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  "type": "article",
  "title": "हर घर तिरंगा अभियान से बदली अमेठी की महिलाओं की किस्मत, 1.5 लाख राष्ट्रीय ध्वज बनाकर कमा रहीं लाखों रुपये",
  "summary": "अमेठी में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं लगभग 1.5 लाख तिरंगे बनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। 10 रुपये की लागत से तैयार झंडों की 20 रुपये कीमत मिलने से 148 समूहों के बीच करीब 20 लाख रुपये वितरित होंगे।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में देशभक्ति और स्वावलंबन का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अपने घरों में बैठकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बना रही हैं। जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में, विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं द्वारा चलाई जा रही यह पहल न केवल राष्ट्र सेवा का अवसर दे रही है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से चल रहा यह अभियान कई परिवारों के लिए नियमित रोजगार और वित्तीय सुरक्षा का मुख्य जरिया बन चुका है।\n\nतिरंगा निर्माण से मिल रहा रोजगार और सम्मान\nअमेठी जिले के शाहगढ़, अमेठी, संग्रामपुर, भादर और जायस समेत अनेक ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में इन दिनों तिरंगे बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है। स्वतंत्रता दिवस से जुड़े तिरंगा अभियान को गति देने के लिए स्वयं सहायता समूह की सदस्य दिन-रात जुटी हुई हैं। इस कार्य के बदले महिलाओं को तय मानदेय का भुगतान सीधे किया जा रहा है, जिससे उन्हें घर बैठे ही नियमित आय हासिल हो रही है। इस आर्थिक संबल ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और वे परिवार की वित्तीय जिम्मेदारियों में सक्रिय योगदान दे रही हैं।\n\nबदली महिलाओं की जिंदगी, मिला महाजन प्रथा से छुटकारा\nइस पहल से जुड़ी महिलाओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि स्वयं सहायता समूहों ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है। समूह की सदस्य लक्ष्मी ने कहा, \"तिरंगा हमारे देश की शान है और घर बैठे इसे बनाने का अवसर मिलना हमारे लिए बेहद गर्व की बात है।\" उनका कहना है कि इस काम से देशभक्ति की भावना के साथ-साथ परिवार चलाने के लिए कमाई का जरिया भी उपलब्ध हुआ है।\n\nवहीं समूह की एक अन्य सदस्य प्रवीणा सिंह के अनुसार, राष्ट्रध्वज से देश का गौरव हमेशा चमकता रहता है। उन्होंने बताया कि इस अभियान और समूह के सहयोग से उनके भीतर नई उम्मीद जगी है, वे स्वयं के पैरों पर खड़ी हो रही हैं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस कर रही हैं। इसके अलावा, समूह से जुड़ीं भारती ने एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर करते हुए बताया कि पहले जिनके पास रोजगार के साधन नहीं थे, उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों या आपात स्थिति के लिए भारी ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ते थे। अब महिलाएं समूह में नियमित रूप से अपनी बचत जमा करती हैं और जरूरत पड़ने पर आसानी से पैसा निकाल लेती हैं। तिरंगा बनाकर कमाने का यह अवसर उनके लिए दोहरी खुशी लेकर आया है।\n\nलाखों रुपये के कारोबार से 148 समूह होंगे लाभान्वित\nअमेठी जिले में चल रहे इस व्यापक अभियान के आंकड़े भी महिला सशक्तिकरण की इस सफलता को प्रमाणित करते हैं। जिले के 100 से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 500 महिलाएं करीब डेढ़ लाख तिरंगा झंडे तैयार करने में जुटी हैं। उत्पादन की वित्तीय गणना के अनुसार, एक तिरंगे को बनाने की अनुमानित लागत लगभग 10 रुपये आती है, जबकि इसके बदले महिलाओं को 20 रुपये प्रति झंडा की दर से भुगतान मिल रहा है। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 20 लाख रुपये का राजस्व 148 स्वयं सहायता समूहों में पारदर्शी तरीके से बांटा जाएगा। इससे सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर लाखों रुपये का आर्थिक लाभ मिलेगा और वे पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: हर घर तिरंगा अभियान के तहत स्थानीय समूहों को झंडे बनाने का काम मिलने से ग्रामीण कुटीर उद्योगों और समुदाय आधारित निर्माण पहलों को गति मिल रही है।\n\nअमेठी (उत्तर प्रदेश) में: स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 500 से अधिक महिलाओं को सीधे घर बैठे रोजगार मिला है, जिससे वे महाजनों के कर्ज जाल से मुक्त होकर वित्तीय सुरक्षा हासिल कर रही हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेठी में कितने स्वयं सहायता समूह तिरंगा बनाने के काम में लगे हैं?\nअमेठी जिले में 100 से अधिक स्वयं सहायता समूह तिरंगे बनाने के कार्य में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।\n\n2. तिरंगा अभियान से अमेठी की कितनी महिलाओं को रोजगार मिल रहा है?\nइस पहल के जरिए जिले की लगभग 500 महिलाओं को सीधे तौर पर घर बैठे रोजगार और आय का अवसर मिला है।\n\n3. एक तिरंगे को बनाने में कितनी लागत आती है और महिलाओं को कितना भुगतान मिलता है?\nएक तिरंगे को तैयार करने की अनुमानित लागत 10 रुपये है, जबकि निर्माण करने वाली महिलाओं को 20 रुपये प्रति झंडा भुगतान प्राप्त होता है।\n\n4. इस अभियान के तहत कुल कितना वित्तीय लाभ समूहों के बीच बांटा जाएगा?\nलगभग 1.5 लाख तिरंगे झंडे तैयार होने के बाद करीब 20 लाख रुपये का कुल राजस्व 148 समूहों में विभाजित किया जाएगा।\n\nप्रेरणा और सबक\n• सामूहिक बचत से वित्तीय आजादी: छोटी-छोटी नियमित बचत ग्रामीण परिवारों को महाजनों के उच्च ब्याज वाले कर्ज जाल से मुक्ति दिलाती है।\n• घर बैठे हुनर का उपयोग: सीमित संसाधनों में भी अपने कौशल और हुनर का इस्तेमाल कर आय का नया जरिया बनाया जा सकता है।\n• राष्ट्रीय अभियानों से जुड़ाव: सामाजिक या राष्ट्रीय अभियानों से जुड़कर सम्मान के साथ आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की जा सकती है।",
  "url": "https://trendkia.com/national/hara-ghara-tirnga-abhiyana-se-badali-amethi-ki-mahilaon-ki-kismata-1-5-lakha-rashtriya-dhvaja-banakara-kama-rahin-lakhon-rupaye-16503",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-14",
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    "अमेठी समाचार",
    "स्वयं सहायता समूह",
    "हर घर तिरंगा",
    "महिला सशक्तिकरण",
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    "आत्मनिर्भर भारत"
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