गुरुग्राम में 450 करोड़ रुपये के जमीन सौदे पर दिल्ली की अदालत ने एम3एम इंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी की कानूनी कार्यवाही रखी जारी दिल्ली की एक अदालत ने गुरुग्राम के चौमा गांव में 31 एकड़ जमीन के सौदे से जुड़े मामले में एम3एम इंडिया और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश की कार्यवाही बरकरार रखी है। कंपनी ने इसे एक कारोबारी विवाद बताते हुए कहा है कि धारा 406 का आरोप खारिज हो चुका है। गुरुग्राम के चौमा गांव में लगभग 31 एकड़ जमीन के सौदे को लेकर रियल एस्टेट कंपनी एम3एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। दिल्ली की एक अदालत ने निचली अदालत द्वारा कथित अपराधों पर संज्ञान लिए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी कार्यवाही को बरकरार रखा है। इस पूरे मामले में कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 450 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। सत्र अदालत का फैसला और कानूनी कार्यवाही प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने एम3एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। आरोपियों ने निचली अदालत के उस पूर्व आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनके खिलाफ दर्ज मामले का संज्ञान लिया गया था। सत्र अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 34 (साझा इरादा) के तहत कार्यवाही जारी रहेगी। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की सुनवाई में तेजी लाए, ताकि कानूनी प्रक्रिया बिना किसी अनावश्यक विलंब के आगे बढ़ सके। सभी संबंधित आरोपियों को 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। 31 एकड़ जमीन और 450 करोड़ रुपये का विवाद इस कानूनी विवाद की शुरुआत एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच जमीन की अदला-बदली को लेकर एक औपचारिक समझौता हुआ था। आरोप के अनुसार समझौते के तहत तय की गई पूरी धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, लेकिन इसके बावजूद एम3एम इंडिया और समूह की अन्य संबंधित कंपनियों ने गुरुग्राम के चौमा गांव स्थित लगभग 31 एकड़ भूखंड पर अपना कानूनी अधिकार हासिल कर लिया। शिकायत में यह भी रेखांकित किया गया है कि इस पूरे सौदे में कथित तौर पर लगभग 450 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। एम3एम इंडिया प्रबंधन का पक्ष और स्पष्टीकरण अदालती आदेश के संदर्भ में एम3एम इंडिया के निदेशक यतीश वाहल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना पक्ष रखा है। यतीश वाहल का कहना है कि 17 अक्टूबर 2026 को तीस हजारी कोर्ट द्वारा पारित आदेश को मीडिया में एक झटके के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वस्तुस्थिति इससे पूरी तरह भिन्न है। उन्होंने कहा कि अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत लगाए गए आपराधिक विश्वासघात के आरोप को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने विश्लेषण में पाया कि यदि प्राथमिकी में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तब भी धारा 406 के तहत अपराध का मामला नहीं बनता है। यतीश वाहल ने आगे विस्तार से बताया कि शेष अन्य आरोपों के संबंध में अदालत ने कंपनी के विरुद्ध कोई अंतिम निष्कर्ष या प्रतिकूल टिप्पणी नहीं दी है। इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय संबंधित मजिस्ट्रेट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत ही करेंगे। वर्तमान स्थिति में न तो औपचारिक आरोप तय किए गए हैं और न ही किसी पूर्ण मुकदमे की शुरुआत का आदेश दिया गया है। उन्होंने दोहराया कि यह अनिवार्य रूप से दो कारोबारी समूहों के बीच का एक व्यावसायिक विवाद है, जो पहले से ही सक्षम कानूनी मंचों पर विचाराधीन है। एम3एम समूह को देश की न्यायिक प्रणाली पर पूर्ण विश्वास है और कंपनी कानून के तहत उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का उपयोग करेगी। इसका आप पर असर इस अदालती कार्यवाही से बड़े रियल एस्टेट सौदों में पारदर्शिता और कॉर्पोरेट जवाबदेही पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: देश भर में रियल एस्टेट कंपनियों के आपसी जमीन सौदों और वाणिज्यिक समझौतों में कानूनी जांच कड़ी हो सकती है। इसके चलते बड़े भूमि अधिग्रहणों में भुगतान की शर्तों और मालिकाना हक के हस्तांतरण पर अदालतों का रुख सख्त रहने की संभावना है। • गुरुग्राम में: गुरुग्राम के चौमा गांव में 31 एकड़ जमीन से जुड़े इस विवाद के चलते उस क्षेत्र में रियल एस्टेट गतिविधियों पर कानूनी निगरानी बढ़ेगी। स्थानीय संपत्ति खरीदारों और निवेशकों को विवादित जमीनों से जुड़े प्रोजेक्ट्स के वैधानिक स्टेटस की बारीकी से जांच करनी होगी। • रियल एस्टेट खरीदारों के लिए: बड़े बिल्डरों के बीच चलने वाले कानूनी विवादों से संबंधित प्रोजेक्ट्स की स्थिति पर असर पड़ सकता है। घर खरीदारों को किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले जमीन के स्वामित्व और समझौतों की कानूनी स्थिति जरूर परखनी चाहिए। • अदालती समयसीमा: मामले के सभी संबंधित आरोपियों को 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना है। इस तारीख के बाद ही निचली अदालत में मामले की सुनवाई की रफ्तार और अगली कानूनी प्रक्रिया तय होगी। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद दो बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों के बीच जमीन की अदला-बदली के समझौते और उसके तय भुगतान में विफलता के आरोपों से उपजा है। • सीधा कारण: एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड ने आरोप लगाया कि एक समझौते के तहत तय पूरी रकम का भुगतान किए बिना एम3एम इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों ने गुरुग्राम के चौमा गांव की 31 एकड़ जमीन पर कब्जा हासिल कर लिया। इसी कथित 450 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान के आधार पर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। • सत्र अदालत का हस्तक्षेप: निचली अदालत द्वारा मामले में संज्ञान लेने के फैसले को एम3एम इंडिया ने दिल्ली सत्र अदालत में चुनौती दी थी, जहां अदालत ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि इन आरोपों की जांच और सुनवाई आगे जारी रहनी चाहिए। • धारा 406 का खारिज होना: सत्र अदालत ने पाया कि एफआईआर के तथ्यों के आधार पर आपराधिक विश्वासघात (आईपीसी 406) का अपराध नहीं बनता, इसलिए उस धारा के तहत आरोप को रद्द कर दिया गया। अन्य आरोपों पर अंतिम फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मजिस्ट्रेट करेंगे। • आगामी न्यायिक कदम: अदालत ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है और आरोपियों को 27 अक्टूबर को उपस्थित होने को कहा है। अब मजिस्ट्रेट के समक्ष तय होगा कि मामले में औपचारिक आरोप कब तय किए जाएंगे। सवाल-जवाब 1. दिल्ली की अदालत ने एम3एम इंडिया के खिलाफ क्या आदेश दिया है? अदालत ने एम3एम इंडिया और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420), आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) और साझा इरादे (धारा 34) के तहत कानूनी कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया है। 2. यह जमीन विवाद किस इलाके से जुड़ा है और इसमें कितनी जमीन शामिल है? यह विवाद गुरुग्राम के चौमा गांव में स्थित लगभग 31 एकड़ जमीन के सौदे से जुड़ा हुआ है। 3. मामले में कथित धोखाधड़ी की कुल रकम कितनी बताई गई है? शिकायत के अनुसार इस मामले में कथित धोखाधड़ी की कुल राशि करीब 450 करोड़ रुपये बताई गई है। 4. शिकायतकर्ता कंपनी कौन है और उसका मुख्य आरोप क्या है? शिकायतकर्ता कंपनी एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड है, जिसका आरोप है कि समझौते के तहत पूरी रकम का भुगतान किए बिना एम3एम ने जमीन पर अधिकार कर लिया। 5. अदालत ने किस धारा के तहत लगे आरोप को खारिज कर दिया है? अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्राथमिकी के तथ्यों से यह अपराध नहीं बनता। 6. मामले में आरोपियों को अदालत में कब पेश होना है? सत्र अदालत के निर्देशानुसार आरोपियों को 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होना है। 7. एम3एम इंडिया के निदेशक यतीश वाहल का इस आदेश पर क्या कहना है? यतीश वाहल ने कहा कि यह एक विशुद्ध व्यावसायिक विवाद है जिसमें कोई आरोप तय नहीं हुए हैं और धारा 406 का आरोप खारिज हो चुका है। https://trendkia.com/national/gurugrama-men-450-karora-rupaye-ke-jamina-saude-para-delhi-ki-adalata-ne-m3m-india-ke-khilapha-dhokhadhari-ki-kanuni-karyavahi-rak-51941 TrendKia — Har trend, sabse pehle.