीरता का परिचय दिया। उन्होंने न केवल मोहम्मद गजनी की सेना का डटकर मुकाबला किया, बल्कि अत्यंत कम समय के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो चुके मोढेरा सूर्य मंदिर का पुनर्निर्माण भी सुनिश्चित कराया। इसी जीवटता का परिणाम था कि बार-बार तोड़े जाने के बाद भी सोमनाथ और मोढेरा जैसे मंदिर बार-बार अपने पैरों पर खड़े होते रहे।\n\nविरासत के संरक्षण से लेकर सौर ऊर्जा के सूर्य ग्राम तक का सफर\nऐतिहासिक रूप से मोढेरा मंदिर पर हमलों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। बाद के दौर में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने वास्तुकला के इस भव्य और उत्कृष्ट मंदिर को दोबारा भारी क्षति पहुँचाई। इसके बावजूद भारतीयों की आस्था को समाप्त नहीं किया जा सका। PM मोदी ने रेखांकित किया कि भारत के लोगों की सूर्य के प्रति आस्था सिर्फ पत्थरों के मंदिरों और वास्तुकला तक सीमित नहीं है। भारतीय संस्कृति में सूर्य उपासना का अर्थ प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा से जुड़ा है। इसी वैज्ञानिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण के कारण आज का मोढेरा केवल अपने प्राचीन सूर्य मंदिर के ऐतिहासिक अवशेषों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह देश के सामने आधुनिक प्रगति की नई मिसाल बन चुका है। मोढेरा आज भारत का पहला 'सूर्य ग्राम' यानी पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला सोलर विलेज बन चुका है।\n\nसांस्कृतिक उत्सव और पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील\nआधुनिक दौर में मोढेरा को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है जहाँ पर्यटकों के लिए कई बेहतरीन सुविधाओं की शुरुआत की गई है। हर साल जनवरी के महीने में, मकर संक्रांति के त्योहार के बाद, ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के प्रांगण में भव्य मोढेरा नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस सांस्कृतिक उत्सव में भारत के सर्वश्रेष्ठ शास्त्रीय और पारंपरिक नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। PM मोदी ने देशवासियों से भावुक अपील की कि वे इस ऐतिहासिक और आधुनिक गौरव के अद्भुत संगम को देखने के लिए मोढेरा की यात्रा अवश्य करें।\n\nइसका आप पर असर\nइस समाचार का आम पाठकों पर व्यावहारिक प्रभाव संस्कृति, पर्यटन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देखने को मिलता है।\n\n• सांस्कृतिक जुड़ाव: पाठक भारत के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन विरासतों के संघर्ष की गहरी समझ विकसित कर सकते हैं। इससे राष्ट्रीय धरोहरों के प्रति सम्मान और ऐतिहासिक गौरव की भावना मजबूत होती है।\n• पर्यटन के अवसर: देश के नागरिक गुजरात के ऐतिहासिक स्थलों जैसे सोमनाथ और मोढेरा की यात्रा की योजना बना सकते हैं। जनवरी में होने वाला प्रसिद्ध मोढेरा नृत्य महोत्सव सांस्कृतिक कलाओं को करीब से देखने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।\n• हरित ऊर्जा की प्रेरणा: मोढेरा के पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर निर्भर होने की सफलता से पाठक अपने घरों में भी सोलर पैनल लगाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इससे वे न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं बल्कि अपने बिजली बिल को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।\n• इतिहास से सीख: विपरीत परिस्थितियों में राजा भीमदेव प्रथम द्वारा दिखाए गए साहस से पाठक व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियों से लड़ना सीख सकते हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि बड़े से बड़े संकट के समय भी हौसला बनाए रखना और पुनर्निर्माण करना कितना महत्वपूर्ण है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह ऐतिहासिक घटना और आधुनिक बदलाव भारत के गौरवमयी इतिहास और सतत विकास की कहानी बयां करते हैं। इसके पीछे कई धार्मिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय कारण रहे हैं।\n\n• आक्रमणकारियों का उद्देश्य: मोहम्मद गजनी और बाद के दौर में अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रांताओं ने भारत के सांस्कृतिक आत्मसम्मान को चोट पहुँचाने के लिए सोमनाथ और मोढेरा जैसे बड़े आस्था केंद्रों को निशाना बनाया। उनका लक्ष्य भारत की धार्मिक और सामाजिक पहचान को पूरी तरह मिटाना था।\n• राजा भीमदेव प्रथम का संकल्प: सोमनाथ के पतन के बाद भी राजा भीमदेव प्रथम ने हौसला नहीं खोया और आक्रमणकारियों का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने तुरंत मोढेरा मंदिर का पुनर्निर्माण कराकर यह साबित किया कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक रीढ़ को तोड़ना आसान नहीं है।\n• आधुनिक हरित बदलाव: मोढेरा को देश का पहला पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित 'सूर्य ग्राम' बनाने का निर्णय सूर्य की वैज्ञानिक उपासना की प्राचीन परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लिया गया था। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण भारत के लिए स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा का एक सफल मॉडल प्रस्तुत करना था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के किस एपिसोड में सोमनाथ और मोढेरा का जिक्र किया?\nPM मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में इन ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख किया।\n\n2. सोमनाथ मंदिर को पहली बार कब और किसने नष्ट किया था?\nसोमनाथ मंदिर को आज से ठीक एक हजार साल पहले, साल 1026 में आक्रांता मोहम्मद गजनी ने पहली बार नष्ट किया था।\n\n3. मोढेरा का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर किसने और कब बनवाया था?\nगुजरात के मोढेरा में स्थित सूर्य मंदिर का निर्माण साल 1025 में राजा भीमदेव प्रथम ने करवाया था।\n\n4. अलाउद्दीन खिलजी ने किस ऐतिहासिक मंदिर को नुकसान पहुँचाया था?\nअलाउद्दीन खिलजी ने मोढेरा के भव्य सूर्य मंदिर पर हमला करके उसकी बेजोड़ वास्तुकला को भारी नुकसान पहुँचाया था।\n\n5. मोढेरा को किस आधुनिक उपलब्धि के लिए जाना जाता है?\nमोढेरा को भारत के पहले 'सूर्य ग्राम' (सोलर विलेज) के रूप में जाना जाता है, जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होता है।\n\n6. मोढेरा नृत्य महोत्सव का आयोजन कब किया जाता है?\nइस सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन हर साल जनवरी के महीने में मकर संक्रांति के त्योहार के बाद किया जाता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nयह कहानी हमें सिखाती है कि किस तरह इतिहास के कठिन थपेड़ों को सहकर भी नए सिरे से सृजन किया जा सकता है और प्राचीन गौरव को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जा सकता है।\n\n• संकट में त्वरित वापसी: राजा भीमदेव प्रथम ने विनाश के तुरंत बाद मोढेरा का पुनर्निर्माण कराया, जो हमें सिखाता है कि जीवन में आए किसी भी बड़े नुकसान के बाद बिना समय गंवाए पुनरुत्थान की तैयारी में जुट जाना चाहिए।\n• विरासत और आधुनिकता का संतुलन: मोढेरा का विकास दर्शाता है कि हम अपनी प्राचीन जड़ों और इतिहास का सम्मान करते हुए भी सौर ऊर्जा जैसी अत्याधुनिक तकनीक को अपनाकर प्रगति की राह पर चल सकते हैं।\n• अटूट सामूहिक हौसला: सदियों में कई बार तोड़े जाने के बाद भी सोमनाथ का फिर से भव्य रूप में उठ खड़ा होना साबित करता है कि अटूट सामूहिक संकल्प और सच्ची आस्था को कोई भी आक्रांता मिटा नहीं सकता।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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