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  "title": "गुजरात के बंदरगाहों और सीमा पार से पंजाब में आ रहा नशा, मजीठिया और भोला का हो आमना-सामना: कुलदीप सिंह धालीवाल",
  "summary": "आम आदमी पार्टी के नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने बिक्रम मजीठिया और जगदीश भोला से आमने-सामने पूछताछ कराने की मांग उठाई है। साथ ही उन्होंने गुजरात बंदरगाहों से मादक पदार्थों की आवक और सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र पर सवाल खड़े किए हैं।",
  "content": "पंजाब में मादक पदार्थों के फैलाव और तस्करी की रोकथाम को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। आम आदमी पार्टी पंजाब के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी पर कड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस बुराई को जड़ से उखाड़ने के लिए बड़े पैमाने पर मुहिम शुरू की है, जिसके तहत अब तक हजारों तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।\n\nमजीठिया और जगदीश भोला के बीच आमने-सामने पूछताछ की मांग\nविशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को तलब किए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कुलदीप सिंह धालीवाल का कहना है कि पूरे प्रकरण की असलियत सार्वजनिक करने के लिए जरूरी है कि बिक्रम मजीठिया और जगदीश भोला को एक साथ बैठाकर पूछताछ की जाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2007 से लेकर 2017 के दौरान जब राज्य में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन शासन था, उसी दौर में नशीले पदार्थों का व्यापक नेटवर्क तैयार हुआ था। उनका आरोप है कि इस पूरे तंत्र को खड़ा करने में मजीठिया और उनके सहयोगियों की अहम भूमिका रही थी, और अब इस गैरकानूनी धंधे में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।\n\nविपक्षी दलों के आरोपों और बदले की भावना पर प्रतिक्रिया\nविपक्षी खेमे द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों का खंडन करते हुए धालीवाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बदला लेना नहीं, बल्कि राज्य को नशामुक्त बनाना है। अगर झूठे मुकदमे दर्ज करने की मंशा होती तो यह कदम काफी पहले उठाया जा सकता था, जबकि मौजूदा जांच पूरी निष्पक्षता और नियमों के तहत आगे बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में किसी के रसूख का ख्याल नहीं रखा जाएगा, चाहे वह कोई बड़ा राजनेता हो या फिर बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह जैसा उच्च अधिकारी। जिन्होंने भी युवाओं के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है, उन्हें कानून के कटघरे में सजा जरूर मिलेगी।\n\nगुजरात के बंदरगाहों और केंद्रीय गृह मंत्री पर सवाल\nकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब प्रवास को लेकर भी आप प्रवक्ता ने तीखे सवाल दागे। धालीवाल ने कहा कि भाजपा को इस विषय पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्य गुजरात में स्थित बंदरगाहों, जैसे अडानी पोर्ट, के जरिए टनों के हिसाब से मादक पदार्थ देश में पहुंच रहे हैं। वहां से यह खेप राजस्थान के रास्तों से होकर पंजाब की सीमा में पहुंचाई जाती है। धालीवाल के अनुसार, पंजाब की धरती पर राजनीति करने से पहले केंद्रीय नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पश्चिमी तटों पर भारी तादाद में आ रहे नशीले पदार्थों पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है।\n\nअंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा और एंटी-ड्रोन तकनीक का मुद्दा\nधालीवाल ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई। पंजाब की 532 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से सटी हुई है, जिसमें से लगभग 50 किलोमीटर का दायरा केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरहद पार से लगातार ड्रोन के जरिए हथियार और मादक पदार्थों की खेप गिराई जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि सीमा पर आधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणाली स्थापित की जाए और सीमा को पूरी तरह सील किया जाए, लेकिन केंद्र अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से पीछे हट रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयह राजनीतिक टकराव पंजाब में मादक पदार्थों की रोकथाम, सीमा सुरक्षा और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर नीतिगत रुख को सीधे प्रभावित करता है।\n\n• पंजाब में: इस मामले में एसआईटी की तेज जांच से कई बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसने के आसार हैं। राज्य के नागरिकों और परिवारों के लिए नशा उन्मूलन अभियान में पुलिस की सख्ती और तस्करों की धरपकड़ का सीधा असर जमीनी कानून-व्यवस्था पर दिखेगा।\n• भारत में: बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर निगरानी की मांग तेज होने से अंतर-राज्यीय सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय जांच नीतियों पर ध्यान बढ़ेगा। राष्ट्रीय स्तर पर सीमावर्ती राज्यों में नशीले पदार्थों के पारगमन मार्गों पर सख्त निगरानी लागू हो सकती है।\n• सीमावर्ती इलाकों में: 532 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन तकनीक और अतिरिक्त निगरानी की मांग से सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा पुख्ता करने पर जोर रहेगा। ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय से सीमा पार से आने वाले ड्रोनों की गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है।\n• प्रशासनिक जवाबदेही: बर्खास्त पुलिस अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई के संकेतों से सरकारी महकमों में मिलीभगत के मामलों पर कड़ा संदेश जाएगा। इससे जांच एजेंसियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर दबाव बढ़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपंजाब में मादक पदार्थों की तस्करी, विपक्षी दलों की बयानबाजी और सीमा पार सुरक्षा को लेकर उपजे विवाद के पीछे पुरानी जांचें और राजनीतिक समीकरण प्रमुख कारण हैं।\n\n• एसआईटी जांच का नया दौर: विशेष जांच दल द्वारा बिक्रम सिंह मजीठिया को तलब किए जाने के बाद इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जगदीश भोला और मजीठिया से जुड़े पुराने आरोपों को लेकर दोबारा आमने-सामने पूछताछ की मांग उठाई जा रही है।\n• पारगमन मार्गों को लेकर विवाद: राज्य में मादक पदार्थों की खेप पहुंचने के रास्तों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच तनातनी बनी हुई है। आप नेताओं का आरोप है कि गुजरात के बंदरगाहों और राजस्थान के रास्तों से होकर नशीले पदार्थ पंजाब तक पहुंचाए जाते हैं।\n• सीमा सुरक्षा और ड्रोन इनकर्सन्स: पाकिस्तान से सटी 532 किलोमीटर लंबी सीमा पर ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की आवक लगातार सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई है। राज्य सरकार का कहना है कि 50 किलोमीटर के बीएसएफ अधिकार क्षेत्र में पर्याप्त तकनीकी बंदोबस्त की कमी के चलते यह समस्या बनी हुई है।\n• पिछली सरकारों का कार्यकाल: वर्ष 2007 से 2017 के दौरान अकाली-भाजपा गठबंधन शासनकाल में फैले नेटवर्क को मौजूदा सरकार मुख्य जड़ बताती है। दूसरी ओर, विपक्षी दल इन कदमों को बदले की राजनीति करार दे रहे हैं, जिससे यह टकराव लगातार गहरा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कुलदीप सिंह धालीवाल ने किन दो लोगों से आमने-सामने पूछताछ की मांग की है?\nउन्होंने बिक्रम सिंह मजीठिया और जगदीश भोला को एक साथ बैठाकर पूछताछ करने की मांग की है।\n\n2. धालीवाल ने गुजरात के किस बंदरगाह का उल्लेख किया है?\nउन्होंने भाजपा शासित गुजरात में स्थित अडानी पोर्ट जैसे बंदरगाहों से मादक पदार्थ आने का आरोप लगाया है।\n\n3. पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा कितनी लंबी है और कितना क्षेत्र बीएसएफ के तहत आता है?\nपंजाब की सीमा पाकिस्तान के साथ 532 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से लगभग 50 किलोमीटर का क्षेत्र बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में आता है।\n\n4. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से किस उपकरण को लगाने की मांग की थी?\nमुख्यमंत्री ने सीमा पार से होने वाली तस्करी और हथियारों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने और सीमा सील करने की मांग की थी।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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