# भारतीय वायुसेना को मिलेंगे 160 स्वदेशी स्मार्ट ग्लाइड बम, रक्षा मंत्रालय ने बीडीएल के साथ किया 810.79 करोड़ रुपये का सौदा

> रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वीपन्स की खरीद हेतु भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ 810.79 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। डीआरडीओ द्वारा विकसित इस प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम को सुखोई-30 एमकेआई, जैगुआर और हॉक विमानों से दागा जा सकेगा।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/iaf-ko-milenge-160-svadeshi-smarta-glaida-bama-defence-ministry-ne-bdl-ke-satha-kiya-810-79-karora-rupaye-ka-sauda-37163 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय वायुसेना, रक्षा मंत्रालय, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, डीआरडीओ, स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वीपन, सुखोई 30 एमकेआई, रक्षा सौदा

भारतीय वायुसेना की मारक और रणनीतिक क्षमताओं को सशक्त करने के उद्देश्य से एक बड़ा रक्षा अनुबंध औपचारिक रूप से संपन्न हुआ है। नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ 810.79 करोड़ रुपये के खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अनुबंध के तहत वायुसेना को 160 आधुनिक सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वीपन्स यानी SAT-SAAW प्रदान किए जाएंगे, जो जमीन पर स्थित सैन्य ठिकानों को लंबी दूरी से अचूक निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

## स्वदेशी डिजाइन और बाय इंडियन आईडीडीएम श्रेणी का महत्व
रक्षा मंत्रालय के विवरण के अनुसार यह संपूर्ण खरीद प्रक्रिया 'बाय इंडियन-आईडीडीएम' (इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) वर्गीकरण के अंतर्गत की गई है। इस नीतिगत ढांचे का सीधा अर्थ यह है कि इस उन्नत हथियार प्रणाली की रूपरेखा तैयार करने, अनुसंधान कार्य पूरा करने तथा कलपुर्जों के वास्तविक विनिर्माण में भारतीय क्षमताओं और घरेलू प्रतिष्ठानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों की दिशा में इस सौदे को बेहद निर्णायक कदम माना जा रहा है।

इस संपूर्ण हथियार प्रणाली की वैचारिक रूपरेखा और तकनीकी विकास का श्रेय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को जाता है। संस्थान ने इस प्रणाली को घरेलू आवश्यकताओं के अनुकूल तैयार किया है, जिसके चलते हथियार में लगभग 60 फीसदी सामग्री पूरी तरह से स्वदेशी रखी गई है। इतना ही नहीं, इसके संचालन के लिए आवश्यक कई महत्वपूर्ण उप-प्रणालियां भी देश के भीतर ही अनुसंधान के जरिए तैयार की गई हैं, जिससे भविष्य में कलपुर्जों की आपूर्ति और मरम्मत के लिए किसी बाहरी पक्ष पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

## सटीक मारक क्षमता और स्टैंड-ऑफ रेंज की तकनीक
तकनीकी दृष्टिकोण से SAT-SAAW हवा से जमीन पर मार करने वाला एक अत्याधुनिक प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है। इसे इस तरीके से विकसित किया गया है कि लड़ाकू विमान अपने निर्धारित लक्ष्य से सुरक्षित और पर्याप्त दूरी पर रहते हुए भी जमीन पर मौजूद बेहद संवेदनशील और रणनीतिक संपत्तियों को पूरी सटीकता के साथ ध्वस्त कर सकें।

इस ग्लाइड बम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज है। युद्ध की परिस्थितियों में जब विमान को किसी सघन सुरक्षा घेरे वाले क्षेत्र पर हमला करना होता है, तो लक्ष्य के अत्यधिक समीप जाना लड़ाकू विमान और पायलट दोनों के लिए बड़ा जोखिम बन जाता है। इस प्रणाली के तहत लड़ाकू विमान दुश्मन की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के दायरे से बाहर रहकर इस ग्लाइड बम को हवा में छोड़ सकता है। प्रक्षेपण के उपरांत यह बम अपने निर्धारित पथ पर ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुंचता है और उस पर अचूक प्रहार करता है।

## रणनीतिक एयरफील्ड ठिकानों पर प्रहार का उद्देश्य
रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस घातक हथियार को मुख्य रूप से दुश्मन के हवाई अड्डों और एयरफील्ड को निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। किसी भी आधुनिक हवाई संघर्ष में एयरफील्ड सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र होते हैं। यहीं से लड़ाकू विमान अपने अभियानों की शुरुआत करते हैं, ईंधन भरते हैं, हथियारों से लैस होते हैं और युद्धक्षेत्र से वापस लौटते हैं।

यदि किसी एयरफील्ड के रनवे, टैक्सीवे या प्रमुख सहायक ढांचे को इस सटीक ग्लाइड बम से समय रहते क्षतिग्रस्त कर दिया जाए, तो वहां तैनात शत्रु के विमानों की उड़ानें तुरंत बाधित हो जाती हैं। इससे दुश्मन के हवाई अभियानों की पूरी योजना बिखर जाती है और युद्धक्षेत्र में वायुसेना को रणनीतिक बढ़त मिल जाती है। लंबी दूरी से एयरफील्ड को नष्ट करने की यह क्षमता योजनाकारों को अभियानों के संचालन में जबरदस्त लचीलापन देती है।

## सुखोई-30 एमकेआई, जैगुआर और हॉक विमानों से समन्वय
इस नई हथियार प्रणाली को भारतीय वायुसेना के बहुस्तरीय लड़ाकू विमान बेड़े में आसानी से जोड़ने के लिए अनुकूल बनाया गया है। इसे सुखोई-30 एमकेआई, जैगुआर और हॉक जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों से संचालित किया जा सकेगा। विभिन्न श्रेणियों और पीढ़ियों के विमानों के साथ इस बम का तालमेल वायुसेना को विभिन्न प्रकार के मिशनों में सटीक निर्णय लेने की आजादी देता है।

विशेष रूप से उन मिशनों में जहां दुश्मन के वायु रक्षा तंत्र काफी सघन होते हैं, वायुसेना के पायलट अपने विमान को सुरक्षित फासले पर रखकर इन लक्ष्यों को नेस्तनाबूद कर सकते हैं। अलग-अलग लड़ाकू विमानों पर इस हथियार की तैनाती से वायुसेना किसी भी दिशा में तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम बनेगी और बेड़े की समग्र प्रभावकारिता कई गुना बढ़ जाएगी।

## आपूर्ति की समयसीमा और परिचालन क्षमता में विस्तार
हस्ताक्षरित अनुबंध की शर्तों के मुताबिक 160 SAT-SAAW हथियारों की आपूर्ति वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के दौरान की जाएगी। इस तय समयसीमा के भीतर भारत डायनेमिक्स लिमिटेड इन हथियारों का निर्माण पूरा कर इन्हें चरणबद्ध तरीके से भारतीय वायुसेना के शस्त्रागार में शामिल करेगा।

जैसे-जैसे ये हथियार वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बनेंगे, लंबी दूरी से सटीक हमला करने की भारत की क्षमता में ठोस प्रगति दर्ज होगी। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस स्वदेशी हथियार के शामिल होने से वायुसेना की परिचालन तैयारियां नई ऊंचाई पर पहुंचेंगी। चूंकि प्रणाली के महत्वपूर्ण घटक और उप-प्रणालियां भारत में ही निर्मित हैं, इसलिए लंबी अवधि में इनके नियमित रखरखाव, उन्नयन और भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन को बनाए रखना रक्षा तंत्र के लिए बेहद सुगम और लागत प्रभावी साबित होगा।

## इसका आप पर असर
इस रक्षा सौदे से देश की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू रक्षा उद्योग में विनिर्माण गतिविधियों को ठोस गति मिलेगी।

- **राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर:** भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी से दुश्मन के हवाई अड्डों को तबाह करने वाले 160 आधुनिक प्रिसिजन गाइडेड बम प्राप्त होंगे। इससे युद्ध की स्थिति में पायलटों को सुरक्षित दूरी पर रहते हुए सामरिक लक्ष्यों पर अचूक निशाना साधने की मजबूत क्षमता मिलेगी।
- **घरेलू रक्षा विनिर्माण:** 810.79 करोड़ रुपये का यह अनुबंध सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड को दिया गया है। इससे घरेलू स्तर पर उच्च तकनीक वाले हथियारों के निर्माण, अनुसंधान और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को सीधा बढ़ावा मिलेगा।
- **आपूर्ति की तय समयसीमा:** इन सभी हथियारों की आपूर्ति वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के बीच चरणबद्ध रूप से की जाएगी। इस निर्धारित अवधि में वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रन इन बमों को अपनी युद्धक प्रणाली में शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे।
- **विमान बेड़े की क्षमता:** इन हथियारों को सुखोई-30 एमकेआई, जैगुआर और हॉक विमानों में तैनात किया जा सकेगा। एक ही हथियार को कई तरह के लड़ाकू विमानों पर लगाने की सुविधा से वायुसेना के मिशनों में अतिरिक्त रणनीतिक लचीलापन आएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह खरीद समझौता भारतीय वायुसेना को स्टैंड-ऑफ दूरी से दुश्मन के एयरफील्ड निष्क्रिय करने की आधुनिक क्षमता देने और रक्षा उपकरणों के निर्माण में विदेशी निर्भरता घटाने की रणनीति के तहत हुआ है।

- **एयरफील्ड निष्क्रिय करने की सामरिक आवश्यकता:** आधुनिक हवाई युद्ध में दुश्मन के रनवे और एयरफील्ड बुनियादी ढांचे को शुरुआत में ही नष्ट करना अभियानों में निर्णायक बढ़त दिलाता है। हवा से जमीन पर सटीक वार करने वाले ग्लाइड बम इस कार्य को विमान को जोखिम में डाले बिना अंजाम देते हैं।
- **स्टैंड-ऑफ दूरी की तकनीक:** वायु रक्षा मिसाइलों के भारी खतरे वाले इलाकों में लड़ाकू विमानों को लक्ष्य के करीब जाने से बचाने के लिए लंबी दूरी से ग्लाइड करने वाले बमों की भारी मांग थी। यह हथियार विमान को सुरक्षित फासले से हमला करने की सुविधा देता है।
- **आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति:** केंद्र सरकार की बाय इंडियन-आईडीडीएम श्रेणी के तहत घरेलू स्तर पर डिजाइन और विनिर्मित हथियारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। डीआरडीओ द्वारा 60 फीसदी स्वदेशी सामग्री के साथ विकसित इस तकनीक को औद्योगिक उत्पादन में बदलना इसी नीति का नतीजा है।

## सवाल-जवाब

### 1. रक्षा मंत्रालय ने किस हथियार की खरीद के लिए समझौता किया है?
मंत्रालय ने 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वीपन्स (SAT-SAAW) की खरीद के लिए अनुबंध किया है।

### 2. इस रक्षा सौदे की कुल लागत कितनी है और यह किसके साथ हुआ है?
यह सौदा 810.79 करोड़ रुपये का है और यह अनुबंध भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ किया गया है।

### 3. SAT-SAAW हथियार को किस संस्था ने डिजाइन और विकसित किया है?
इस हथियार प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश में ही डिजाइन और विकसित किया है।

### 4. इस हथियार प्रणाली में कितने प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है?
इस हथियार प्रणाली में लगभग 60 फीसदी स्वदेशी सामग्री शामिल है।

### 5. SAT-SAAW को भारतीय वायुसेना के किन विमानों से दागा जा सकेगा?
इसे सुखोई-30 एमकेआई, जैगुआर और हॉक जैसे लड़ाकू विमानों से संचालित करने के लिए तैयार किया गया है।

### 6. भारतीय वायुसेना को इन हथियारों की डिलीवरी कब तक मिलेगी?
इन 160 हथियारों की डिलीवरी वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के दौरान निर्धारित की गई है।

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