हवाला फंडिंग मामले में यासीन मलिक और छह अन्य के खिलाफ चलेगा मनी लॉन्ड्रिंग का ट्रायल विशेष एनआईए अदालत ने पाकिस्तान से कथित तौर पर 8.95 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़े मामले में यासीन मलिक समेत सात आरोपियों पर ट्रायल चलाने का निर्देश दिया है। विशेष एनआईए अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। नई दिल्ली में स्थित इस अदालत के निर्देश के बाद अब इस प्रकरण में औपचारिक कानूनी प्रक्रिया तेज होगी। यह पूरा मामला सीमा पार से हवाला तंत्र के जरिए विदेशी पूंजी हासिल करने और गैरकानूनी गतिविधियों को वित्तीय सहायता पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों की पड़ताल प्रवर्तन निदेशालय की जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क के माध्यम से कुल 8,94,87,639 रुपये यानी लगभग 8.95 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय उत्पन्न की गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि अवैध रास्तों से तैयार की गई यह भारी भरकम रकम बाद में आरोपियों तक पहुंचाई गई थी। इस मामले में पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों की ओर से अवैध माध्यमों का इस्तेमाल करके देश में धन भेजने के आरोपों की बारीकी से छानबीन की जा रही है। जांच एजेंसी का फोकस रकम के वास्तविक स्रोत, पैसों के लेन देन के रास्तों और इस पूरी कड़ी में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका को स्पष्ट करने पर है। साल 2017 में दर्ज मूल प्राथमिकी का आधार प्रवर्तन निदेशालय की यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच दरअसल राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा वर्ष 2017 में दर्ज की गई एक मूल प्राथमिकी पर आधारित है। उस समय एनआईए ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, धारा 121 और धारा 121ए के तहत मामला दर्ज किया था। इसके साथ ही आतंकवाद से जुड़े कड़े कानून यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और धारा 40 के तहत भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। मूल जांच में यह सामने आया था कि सुनियोजित षड्यंत्र के तहत देश की संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों के लिए धन एकत्र किया जा रहा था। अदालती सुनवाई के अगले चरण विशेष अदालत द्वारा ट्रायल शुरू करने के निर्देश के बाद अब अभियोजन पक्ष को अदालत के समक्ष अपने ठोस दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और गवाह पेश करने होंगे। इस प्रक्रिया के दौरान सभी सातों आरोपियों को भी अपने बचाव में कानूनी दलीलें और प्रमाण पेश करने का पूरा अवसर मिलेगा। ट्रायल के दौरान यह तय होगा कि वित्तीय हेराफेरी, विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़े इन आरोपों को कानूनी कसौटी पर किस हद तक साबित किया जा सकता है। अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों की विश्वसनीयता के आधार पर ही इन सभी आरोपों पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। इसका आप पर असर यह अदालती आदेश राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार से आने वाले अवैध वित्तीय नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम है। • राष्ट्रीय स्तर पर: सीमा पार से आने वाले काले धन और हवाला चैनलों पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की कानूनी कार्रवाई को मजबूती मिलेगी। यह उन सभी नेटवर्क के लिए स्पष्ट संदेश है जो अवैध विदेशी फंडिंग के जरिए देश के अंदर गड़बड़ी फैलाने का प्रयास करते हैं। • जम्मू और कश्मीर में: अलगाववादी नेताओं और उनसे जुड़े संगठनों की फंडिंग जांच के कानूनी अंजाम तक पहुंचने से स्थानीय कानून व्यवस्था और शांति प्रक्रिया को बल मिलेगा। इससे हवाला नेटवर्क के जरिए स्थानीय युवाओं और समूहों तक पहुंचने वाली अवैध नकदी पर कड़ा प्रहार होगा। • वित्तीय नियमों के लिए: अवैध विदेशी लेन-देन और बिना हिसाब के धन के प्रवाह पर निगरानी तंत्र और अधिक सतर्क होगा। बैंकिंग और अनौपचारिक लेन-देन पर वित्तीय जांच एजेंसियों की नजर और कड़ी होगी। • अदालती प्रक्रिया के तहत: लंबे समय से लंबित मामलों में ट्रायल शुरू होने से पीड़ितों और आम जनता के बीच न्यायिक व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण होकर निष्पक्ष निर्णय का रास्ता साफ होगा। ऐसा क्यों हुआ यह कानूनी कार्रवाई सीमा पार से कथित तौर पर अवैध धन जुटाने और उसे भारत में विध्वंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने के आरोपों के कारण शुरू हुई है। • हवाला नेटवर्क की भूमिका: जांच में आरोप लगाया गया कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों से लगभग 8.95 करोड़ रुपये की रकम अवैध हवाला चैनलों के जरिए जुटाई गई थी। इस अघोषित नकदी को देश के भीतर विभिन्न लोगों तक पहुंचाया गया ताकि गैरकानूनी एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके। • 2017 की एनआईए जांच: राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2017 में देशद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियों के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी, जो इस पूरी कार्रवाई की प्राथमिक नींव बनी। इस मामले में आईपीसी और यूएपीए की विभिन्न गंभीर धाराएं शामिल की गई थीं। • ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग केस: मूल आतंकी फंडिंग मामले से अपराध की आय पैदा होने के साक्ष्य मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत समानांतर जांच शुरू की। एजेंसी ने पूरी रकम के लेन देन के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों को जोड़कर अदालत में आरोप तय किए। सवाल-जवाब 1. विशेष एनआईए अदालत ने यासीन मलिक के खिलाफ क्या आदेश दिया है? अदालत ने यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित विदेशी फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल शुरू करने का निर्देश दिया है। 2. इस मामले में कुल कितनी रकम की अपराध से अर्जित आय बताई गई है? प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार इस मामले में कुल 8,94,87,639 रुपये यानी करीब 8.95 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय शामिल है। 3. प्रवर्तन निदेशालय का यह मामला किस एजेंसी की जांच पर आधारित है? यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा वर्ष 2017 में दर्ज की गई मूल प्राथमिकी और जांच पर आधारित है। 4. 2017 के मूल मामले में कौन सी मुख्य धाराएं लगाई गई थीं? मूल मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की विभिन्न धाराएं जैसे 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 लगाई गई थीं। 5. ट्रायल के दौरान अब आगे क्या प्रक्रिया होगी? अब अभियोजन पक्ष अदालत में अपने सबूत और गवाह पेश करेगा, जबकि आरोपियों को भी अपने बचाव में दलीलें रखने का मौका दिया जाएगा। https://trendkia.com/national/havala-phndinga-mamale-men-yasin-malik-aura-chhaha-anya-ke-khilapha-chalega-mani-londringa-ka-trayala-51255 TrendKia — Har trend, sabse pehle.