# गुवाहाटी में DITEC निदेशक अश्वनी कुमार को महिला सहकर्मियों ने बांधी राखी, सुरक्षित कार्यस्थल और भरोसे का दिया संदेश

> गुवाहाटी स्थित DITEC कार्यालय में 11 महिला सहकर्मियों ने निदेशक अश्वनी कुमार (IAS) को राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाया। इस अवसर पर सुरक्षा का मतलब पाबंदी न मानकर भरोसे और समान अवसर वाले कार्यस्थल के निर्माण पर जोर दिया गया।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/guwahati-men-ditec-nideshaka-ashwani-kumar-ko-mahila-sahakarmiyon-ne-bandhi-rakhi-surakshita-karyasthala-aura-bharose-ka-diya-snde-23825 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम, गुवाहाटी, डीआईटीईसी, अश्वनी कुमार, रक्षाबंधन, कार्यस्थल सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी

असम सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार निदेशालय (DITEC) द्वारा गुवाहाटी में रक्षाबंधन पर्व को एक अनोखे और प्रेरणादायी दृष्टिकोण के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर पारंपरिक भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की अवधारणा को और विस्तार देते हुए कार्यस्थल पर आपसी भरोसे, सम्मान, गरिमा और समान अवसरों के महत्व को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की विभिन्न शाखाओं और सहयोगी परियोजनाओं से जुड़ी 11 महिला सहकर्मियों ने निदेशालय के निदेशक अश्वनी कुमार (IAS) को राखी बांधी। इस सांकेतिक पहल के माध्यम से सरकारी तंत्र और कॉरपोरेट संस्कृतियों के भीतर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त माहौल तैयार करने का एक मजबूत संदेश प्रसारित किया गया।

## सुरक्षा का वास्तविक अर्थ पाबंदी नहीं बल्कि क्षमता विकास के अवसर देना है
कार्यक्रम के मुख्य संबोधन में DITEC के निदेशक अश्वनी कुमार ने रक्षाबंधन के पारंपरिक स्वरूप पर बात करते हुए कहा कि रक्षा का धागा केवल बाहरी खतरों से सुरक्षा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह परस्पर अटूट विश्वास का भी सूचक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का भरोसा केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हर कामकाजी माहौल का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए। आज के आधुनिक दौर में महिलाएं केवल सहायक भूमिकाओं में नहीं हैं, बल्कि वे अग्रणी पेशेवरों, कुशल प्रशासकों, नवोन्मेषकों और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने वाली भूमिकाओं को सफलतापूर्वक संभाल रही हैं। ऐसे परिदृश्य में, उन्हें बिना किसी डर या संकोच के पूर्ण आत्मविश्वास के साथ कार्य करने का वातावरण प्रदान करना किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संपूर्ण संस्थागत व्यवस्था का सामूहिक उत्तरदायित्व है।

निदेशक अश्वनी कुमार ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सुरक्षा के नाम पर किसी के अवसरों, स्वतंत्रता या कार्यक्षमता पर पाबंदियां लगाना पूरी तरह से गलत दृष्टिकोण है। उनका मानना है कि कार्यस्थल को वास्तव में समावेशी और प्रगतिशील बनाने के लिए हर कर्मचारी की व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी संस्थान में सुरक्षा और गरिमा की संस्कृति केवल प्रशासनिक आदेशों, नियमों या कानूनों के माध्यम से लागू नहीं की जा सकती। जब तक संस्थान का प्रत्येक सदस्य अपने दैनिक व्यवहार, आपसी संवाद और दृष्टिकोण में इन नैतिक मूल्यों को स्वेच्छा से स्वीकार नहीं करता, तब तक एक स्थायी और सकारात्मक माहौल का निर्माण संभव नहीं है। रक्षाबंधन जैसे सांस्कृतिक पर्व संस्थागत स्तर पर आपसी तालमेल, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को पुनर्जीवित करने का बेहतर अवसर प्रदान करते हैं।

## संस्थान की विभिन्न इकाइयों का साझा प्रयास और समावेशी संस्कृति
गुवाहाटी में आयोजित इस गरिमामय समारोह में केवल DITEC के मुख्य कार्यालय के कर्मचारी ही शामिल नहीं थे, बल्कि इससे जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक इकाइयों की महिला सहकर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें AITEC एवं CSD सोसाइटी, ePrastuti, eOffice और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) से जुड़ी महिला अधिकारी और कर्मचारी शामिल थीं। 11 महिला कर्मचारियों द्वारा निदेशक को राखी बांधने का यह कदम केवल एक रस्म भर नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रतीक था कि तकनीकी और प्रशासनिक विभागों में परस्पर सहयोग और सुरक्षा की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

कार्यक्रम के अंत में इस बात पर बल दिया गया कि किसी भी प्रगतिशील और आधुनिक संस्था के लिए भयमुक्त और भेदभाव रहित वातावरण का होना बेहद अनिवार्य है। कार्यस्थल पर सुरक्षा को केवल औपचारिक नियमों की कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखकर इसे दैनिक कार्यसंस्कृति में ढालना होगा। सहकर्मियों के बीच संवेदनशीलता, सम्मानजनक आचरण और हर स्तर पर समान अवसर सुनिश्चित करके ही किसी भी संगठन की कार्यकुशलता और उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। रक्षाबंधन का यह संदेश न केवल असम के प्रशासनिक गलियारों में, बल्कि समाज के हर कार्यक्षेत्र के लिए एक अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत करता है।

## इसका आप पर असर
DITEC गुवाहाटी में आयोजित इस रक्षाबंधन कार्यक्रम का मुख्य संदेश कार्यस्थल की सुरक्षा और महिलाओं के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देना है।

- **भारत में:** सरकारी और निजी संस्थानों में महिलाओं के लिए सुरक्षित, भयमुक्त और सम्मानजनक कार्यसंस्कृति बनाने की प्रेरणा मिलती है। इससे कामकाजी महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- **गुवाहाटी (असम) में:** राज्य सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभागों जैसे DITEC, NIC, eOffice आदि में महिला कर्मचारियों को अधिक सुरक्षित और प्रोत्साहन भरा माहौल मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक विभागों की कार्यकुशलता मजबूत होगी।

## सवाल-जवाब

### 1. गुवाहाटी में DITEC द्वारा रक्षाबंधन पर क्या विशेष पहल की गई?
DITEC कार्यालय में 11 महिला सहकर्मियों ने निदेशक अश्वनी कुमार (IAS) को राखी बांधी और कार्यस्थल पर भरोसे, सम्मान तथा सुरक्षित माहौल का संदेश दिया।

### 2. DITEC निदेशक अश्वनी कुमार ने सुरक्षा के संबंध में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सुरक्षा का मतलब पाबंदी नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए जिसमें हर व्यक्ति अपनी क्षमता का पूरा विकास कर सके।

### 3. इस आयोजन में किन-किन विभागों की महिला कर्मचारियों ने भाग लिया?
इसमें DITEC, AITEC एवं CSD सोसाइटी, ePrastuti, eOffice और NIC से जुड़ी महिला सहकर्मी शामिल हुईं।

### 4. सुरक्षित कार्यस्थल बनाने के लिए निदेशक ने किस बात को जरूरी बताया?
उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण केवल नियमों से नहीं बनता, बल्कि जब हर व्यक्ति रोजमर्रा के व्यवहार में सम्मान और गरिमा को स्वेच्छा से अपनाता है, तभी यह टिकाऊ बनता है।

## प्रेरणा और सबक
यह पहल दर्शाती है कि पारंपरिक त्योहारों का उपयोग आधुनिक संस्थागत मूल्यों और सामाजिक बदलाव को दिशा देने के लिए कैसे किया जा सकता है।

- **सुरक्षा का व्यापक अर्थ:** सुरक्षा का मतलब पाबंदी या रोक-टोक नहीं, बल्कि अवसरों का लाभ उठाने की पूरी आजादी देना है।
- **भरोसा ही असली ताकत:** कार्यस्थल पर आपसी सम्मान और भरोसा कर्मचारियों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है।
- **सामूहिक जवाबदेही:** एक बेहतर माहौल बनाने की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संगठन के हर सदस्य की होती है।

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