# गमाडा वित्तीय हेरफेर मामला: ईडी ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के कार्यालय और 26 अन्य परिसरों की ली तलाशी

> प्रवर्तन निदेशालय ने ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में 26 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में पंजाब के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के दफ्तर और कई निजी इंफ्रास्ट्रक्चर फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/gmada-vittiya-heraphera-mamala-ed-ne-varishtha-ias-adhikari-ke-karyalaya-aura-26-anya-parisaron-ki-li-talashi-36432 · **Language:** Hindi
**Tags:** गमाडा, प्रवर्तन निदेशालय, विकास गर्ग, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स, मोहाली, धन शोधन

पंजाब के ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (गमाडा) के कामकाज और संपत्ति आवंटन में सामने आई कथित वित्तीय धांधली को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच टीमों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के साथ-साथ चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और लुधियाना में फैले कुल 26 परिसरों पर एक साथ व्यापक छानबीन शुरू की है। इस सघन अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राधिकरण के स्तर पर जमीन नीलामियों और बिल्डरों को दी गई अनुचित वित्तीय छूटों से जुड़े अहम आधिकारिक अभिलेख जुटाना है।

## शीर्ष प्रशासनिक कार्यालय और परामर्शदाता फर्म निशाने पर
जांच दल ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधान 16 का उपयोग करते हुए गमाडा के मुख्य कार्यालय के अतिरिक्त पंजाब सरकार के आवास और शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव विकास गर्ग (आईएएस) से संबंधित कार्यस्थलों पर भी विस्तृत पड़ताल की। जांचकर्ताओं का ध्यान विकास प्राधिकरण तथा निजी फर्मों के बीच हुए संदिग्ध समझौतों की फाइलें हासिल करने पर टिका है। इसके समानांतर, टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंसल्टेंसी एजेंसी के ठिकानों की भी जांच की गई है। यह कंपनी गमाडा की कई परियोजनाओं में तकनीकी और सलाहकार सेवाएं संभालती रही है और इस पूरे प्रकरण में मध्यस्थ की संदिग्ध भूमिका निभाने के दायरे में है।

## निजी बिल्डरों के नेटवर्क पर शिकंजा
यह पूरा कानूनी अभियान मुख्य रूप से मेसर्स तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके नियंत्रण वाले व्यापक व्यापारिक तंत्र के इर्द-गिर्द केंद्रित है। इस कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों के अतिरिक्त उनसे जुड़ी सहयोगी इकाइयों के ठिकानों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। इनमें रेमिगेट बिल्डस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, एमबी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड तथा मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और ईडी की अन्य कार्रवाइयों का सामना कर रही है, जिसमें नई दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित रेडिसन ब्लू होटल निर्माण से जुड़ा 290 करोड़ रुपये का बैंकिंग गबन का प्रकरण भी दर्ज है।

## सरकारी कोष को सौ करोड़ रुपये से अधिक की चपत
पीएमएलए के तहत चल रही विस्तृत जांच के अनुसार, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रवर्तकों ने रेमिगेट बिल्डस्टेट्स और एमबी इंफ्राबिल्ड जैसी अपनी सहायक कंपनियों के जरिए मोहाली के बेहद प्रमुख इलाकों में दो मुख्य वाणिज्यिक नीलामी स्थल हासिल किए थे। इसके उपरांत, प्राधिकरण को देय अनिवार्य किस्तों, बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) और उस पर लगने वाले भारी ब्याज में भारी रियायतें प्राप्त कर ली गईं। नियमों को ताक पर रखकर दिए गए इन वित्तीय फायदों के चलते राज्य के राजस्व को 100 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वित्तीय गड़बड़ियों और डेवलपरों के बकाये माफ करने की पूरी प्रक्रिया की तह तक जाने के लिए डिजिटल डाटा और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
सार्वजनिक विकास प्राधिकरणों में वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की सख्ती से रियल एस्टेट क्षेत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

- **भारत में:** सार्वजनिक संपत्तियों और वाणिज्यिक भूखंडों की नीलामियों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नियामक निगरानी और सख्त की जा रही है। इससे बड़े पैमाने पर बैंक ऋण और सरकारी बकाया हड़पने वाली शैल कंपनियों पर अंकुश लगेगा।
- **पंजाब और ट्राई-सिटी में:** गमाडा द्वारा आवंटित वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश करने वाले खरीदारों को परियोजनाओं की जांच और दस्तावेज सत्यापन में देरी का सामना करना पड़ सकता है। आम जनता को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी विवादित भूखंड में निवेश करने से पहले सभी वैधानिक मंजूरी और बकाया भुगतान की जांच करें।
- **आवास और विकास शुल्क:** बिल्डरों को दिए गए अनुचित ईडीसी और ब्याज छूट की समीक्षा से सरकारी खजाने के राजस्व की वसूली तेज हो सकती है। इससे शहरी विकास प्राधिकरणों के पारदर्शी कामकाज और जवाबदेही में सुधार देखने को मिलेगा।
- **निवेशक सतर्कता:** निजी डेवलपर्स के पिछले बैंकिंग रिकॉर्ड और कानूनी जांचों पर निवेशकों को बारीकी से नजर रखनी चाहिए। वित्तीय फ्रॉड में घिरी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स में खरीदारों के पैसे अटकने का जोखिम बढ़ जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह जांच गमाडा द्वारा प्रमुख भूखंडों के आवंटन में कथित नियमों के उल्लंघन और निजी कंपनियों को भारी वित्तीय छूट दिए जाने के कारण शुरू हुई। जांच एजेंसी सरकारी खजाने को हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान और अवैध लेनदेन के साक्ष्य तलाश रही है।

- **सीधे कारण:** मोहाली में दो प्रमुख वाणिज्यिक स्थलों की नीलामी के बाद संबंधित फर्मों को देय राशि, बाह्य विकास शुल्क और ब्याज में भारी रियायतें दी गईं। इन अनुचित लाभों से राज्य के खजाने को भारी वित्तीय घाटा हुआ।
- **कंपनियों का नेटवर्क:** जांच में पाया गया कि तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रवर्तकों ने कई अन्य संस्थाओं पर नियंत्रण रखकर बोली लगाई और बाद में बकाया भुगतान से छूट प्राप्त की। इस प्रक्रिया में बिचौलिए के तौर पर एक सलाहकार फर्म की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई।
- **पिछली कानूनी पृष्ठभूमि:** मुख्य प्रवर्तक कंपनी पहले से ही दिल्ली में रेडिसन ब्लू होटल परियोजना से जुड़े 290 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रही है। पुराने बैंकिंग घोटालों के तार इस नए भूमि सौदे से जुड़ने के कारण कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रवर्तन निदेशालय ने किन शहरों में छापेमारी की है?
ईडी ने दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और लुधियाना में कुल 26 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया है।

### 2. गमाडा से जुड़े इस मामले में किस आईएएस अधिकारी का कार्यालय जांच के दायरे में आया?
पंजाब के आवास और शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव विकास गर्ग (आईएएस) से संबंधित कार्यालय में तलाशी ली गई।

### 3. इस अनियमितता से सरकारी खजाने को कितना नुकसान होने का अनुमान है?
प्राधिकरण द्वारा बिल्डरों को दिए गए अनुचित लाभ और बकाया माफी के कारण सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान आंका गया है।

### 4. मुख्य आरोपी कंपनी का किस अन्य बड़े बैंक फ्रॉड से संबंध है?
तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के पश्चिम विहार में रेडिसन ब्लू होटल परियोजना से जुड़े 290 करोड़ रुपये के बैंक गबन मामले में भी आरोपी है।

### 5. इस मामले में किस कंसल्टेंसी फर्म की भूमिका की जांच की जा रही है?
टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की जांच की जा रही है, जिस पर इस प्रकरण में बिचौलिए की भूमिका निभाने का संदेह है।

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