गोंडा में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत स्ट्रॉबेरी उगाने पर मिलेगा 40 फीसदी अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया गोंडा में उद्यान विभाग एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत स्ट्रॉबेरी की खेती पर 40 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलने वाली इस सुविधा के लिए किसान सीएससी या उद्यान विभाग में आवेदन कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पारंपरिक कृषि पद्धतियों से इतर नकदी फसलों की ओर रुख करने वाले कृषकों के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। उद्यान विभाग की तरफ से संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत स्ट्रॉबेरी की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना का मुख्य ध्येय कम रकबे में भी कृषकों की आमदनी को बढ़ाना और बाजार में बढ़ती मांग का लाभ दिलाना है। इस वित्तीय सहायता का लाभ प्राप्त करने के लिए इच्छुक कृषकों को जल्द प्रक्रिया पूरी करनी होगी, क्योंकि आवंटन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जा रहा है। योजना का दायरा और वर्गवार निर्धारित लक्ष्य उद्यान विभाग ने इस योजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए क्षेत्र आधारित लक्ष्य निर्धारित किए हैं। विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य वर्ग के कृषकों के लिए कुल 4 हेक्टेयर भूमि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले कृषकों के लिए 1 हेक्टेयर का विशेष लक्ष्य तय किया गया है। सहायक उद्यान निरीक्षक गिरीश कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा तक आवेदन प्राप्त होते ही प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी। इसलिए, जो भी कृषक इस योजना में रुचि रखते हैं, उन्हें समय रहते अपना पंजीकरण और कागजी कार्रवाई पूर्ण कर लेनी चाहिए। आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की सरल प्रक्रिया योजना के अंतर्गत अनुदान का लाभ उठाने के लिए कृषकों के पास सभी जरूरी कागजात होने अनिवार्य हैं। आवेदकों को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रतिलिपि, जमीन की खतौनी, फार्मर रजिस्ट्री का प्रमाण पत्र और अन्य संबंधित अभिलेख जमा कराने होंगे। आवेदन की पूरी प्रक्रिया उद्यान विभाग के माध्यम से संपादित की जाएगी। कृषकों की सुविधा के लिए यह व्यवस्था भी की गई है कि वे अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र यानी सीएससी (CSC) पर जाकर भी ऑनलाइन आवेदन दर्ज करा सकते हैं। किसी भी संशय या विस्तृत जानकारी के लिए किसान सीधे अपने जिले के उद्यान विभाग कार्यालय में जाकर संपर्क साध सकते हैं। तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक खेती पर जोर स्ट्रॉबेरी जैसी संवेदनशील और उच्च मूल्य वाली बागवानी फसल में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा निरंतर तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। सहायक उद्यान निरीक्षक गिरीश कुमार मिश्रा ने बताया, "वैज्ञानिक तकनीक अपनाने से स्ट्रॉबेरी की फसल से बेहतर उत्पादन और बढ़िया मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।" विभाग समय-समय पर कृषकों को कीट नियंत्रण, सिंचाई, मृदा प्रबंधन और फसल सुरक्षा से जुड़े तकनीकी परामर्श प्रदान करेगा। इससे खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा। सीमित लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विभाग ने कृषकों से अविलंब आवेदन करने का आग्रह किया है। इसका आप पर असर • भारत में: एकीकृत बागवानी विकास मिशन के माध्यम से नकदी फसलों को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय और तकनीकी दक्षता में वृद्धि हो रही है। • गोंडा में: स्थानीय किसान 40 प्रतिशत तक की सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाकर कम जमीन में भी स्ट्रॉबेरी की लाभदायक व्यावसायिक खेती शुरू कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. गोंडा में स्ट्रॉबेरी की खेती पर कितना सरकारी अनुदान दिया जा रहा है? एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना के तहत किसानों को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। 2. इस योजना में विभिन्न वर्गों के किसानों के लिए क्या लक्ष्य तय किया गया है? योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग के किसानों के लिए 4 हेक्टेयर और अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 1 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। 3. स्ट्रॉबेरी खेती सब्सिडी के लिए आवेदन करने हेतु कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं? किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, खतौनी, फार्मर रजिस्ट्री का प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। 4. किसान इस अनुदान योजना के लिए कहां आवेदन कर सकते हैं? किसान अपने जिले के उद्यान विभाग कार्यालय या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। 5. योजना में लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया जाएगा? लाभार्थियों का चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर किया जाएगा, इसलिए निर्धारित लक्ष्य पूरा होने से पहले आवेदन करना आवश्यक है। https://trendkia.com/national/gonda-men-ekikrita-bagavani-vikasa-mishana-ke-tahata-stroberi-ugane-para-milega-40-phisadi-anudana-janen-avedana-prakriya-14720 TrendKia — Har trend, sabse pehle.