हवा में पायलट पर जानलेवा हमले के बाद भारतीय उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था का होगा बड़ा रिव्यू फ्लाईदुबई के विमान में भारतीय पायलट पर हुए हमले के बाद भारत सरकार विमानन सुरक्षा का व्यापक मूल्यांकन कर रही है, जिसमें स्काई मार्शल्स की तैनाती और पायलटों की मानसिक जांच के कड़े नियम शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में एक कमर्शियल उड़ान के दौरान भारतीय पायलट सुमित मच्छार पर हुए हिंसक हमले ने वैश्विक विमानन उद्योग के सामने गंभीर सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। तेल अवीव की तरफ बढ़ रहे इस विमान में 170 से अधिक पैसेंजर्स मौजूद थे, जब ओमानी को-पायलट ने बीच हवा में पायलट-इन-कमांड पर जानलेवा वार कर दिया। इस कथित हमले में को-पायलट ने विमान को क्रैश कराने का प्रयास किया, जिससे पायलट गंभीर रूप से घायल हो गए। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम को भारत सरकार ने अत्यंत गंभीर सुरक्षा संकट माना है और पूरे मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। सिविल एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि भारत इस घटनाक्रम को पूरी तरह सुरक्षा के नजरिए से देख रहा है और यदि जरूरी हुआ तो उच्च स्तर पर निर्णय लेकर आवश्यक एडवाइजरी जारी की जाएगी। इस खौफनाक प्रकरण के सामने आने के बाद देश भर के एविएशन सुरक्षा प्रोटोकॉल को नए सिरे से परखने का काम तेज हो गया है। संवेदनशील मार्गों पर स्काई मार्शल्स की तैनाती पर विचार हवा में घटित इस हिंसक वारदात के बाद सुरक्षा तंत्र हरकत में आ गया है और पूरे देश के विमानन ढांचे की सुरक्षा व्यवस्था का गहन परीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की समीक्षा की जा रही है, जिसमें विशेष रूप से संवेदनशील हवाई मार्गों पर स्काई मार्शल्स को तैनात करने का विकल्प सबसे प्रमुखता से सामने आया है। किसी भी विमान के भीतर अचानक पैदा होने वाले अप्रत्याशित संकट, अपहरण या हिंसक झड़पों से निपटने के लिए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी के कमांडो विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं। इसके साथ ही हवाई अड्डों और विमानन तंत्र की हिफाजत संभालने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ की सुरक्षा तैयारियों और प्रतिक्रिया तंत्र की भी दोबारा पड़ताल की जाएगी, ताकि उड़ानों की सुरक्षा में कोई कमी न रहे। पायलटों की मानसिक जांच और साइकोमेट्रिक असेसमेंट कॉकपिट में हुए इस टकराव ने एयरलाइंस के मौजूदा साइकोमेट्रिक असेसमेंट और मनोवैज्ञानिक परीक्षण प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञ इस पहलू पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि क्या वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कॉकपिट के भीतर पैदा होने वाले जोखिमों को पहले से भांपने में सक्षम हैं। विमानन क्षेत्र के दो प्रमुख नियामक, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और डीजीसीए, अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में नए और सख्त सुरक्षा नियम तय करने की दिशा में जुट गए हैं। संबंधित अधिकारियों का मुख्य जोर इस बात पर है कि उड़ान के दौरान किसी पायलट अथवा क्रू मेंबर के व्यवहार में आने वाले मनोवैज्ञानिक बदलावों और असामान्य संकेतों की समय रहते पहचान कैसे की जाए। कॉकपिट के आंतरिक जोखिमों से निपटने की नई रूपरेखा परंपरागत रूप से एविएशन सिक्योरिटी का पूरा ढांचा यात्रियों की स्क्रीनिंग और बाहरी खतरों को रोकने पर केंद्रित रहा है। हालांकि, इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कॉकपिट के अंदर मौजूद क्रू सदस्य भी अप्रत्याशित परिस्थितियों में विमान की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसके मद्देनजर अब ऐसे कड़े नियम तैयार करने पर विचार चल रहा है जिससे उड़ान के दौरान किसी एक पायलट को कॉकपिट में अकेले रहकर कोई मनमानी या खतरनाक कदम उठाने का अवसर न मिल सके। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां अब इस तकनीकी और प्रशासनिक पहलू की समीक्षा कर रही हैं कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में विमान का पूरा नियंत्रण तुरंत कैसे सुरक्षित और स्थिर किया जाए, ताकि विमान में सवार सैकड़ों यात्रियों की जान हर हाल में सुरक्षित रह सके। इसका आप पर असर इस घटना के बाद विमानन सुरक्षा की समीक्षा से हवाई यात्रियों की यात्रा और सुरक्षा नियमों में प्रत्यक्ष बदलाव देखने को मिल सकते हैं। • भारत में सुरक्षा प्रोटोकॉल: संवेदनशील उड़ानों पर स्काई मार्शल्स की मौजूदगी और सुरक्षा जांच और कड़ी की जा सकती है। इससे यात्रियों को उड़ानों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का अनुभव होगा और सुरक्षा नियमों का अधिक सख्ती से पालन करना होगा। • यात्रियों के लिए सतर्कता: उड़ानों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा से हवाई यात्रा अधिक सुरक्षित बनेगी। यात्रियों को भविष्य में टिकट बुकिंग और बोर्डिंग के दौरान नए सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ सकता है। • विमानन क्रू के नियम: एयरलाइनों में पायलटों के मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और कॉकपिट प्रोटोकॉल में बदलाव किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कॉकपिट के भीतर मौजूद क्रू का आचरण हमेशा जांच और निगरानी के दायरे में रहे। • आपातकालीन प्रक्रियाएं: विमान नियंत्रण को सुरक्षित रखने के लिए नए सुरक्षा तंत्र विकसित किए जाएंगे। किसी भी अप्रत्याशित संकट के समय विमान का नियंत्रण सुरक्षित हाथों में बनाए रखने की पुख्ता व्यवस्था होगी। ऐसा क्यों हुआ फ्लाईदुबई की उड़ान में एक पायलट द्वारा अपने ही सहयोगी पर हमला करने और विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश ने सुरक्षा समीक्षा को अनिवार्य बना दिया। सामान्य सुरक्षा तंत्र बाहरी खतरों पर नजर रखता था, लेकिन इस घटना ने कॉकपिट के आंतरिक खतरे को उजागर कर दिया। • हवा में पायलट पर हमला: तेल अवीव जा रही फ्लाइट में ओमानी को-पायलट ने पायलट-इन-कमांड सुमित मच्छार पर अचानक हिंसक हमला किया। इस हमले के दौरान विमान को क्रैश कराने का प्रयास किया गया, जिससे पायलट गंभीर रूप से घायल हो गए। • कॉकपिट में आंतरिक खतरे का खुलासा: इस घटना ने साबित किया कि खतरा केवल यात्रियों या बाहरी तत्वों से नहीं बल्कि विमान उड़ा रहे क्रू से भी हो सकता है। इसी वजह से मौजूदा प्रोटोकॉल को नाकाफी मानते हुए नए नियमों की आवश्यकता महसूस की गई। • मानसिक मूल्यांकन की खामियां: घटना के बाद एयरलाइंस के मौजूदा साइकोमेट्रिक टेस्ट की क्षमता पर सवाल उठे कि वे पायलटों के व्यवहारिक बदलाव भांपने में असमर्थ रहे। नियामक एजेंसियां अब इन मनोवैज्ञानिक टेस्ट्स को अधिक गहन और प्रभावी बनाने पर काम कर रही हैं। सवाल-जवाब 1. फ्लाईदुबई की फ्लाइट में क्या घटना घटी थी? तेल अवीव जा रही फ्लाइट में 170 से अधिक यात्रियों की मौजूदगी के दौरान ओमानी को-पायलट ने भारतीय पायलट सुमित मच्छार पर हमला कर दिया और कथित रूप से विमान क्रैश कराने की कोशिश की। 2. इस घटना पर भारत सरकार का क्या रुख है? भारत सरकार इसे एक गंभीर सुरक्षा खतरा मानकर जांच कर रही है और सिविल एविएशन सेक्रेटरी के अनुसार जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर एडवाइजरी जारी की जाएगी। 3. विमान सुरक्षा समीक्षा में किन मुख्य कदमों पर विचार हो रहा है? संवेदनशील रूट्स पर एनएसजी के स्काई मार्शल्स की तैनाती, सीआईएसएफ की तैयारियों की समीक्षा और कॉकपिट में अकेले पायलट को रोकने के नियम बनाने पर विचार चल रहा है। 4. पायलटों की मानसिक जांच को लेकर क्या योजना बनाई जा रही है? ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और डीजीसीए पायलटों के साइकोमेट्रिक असेसमेंट की समीक्षा कर रहे हैं ताकि उड़ान के दौरान व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहले ही पहचाना जा सके। https://trendkia.com/national/hava-men-payalata-para-janaleva-hamale-ke-bada-bharatiya-uranon-ki-suraksha-vyavastha-ka-hoga-bara-rivyu-41932 TrendKia — Har trend, sabse pehle.