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  "type": "article",
  "title": "आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत पर भड़का आक्रोश, परिजनों ने शुरू किया अनशन और जांच के लिए पहुंची एनसीएससी",
  "summary": "आईआईटी बॉम्बे में सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परिजनों ने जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जबकि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कैंपस पहुंचकर मामले की पड़ताल की है।",
  "content": "आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उपजा विवाद गहराता जा रहा है। मामले की तहकीकात और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए मृतक छात्र के परिजनों ने मुंबई के आज़ाद मैदान में आमरण अनशन शुरू कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि संस्थान में गंभीर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना की वजह से उनके बेटे की जान गई। विवाद के व्यापक रूप लेने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने खुद परिसर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और पुलिस अधिकारियों से जांच से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी ली।\n\nहॉस्टल के कमरे में मिला था छात्र का शव\nयह घटनाक्रम 18 सितंबर 2026 को सामने आया था, जब संस्थान के पवई स्थित हॉस्टल के कमरे में 22 वर्षीय साहिल वाकोडे का शव पंखे से लटका पाया गया। साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था और मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का निवासी था। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि साहिल ने खुद से यह कदम नहीं उठाया, बल्कि उसे ऐसे हालात में धकेल दिया गया जहां उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचा था। परिजनों के अनुसार उसे लगातार जातिसूचक टिप्पणियों और प्रताड़ना का शिकार बनाया जा रहा था। मामले पर छात्रों और कई राजनीतिक संगठनों के कड़े विरोध के बाद इसकी विवेचना मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।\n\nआज़ाद मैदान में परिजनों का अनशन और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग\nबेटे को खोने के बाद न्याय की गुहार लगाते हुए पिता रवींद्र वाकोडे और मां सोनाली वाकोडे ने सार्वजनिक आंदोलन का रास्ता चुना है। उनके वकील सिद्धार्थ इंगले ने पुष्टि की है कि परिजनों ने आज़ाद मैदान में अपनी भूख हड़ताल शुरू कर दी है। साहिल की मां सोनाली वाकोडे का कहना है कि उनका बेटा शैक्षणिक और तकनीकी गतिविधियों में बेहद आगे था। वह रोबोटिक्स और एआई से जुड़े कार्यक्रमों में 50 लोगों के दल का नेतृत्व करने वाला था और उसका चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में भी हुआ था। उनका तर्क है कि इतना प्रतिभाशाली युवा कभी बिना किसी बाहरी दबाव के ऐसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता।\n\nपरिजनों ने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला की तत्काल गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई करने की मांग उठाई है। बढ़ते असंतोष के बीच संस्थान प्रशासन ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के डीन पद से हटा दिया है। इसके अलावा छात्रों के आक्रोश और मौजूदा माहौल को देखते हुए 26 और 27 सितंबर को प्रस्तावित मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को आगे बढ़ाकर 10 और 11 अक्टूबर के लिए तय किया गया है।\n\nकैंपस में एनसीएससी की जांच और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक\nमामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने आईआईटी बॉम्बे परिसर का दौरा किया और घटनास्थल की विस्तृत पड़ताल की। आयोग के अध्यक्ष ने शोक संतप्त माता-पिता से मुलाकात कर उनकी बात सुनी और निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिया। इसके अतिरिक्त आयोग ने मुंबई के पुलिस आयुक्त और क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर अब तक की कानूनी कार्रवाई की समीक्षा की।\n\nआरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित परिवार तथा छात्र संगठन अब मांग कर रहे हैं कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए ताकि साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को बिना देरी सजा दिलाई जा सके और भविष्य में किसी अन्य विद्यार्थी को ऐसे उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।\n\nइसका आप पर असर\nइस घटना ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत उत्पीड़न की रोकथाम और कैंपस सुरक्षा नियमों को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।\n\n• भारत में: देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों की सुरक्षा और प्रताड़ना निवारण तंत्र पर समीक्षा तेज हो सकती है। छात्रों और अभिभावकों द्वारा कैंपस में मौजूद शिकायत निवारण कमेटियों की कार्यप्रणाली को लेकर अधिक जवाबदेही की मांग की जाएगी।\n• मुंबई में: आईआईटी बॉम्बे के छात्रों की मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं अब 26-27 सितंबर के बजाय 10-11 अक्टूबर को आयोजित की जाएंगी। आज़ाद मैदान और पवई क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों के कारण कैंपस प्रशासन और स्थानीय पुलिस की सतर्कता काफी बढ़ गई है।\n• अभिभावकों और छात्रों के लिए: हॉस्टल में रहने वाले इंजीनियरिंग छात्रों के मानसिक दबाव और शिकायतों पर संस्थान स्तर पर निगरानी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। छात्र किसी भी तरह के संस्थागत भेदभाव की शिकायत सीधे कानूनी निकायों या आयोगों में दर्ज कराने को लेकर अधिक मुखर हो सकते हैं।\n• प्रशासनिक स्तर पर: पुलिस जांच और एनसीएससी के हस्तक्षेप के चलते शिक्षण संस्थानों के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों की जिम्मेदारियों की सीधी समीक्षा होगी। मामलों की समयबद्ध सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया अपनाने का दबाव बढ़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद परिजनों द्वारा लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों ने इस मामले को गंभीर मोड़ दे दिया है।\n\n• मौत की प्रत्यक्ष परिस्थिति: 18 सितंबर 2026 को साहिल का शव पवई कैंपस के हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया था। हालांकि पुलिस इसे पहली नजर में खुदकुशी के रूप में देख रही थी, लेकिन परिजनों ने आरोप लगाया कि उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया।\n• जातिगत उत्पीड़न के आरोप: परिजनों का आरोप है कि साहिल को लगातार जातिसूचक गालियां दी जा रही थीं और संस्थान के भीतर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी प्रताड़ना से तंग आकर हालात इतने बिगड़ गए।\n• कानूनी कार्रवाई और जांच का दायरा: छात्र संगठनों के विरोध के चलते जांच मुंबई पुलिस से क्राइम ब्रांच को सौंपी गई और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट तथा आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने हस्तक्षेप करते हुए स्थल जांच शुरू की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. साहिल वाकोडे कौन थे और वह किस विभाग में पढ़ाई कर रहे थे?\nसाहिल वाकोडे 22 वर्ष के छात्र थे, जो आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहे थे और मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल के रहने वाले थे।\n\n2. साहिल के परिजनों ने क्या आरोप लगाए हैं?\nपरिजनों ने आरोप लगाया है कि साहिल को संस्थान के भीतर जातिगत भेदभाव, गालियों और गंभीर मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाकर जान देने के लिए मजबूर किया गया।\n\n3. परिजनों ने आंदोलन के रूप में क्या कदम उठाया है?\nसाहिल के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोडे ने न्याय की मांग को लेकर मुंबई के आज़ाद मैदान में आमरण अनशन शुरू किया है।\n\n4. संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?\nबढ़ते विरोध के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के डीन पद से हटा दिया है।\n\n5. आईआईटी बॉम्बे की मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं पर इसका क्या असर पड़ा है?\nसंस्थान ने 26 और 27 सितंबर को होने वाली मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित कर 10 और 11 अक्टूबर के लिए पुनर्निर्धारित किया है।\n\n6. इस मामले की जांच वर्तमान में कौन सी एजेंसी कर रही है?\nछात्रों और संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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