हरिद्वार से आ रहे श्रद्धालुओं के पंजों और मांसपेशियों की थकान दूर करने सहारनपुर शिविर में 21 स्पेशल मसाज मशीनें तैनात सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की चिकित्सा सेवा समिति ने कांवड़ यात्रा के दौरान पैदल चलने वाले भक्तों की थकान कम करने के लिए 21 मसाज मशीनें लगाई हैं, जिनसे पैरों और मांसपेशियों के दर्द में तुरंत राहत मिल रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर हरियाणा, पंजाब और आसपास के क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे शिव भक्तों को भीषण शारीरिक थकान से राहत दिलाने के लिए सहारनपुर में एक अनोखा सेवा शिविर स्थापित किया गया है। सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा के कारण श्रद्धालुओं के पैरों में सूजन, नसों में खिंचाव और गंभीर थकावट हो जाती है। इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर भोजन के अलावा कांवड़ियों के लिए अत्याधुनिक फुट मसाज मशीनों का विशेष प्रबंध किया गया है, जिससे पैदल चल रहे कांवड़ियों को बहुत सुकून मिल रहा है। पारंपरिक मालिश के स्थान पर 21 हाई-टेक मशीनों की व्यवस्था अधिकतर शिविरों में स्वयंसेवक हाथों से मालिश करके तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं, लेकिन सहारनपुर में व्यापारिक संगठन द्वारा संचालित इस चिकित्सा सेवा शिविर में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की चिकित्सा सेवा समिति ने यहां कुल 21 मसाज मशीनें लगाई हैं। ये मशीनें कांवड़ियों के पंजों से लेकर जांघों तक की मांसपेशियों को गहराई से रिलैक्स करती हैं और उनके शरीर के दर्द का त्वरित निवारण करती हैं। तीन अलग-अलग प्रकार की मसाज मशीनें कर रही हैं दर्द दूर शिविर के व्यवस्थापकों ने श्रद्धालुओं की विभिन्न शारीरिक समस्याओं के अनुसार तीन श्रेणियों की मशीनें उपलब्ध कराई हैं। शिविर संचालक दीपक खेड़ा ने बताया कि इनमें मैग्नेट से युक्त विशेष मशीनें शामिल हैं, जो पंजों के महत्वपूर्ण प्रेशर पॉइंट्स को खोलकर नसों के तनाव को दूर करती हैं। इसके अलावा दूसरी श्रेणी की मशीनें थाई से लेकर एड़ी तक के हिस्से की गहरी मालिश करती हैं। यदि किसी शिव भक्त के पैर के किसी भी भाग में खिंचाव या दर्द है, तो ये मशीनें उस हिस्से पर लक्षित दबाव बनाकर दर्द में राहत पहुंचाती हैं। शिविर परिसर में मशीनी मसाज के साथ-साथ प्राथमिक चिकित्सा एवं आवश्यक दवाइयों की भी मुफ़्त व्यवस्था रखी गई है। पिछले साल 6 मशीनों से हुई थी शुरुआत, इस बार पूरा हुआ 21 का लक्ष्य दीपक खेड़ा के अनुसार, इस जनसेवा पहल की शुरुआत पिछले वर्ष केवल 6 मशीनों के साथ की गई थी। सहयोगियों के निरंतर प्रयास और धार्मिक भावना के बल पर इस वर्ष 21 मशीनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया है। यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के अनुसार, कई दिनों तक लगातार चलने के कारण हाथों की मालिश से नसों की जकड़न पूरी तरह दूर नहीं हो पाती थी, जबकि इन मशीनों से मिलने वाले कंपन और प्रेशर से पंजों का दर्द बहुत तेजी से गायब हो जाता है। अंबाला जा रहे श्रद्धालु कैलाश ने बताया मशीनी मालिश का अनुभव हरिद्वार से कांवड़ उठाकर अंबाला की दिशा में आगे बढ़ रहे कांवड़िए कैलाश ने शिविर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा, "मशीन से मसाज मिलने के बाद चलने की पूरी थकावट बहुत कम महसूस होती है, हाथों की मालिश की तुलना में मशीनों से बहुत अधिक आराम मिलता है।" कैलाश जैसे सैकड़ों भक्त प्रतिदिन इस शिविर में कुछ समय विश्राम करके अपनी यात्रा को आगे के लिए सहज बना रहे हैं। इसका आप पर असर भारत में: कांवड़ यात्रा के लंबे पैदल मार्गों पर तकनीकी और चिकित्सीय सुविधाओं के बढ़ने से दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों की शारीरिक सुरक्षा और यात्रा सुगमता मजबूत होती है। सहारनपुर में: शहर से होकर गुजरने वाले हजारों कांवड़ियों को पैरों के दर्द और नसों की खिंचाव से तुरंत राहत मिल रही है, जिससे उनकी आगे की यात्रा आसान हो गई है। सवाल-जवाब 1. सहारनपुर शिविर में कांवड़ियों के लिए कितनी मसाज मशीनें लगाई गई हैं? शिविर में कांवड़ियों के पैरों का दर्द और थकावट दूर करने के लिए कुल 21 मसाज मशीनें लगाई गई हैं। 2. यह सेवा शिविर किस संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा है? यह चिकित्सा सेवा शिविर सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की चिकित्सा सेवा समिति द्वारा आयोजित किया गया है। 3. शिविर में उपलब्ध मशीनों की क्या खासियत है? शिविर में तीन अलग प्रकार की मशीनें हैं, जिनमें मैग्नेट युक्त मशीनें पंजों के प्रेशर पॉइंट्स खोलती हैं और अन्य मशीनें थाई से लेकर एड़ी तक मसाज करती हैं। 4. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मशीनों की संख्या में कितना बदलाव आया है? शिविर संचालक दीपक खेड़ा के अनुसार पिछले साल केवल 6 मशीनों से शुरुआत की गई थी, जिसे इस वर्ष बढ़ाकर 21 मशीनों का लक्ष्य पूरा किया गया। 5. मशीन मसाज को लेकर कांवड़ियों का क्या अनुभव रहा है? अंबाला जा रहे कांवड़िए कैलाश के अनुसार हाथों की मालिश के मुकाबले मशीनी मसाज से पैरों के दर्द और नसों की जकड़न में बहुत अधिक आराम मिल रहा है। प्रेरणा और सबक सेवा में तकनीक का समावेश: पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक मशीनों का उपयोग करके जनसेवा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। छोटे स्तर से बड़ा लक्ष्य हासिल करना: पिछले साल 6 मशीनों से शुरुआत करके सामूहिक प्रयास के बल पर 21 मशीनों तक पहुंचना निरंतर प्रयास की सीख देता है। सामुदायिक सहयोग की शक्ति: स्थानीय व्यापार मंडल और सेवा समितियों का एकजुट होना सामाजिक कल्याण में बड़ा बदलाव ला सकता है। https://trendkia.com/national/haridwar-se-a-rahe-shraddhaluon-ke-pnjon-aura-mansapeshiyon-ki-thakana-dura-karane-saharanpur-shivira-men-21-speshala-masaja-mashi-14981 TrendKia — Har trend, sabse pehle.