गुजरात के नवसारी में बेसहारा गोवंश को रेडियम बेल्ट पहनाकर हादसों से बचाने की अनूठी मुहिम नवसारी के गणदेवी तालुका में रात और बारिश के समय होने वाले हादसों को रोकने के लिए युवाओं ने 500 आवारा मवेशियों को रेडियम रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाई है, जबकि 2000 गायों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों पर अचानक सामने आने वाले बेसहारा मवेशियों के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए गुजरात के नवसारी जिले में एक नई सामाजिक पहल शुरू की गई है। गणदेवी तालुका और बिलीमोरा क्षेत्र में सड़क पर बैठे जानवरों की वजह से आए दिन राहगीरों और मवेशियों दोनों की जान पर बन आती थी। बारिश के मौसम और रात के अंधेरे में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले लेती है। इसी खतरे को देखते हुए स्थानीय युवाओं ने मवेशियों के गले में खास तरह की चमकदार पट्टी बांधने का काम हाथ में लिया है। गणदेवी और बिलीमोरा में हादसों की रोकथाम का प्रयास सड़क पर लावारिस घूमने वाले जानवरों और कुत्तों से जुड़े हादसे पहले भी कई जिलों में चिंता का बड़ा विषय बन चुके हैं, जिसके चलते यह मामला उच्च न्यायालय तक भी पहुंचा था। खासकर गणदेवी और बिलीमोरा के रास्तों पर बारिश के दिनों में मवेशी सड़कों के ऊंचे हिस्सों या ढेरों पर बैठ जाते हैं। दृश्यता कम होने की वजह से तेज रफ्तार वाहन इनसे टकरा जाते हैं, जिसमें न केवल मवेशी गंभीर रूप से घायल होते हैं बल्कि वाहन सवार इंसानों की भी जान चली जाती है। इंसानी और पशु जीवन दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मानवीय अभियान की रूपरेखा तैयार की गई। रेडियम बेल्ट से बढ़ेगी रात की दृश्यता इस सुरक्षा योजना के तहत मवेशियों के गले में रेडियम से तैयार विशेष रिफ्लेक्टिव बेल्ट बांधी जा रही है। रात के समय या भारी बारिश के दौरान जब वाहनों की हेडलाइट्स इन बेल्ट पर पड़ती हैं, तो वे दूर से ही चमक उठती हैं। इससे चालकों को पहले ही पता चल जाता है कि आगे सड़क पर जानवर मौजूद हैं। समय रहते ब्रेक लगाने या गति नियंत्रित करने से भीषण टक्कर टल जाती है। रात के समय सड़कों पर जानवरों के चपेट में आने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, इसलिए यह परावर्तक तकनीक दोनों पक्षों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। 500 मवेशियों को बांधी गई बेल्ट, 2000 का लक्ष्य इस पूरे अभियान में साईं लाल कुमावत, बजरंग दल के कार्यकर्ता और 50 से अधिक गौ प्रेमी युवा सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। रात के अंधेरे और व्यस्त सड़कों पर अपनी सुरक्षा को दांव पर लगाते हुए इन स्वयंसेवकों ने अब तक 500 आवारा मवेशियों के गले में यह रेडीमेड बेल्ट सुरक्षित तरीके से पहना दी है। इस समूह ने आगे बढ़ते हुए कुल 2000 गायों और मवेशियों को इस सुरक्षा दायरे में लाने का संकल्प लिया है, ताकि पूरे इलाके में सड़क हादसों के ग्राफ को पूरी तरह से नीचे लाया जा सके। इसका आप पर असर सड़कों पर चलने वाले चालकों और मवेशियों दोनों को गंभीर टक्कर और जानलेवा हादसों से सुरक्षित रखने में यह पहल सीधी मदद करेगी। • भारत में: रात के समय हाईवे और मुख्य सड़कों पर वाहन चालकों को मवेशी दूर से दिखाई देने पर अचानक ब्रेक लगाने या असंतुलित होने का जोखिम कम होता है। इससे सड़क सुरक्षा बढ़ती है और अनमोल इंसानी तथा मूक पशुओं की जान बचती है। • नवसारी और गणदेवी में: गणदेवी और बिलीमोरा के रास्तों पर रात और बारिश के दौरान यात्रा करने वाले स्थानीय वाहन चालकों को बेहतर दृश्यता मिलेगी। 2000 मवेशियों को कवर करने से इस इलाके में आवारा पशुओं से टकराने वाली दुर्घटनाओं में भारी गिरावट आ सकती है। ऐसा क्यों हुआ सड़क पर बेसहारा मवेशियों के बैठने और रात में दृश्यता कम होने से होने वाली लगातार घातक दुर्घटनाओं की वजह से यह अभियान शुरू किया गया। • कम दृश्यता और बारिश का मौसम: मानसून के दिनों में मवेशी सूखे स्थानों की तलाश में सड़क के ढेरों पर बैठ जाते हैं, जहां अंधेरे में वाहन चालकों को वे दिखाई नहीं देते। अचानक सामने आने पर तेज रफ्तार वाहनों का नियंत्रण खो जाना हादसों की मुख्य वजह बनता है। • पूर्व में हुई जनहानि और अदालती संज्ञान: कई जिलों में आवारा पशुओं की वजह से लोगों की जान जाने के मामले उच्च न्यायालय तक पहुंचे थे, जिससे समस्या की गंभीरता उजागर हुई। इसी को देखते हुए स्थानीय स्तर पर दुर्घटनाओं को टालने के लिए युवाओं ने सुरक्षात्मक कदम उठाया। • सक्रिय जमीनी पहल: केवल प्रशासन पर निर्भर रहने के बजाय 50 से अधिक युवाओं ने जोखिम उठाकर स्वयं 500 मवेशियों को रेडियम बेल्ट बांधी और इसे 2000 तक पहुंचाने का निर्णय लिया। सवाल-जवाब 1. नवसारी में आवारा मवेशियों के लिए क्या अभियान शुरू किया गया है? गणदेवी और बिलीमोरा क्षेत्र में सड़क हादसों को रोकने के लिए लावारिस मवेशियों के गले में रेडियम रिफ्लेक्टिव बेल्ट बांधी जा रही है। 2. रेडियम बेल्ट लगाने से सड़क हादसे कैसे रुकेंगे? रात के समय वाहनों की लाइट पड़ते ही यह बेल्ट चमक उठती है, जिससे चालकों को दूर से ही मवेशी दिखाई दे जाते हैं और टक्कर टल जाती है। 3. अब तक कितने मवेशियों को यह बेल्ट बांधी जा चुकी है? साईं लाल कुमावत, बजरंग दल और स्थानीय युवाओं के सहयोग से अब तक 500 मवेशियों को बेल्ट बांधी जा चुकी है। 4. इस अभियान का कुल लक्ष्य कितना रखा गया है? युवाओं ने कुल 2000 गायों और मवेशियों को यह रिफ्लेक्टिव बेल्ट पहनाने का संकल्प लिया है। प्रेरणा और सबक स्थानीय युवाओं की यह पहल दर्शाती है कि सीमित संसाधनों और सूझबूझ से समाज की बड़ी समस्याओं का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। • सहानुभूति और संवेदनशीलता: इंसान के साथ-साथ बेजुबान जानवरों के जीवन को भी समान महत्व देकर युवाओं ने सुरक्षा की मिसाल पेश की। • व्यावहारिक सोच: महंगी व्यवस्थाओं के बजाय रेडियम बेल्ट जैसी सरल और किफायती तकनीक का उपयोग कर एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया गया। • सामूहिक भागीदारी: 50 से अधिक स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर रात के समय जोखिम उठाकर 500 जानवरों को सुरक्षित किया और 2000 का बड़ा लक्ष्य तय किया। https://trendkia.com/national/gujarat-ke-navsari-men-besahara-govnsha-ko-rediyama-belta-pahanakara-hadason-se-bachane-ki-anuthi-muhima-37782 TrendKia — Har trend, sabse pehle.