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  "title": "देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किए नए लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियम",
  "summary": "परमाणु ऊर्जा विभाग ने नए मसौदा नियम जारी करके देश में न्यूक्लियर प्लांट के निर्माण, संचालन और लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने का खाका तैयार किया है।",
  "content": "देश में स्वच्छ और निरंतर बिजली आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग ने परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास कानून 2025 के अंतर्गत एक विस्तृत मसौदा तैयार किया है। इन नए नियमों का मुख्य ध्येय संयंत्रों के संचालन को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। इसके साथ ही किसी भी अप्रत्याशित परमाणु हादसे की स्थिति में पीड़ितों को वित्तीय मुआवजा और राहत सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी ढांचा निर्धारित किया जा रहा है।\n\nनागरिक दायित्व और वित्तीय सुरक्षा की समीक्षा\nनियमों के मसौदे में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार प्रत्येक पांच वर्ष में विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन करेगी। यह समिति परमाणु नुकसान के लिए संयंत्र संचालक के नागरिक दायित्व की अधिकतम वित्तीय सीमा का पुनर्मूल्यांकन करेगी। समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा होने से यह सुनिश्चित होगा कि मुद्रास्फीति और नए जोखिमों के अनुसार क्षतिपूर्ति की राशि हमेशा पर्याप्त रहे। इससे आम जनता और पर्यावरण की सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा और संचालकों पर भी वित्तीय अनुशासन बना रहेगा।\n\nविदेशी तकनीक और रिएक्टरों के लिए कड़े मानक\nभारत में उपयोग की जाने वाली विदेशी रिएक्टर तकनीक के संबंध में मसौदे में स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। यदि कोई परमाणु संयंत्र विदेशी डिजाइन पर आधारित है, तो उस डिजाइन को उसके मूल देश की नियामक संस्था से आधिकारिक मंजूरी मिलना अनिवार्य होगा। केवल स्वीकृत होना ही काफी नहीं होगा, बल्कि वह रिएक्टर मॉडल मूल देश में या किसी अन्य विदेशी राष्ट्र में पहले से सफलतापूर्वक चालू अवस्था में होना चाहिए। इस नियम का मकसद अप्रमाणित या प्रयोगात्मक तकनीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है ताकि देश में केवल वही तकनीक आए जो पहले से सुरक्षित साबित हो चुकी हो।\n\nप्रारंभिक मंजूरी की नई व्यवस्था\nपरमाणु परियोजनाओं में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया में एक व्यावहारिक बदलाव का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था के तहत सक्षम प्राधिकारी आवेदन स्वीकार करने के बाद आवेदक को सिद्धांत रूप में मंजूरी दे सकता है। खास बात यह है कि यह शुरुआती सैद्धांतिक स्वीकृति उस स्थिति में भी दी जा सकेगी जब संयंत्र के लिए अंतिम जगह या विशिष्ट तकनीक का चयन पूरी तरह न हुआ हो। इस मंजूरी के मिलते ही विकासकर्ता रिएक्टर तकनीक आपूर्ति करने वाली कंपनियों के साथ व्यावसायिक बातचीत आगे बढ़ा सकेगा और जमीन अधिग्रहण तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे का काम शुरू कर सकेगा।\n\nएकीकृत समग्र लाइसेंसिंग प्रणाली\nमसौदा नियमों की एक बड़ी विशेषता एकल खिड़की प्रणाली जैसी एकीकृत लाइसेंसिंग व्यवस्था है। अब किसी परमाणु संयंत्र के निर्माण, स्वामित्व, संचालन और अंततः उसके परित्याग अर्थात डिकमीशनिंग के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पूरी जीवन अवधि के लिए एक ही समग्र लाइसेंस जारी किया जाएगा। मसौदे में साफ कहा गया है कि इन विभिन्न चरणों के लिए अलग से कोई लाइसेंस न तो मांगा जाएगा और न ही दिया जाएगा। लाइसेंस को टुकड़ों में बांटने पर पूरी तरह रोक रहेगी, जिससे नौकरशाही की लालफीताशाही खत्म होगी और सुरक्षा निगरानी एक जगह केंद्रित रहेगी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ने से देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पावर ग्रिड अधिक स्थिर बनेगा।\n\nनागरिकों के लिए: नागरिक दायित्व की नियमित समीक्षा और सख्त सुरक्षा मानकों से परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में मुआवजा तथा जनता की सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शांति अधिनियम 2025 के तहत कौन से नियम जारी किए गए हैं?\nपरमाणु ऊर्जा विभाग ने परमाणु संयंत्रों के निर्माण, संचालन, विदेशी तकनीक की मंजूरी और नागरिक दायित्व की समीक्षा से जुड़े नए मसौदा नियम जारी किए हैं।\n\n2. विदेशी डिजाइन वाले रिएक्टरों के लिए क्या शर्त रखी गई है?\nविदेशी डिजाइन के रिएक्टर का अपने मूल देश के नियामक से स्वीकृत होना और वहां या किसी अन्य देश में पहले से चालू होना अनिवार्य है।\n\n3. परमाणु नुकसान के लिए नागरिक दायित्व की समीक्षा कब होगी?\nकेंद्र सरकार हर पांच साल में विशेषज्ञों का समूह गठित करेगी जो संचालक के नागरिक दायित्व की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा।\n\n4. क्या परमाणु प्लांट के विभिन्न चरणों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की जरूरत होगी?\nनहीं, नए नियमों के तहत संयंत्र के निर्माण, संचालन, स्वामित्व और परित्याग के लिए केवल एक ही समग्र लाइसेंस जारी किया जाएगा।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-15",
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    "शांति अधिनियम 2025",
    "न्यूक्लियर पावर प्लांट",
    "लाइसेंसिंग नियम",
    "सिविल लायबिलिटी"
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