# इंडियन बैंक की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लोन रिकवरी के बाद बची 3 करोड़ से अधिक की रकम वारिसों को वापस करने के निर्देश

> सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के लोन मामले में इंडियन बैंक को 2010 में नीलाम की गई संपत्तियों से बची 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त रकम कानूनी वारिसों को लौटाने का आदेश दिया है। अदालत ने केस को मनगढ़ंत बताते हुए जीवित बचे एकमात्र आरोपी बैंक मैनेजर को बरी कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/indian-bank-ki-manamani-para-supreme-court-sakhta-lona-rikavari-ke-bada-bachi-3-karora-se-adhika-ki-rakama-varison-ko-vapasa-karan-26777 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, इंडियन बैंक, अन्ना नगर, बैंक लोन घोटाला, लोन रिकवरी, संपत्ति नीलामी, चक्रवृद्धि ब्याज

35 साल पुराने बैंक ऋण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग प्रणाली की एक गंभीर लापरवाही को उजागर किया है। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद, मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के दौरान जान गंवा चुके दो आरोपियों के कानूनी वारिसों को 3 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 2010 में हुई नीलामी के बाद से इस रकम पर 15 वर्षों का चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ने के कारण अंतिम भुगतान राशि और भी अधिक हो सकती है।

## 1991 के लोन केस की पृष्ठभूमि और बैंक मैनेजर की बरीयत
यह पूरा मामला 1991 में दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा के तत्कालीन मैनेजर पर 13.5 लाख रुपये और 10 लाख रुपये के लोन पास करके खुद हड़पने का आरोप लगाया गया था। करीब साढ़े तीन दशकों तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान केस के दो मुख्य आरोपियों का निधन हो गया, जबकि केवल बैंक मैनेजर ही जीवित बचे थे। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मुकदमे को पूरी तरह मनगढ़ंत पाया और एकमात्र जीवित बचे आरोपी बैंक अधिकारी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

## 50 लाख की देनदारी के बदले 3.6 करोड़ की संपत्ति नीलामी
आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक चौंकाने वाला तथ्य आया। बैंक ने महज 50 लाख रुपये की कुल देनदारी वसूलने के लिए दोनों आरोपियों की संपत्तियों की 3.6 करोड़ रुपये में नीलामी कर दी थी। रिकवरी प्रक्रिया के तहत साल 2010 में पहली संपत्ति को नीलाम करके 1.2 करोड़ रुपये हासिल किए गए, जिनमें से 16.4 लाख रुपये लोन की मूल रकम और ब्याज में समायोजित किए गए। इसके बाद दूसरी संपत्ति की नीलामी से 2.8 करोड़ रुपये की राशि मिली, जिसमें से 40 लाख रुपये की देनदारी का निपटारा किया गया। इस प्रकार रिकवरी के बाद बैंक के पास 3 करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस पैसा बच गया था।

## सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और सरप्लस रकम का मामला
अदालत ने पाया कि लोन की पूरी रकम वसूल हो जाने के बावजूद बैंक ने अतिरिक्त बची हुई धनराशि आरोपियों के वैध वारिसों को कभी वापस नहीं की। बेंच ने कहा कि 1991-1992 में लिए गए लोन की रिकवरी के लिए 2010 में संपत्ति की नीलामी पूरी हो चुकी थी और बैंक को उसका पूरा बकाया मिल चुका था। सरकारी गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ कि नीलाम की गई रकम से बची अतिरिक्त राशि पिछले कई सालों से बैंक के पास ही जमा पड़ी है। पीठ ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि बैंक प्रशासन ने कानूनी वारिसों की तलाश करने या उन्हें यह पैसा सौंपने का कोई प्रयास नहीं किया।

## रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश और 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा के मैनेजर को निर्देश दिया है कि वे नीलामी से प्राप्त राशि के उपयोग के संपूर्ण रिकॉर्ड और लोन के बदले जमा कराए गए टाइटल डीड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। हालांकि आपराधिक केस का निपटारा हो चुका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर तय की है ताकि 15 साल के चक्रवृद्धि ब्याज के साथ पूरी सरप्लस रकम कानूनी वारिसों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।

## इसका आप पर असर
यह फैसला बैंक लोन रिकवरी और गिरवी संपत्तियों की नीलामी से जुड़े मामलों में खाताधारकों और उनके कानूनी वारिसों के अधिकारों को मजबूती प्रदान करता है।

- **देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए:** यदि बैंक कर्ज की वसूली के लिए आपकी गिरवी संपत्ति नीलाम करता है, तो कुल देनदारी चुकाने के बाद बची अतिरिक्त राशि पर केवल आपका या आपके वारिसों का अधिकार होता है। बैंक इस पैसे को अपने पास नहीं रोक सकता और देरी होने पर ब्याज समेत रिफंड का दावा किया जा सकता है।
- **कानूनी वारिसों के अधिकारों के संदर्भ में:** लोन लेने वाले व्यक्ति के निधन के बाद भी बैंक उसकी संपत्ति नीलाम करके मिले सरप्लस पैसे को खुद नहीं रख सकता। परिजनों को बैंक से नीलामी और रिकवरी का पूरा हिसाब मांगने का स्पष्ट अधिकार है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन बैंक मामले में क्या मुख्य आदेश दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन बैंक को 2010 में नीलाम की गई संपत्तियों से बची 3 करोड़ रुपये से अधिक की सरप्लस रकम मृत आरोपियों के कानूनी वारिसों को लौटाने का निर्देश दिया है।

### 2. यह मामला किस वर्ष और किस बैंक शाखा से जुड़ा हुआ है?
यह मामला 1991 में इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा में दर्ज हुई एफआईआर और लोन रिकवरी से जुड़ा है।

### 3. बैंक ने कितनी देनदारी के लिए कितने की संपत्ति नीलाम की थी?
बैंक ने करीब 50 लाख रुपये की कुल देनदारी वसूलने के लिए दो आरोपियों की 3.6 करोड़ रुपये की संपत्ति नीलाम की थी।

### 4. अदालत ने आरोपी बैंक मैनेजर के बारे में क्या फैसला सुनाया?
जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने आपराधिक मामले को मनगढ़ंत बताते हुए जीवित बचे एकमात्र आरोपी बैंक मैनेजर को बरी कर दिया।

### 5. मामले की अगली सुनवाई कब तय की गई है?
सुप्रीम कोर्ट ने नीलामी के रिकॉर्ड और सरप्लस रकम कानूनी वारिसों को सौंपने की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए अगली सुनवाई 5 अक्टूबर तय की है।

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