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  "title": "इस्तीफा देने वालीं आईएएस दिव्या मित्तल ने गिनाए वो 9 सबक, जो स्कूल-कॉलेज कभी नहीं सिखाते",
  "summary": "आईआईटी दिल्ली, आईआईएम बैंगलोर और यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाएं पार करने वालीं आईएएस अफसर दिव्या मित्तल का पुराना पोस्ट शिक्षक दिवस 2026 पर फिर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने बताया कि डिग्रियों ने उन्हें जिंदगी के 9 सबसे जरूरी सबक कभी नहीं सिखाए.",
  "content": "आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग, आईआईएम बैंगलोर से मैनेजमेंट की पढ़ाई और फिर देश की सबसे मुश्किल परीक्षा यूपीएससी पास करके सरकारी अफसर बनना, यह सफर किसी को भी सबसे कामयाब इंसानों की फेहरिस्त में खड़ा कर देता है. लेकिन इसी सफर से गुजर चुकीं आईएएस अफसर दिव्या मित्तल कहती हैं कि इतनी बड़ी डिग्रियों के बावजूद जिंदगी के कुछ सबसे जरूरी सबक उन्हें कभी क्लासरूम में नहीं मिले. शिक्षक दिवस 2026 के मौके पर उनका पुराना सोशल मीडिया पोस्ट एक बार फिर लोगों के बीच जमकर शेयर हो रहा है.\n\nदिव्या मित्तल इन दिनों दो वजहों से सुर्खियों में हैं. पहला, उन्होंने हाल ही में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया. दूसरा, उनका एक पुराना पोस्ट अब वायरल हो गया है, जिसमें उन्होंने अपनी पढ़ाई की सबसे बड़ी कमी की तरफ इशारा किया है. दिव्या सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं और उनकी बातें अक्सर लोगों को खूब पसंद आती हैं.\n\n \n\nकठिन परीक्षाएं पास कीं, पर मन को संभालना नहीं सीखा\nदिव्या मित्तल ने अपने पुराने पोस्ट में लिखा था, \"It never taught me how to quiet my own mind or handle loneliness.\" यानी उनकी पढ़ाई ने उन्हें बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां संभालना तो सिखाया, लेकिन अपने मन को शांत रखना या अकेलेपन से निपटना नहीं सिखाया. उनके मुताबिक हम सालों तक सिर्फ हासिल करने की ट्रेनिंग लेते रहते हैं, लेकिन अंदर से खुश और संतुलित कैसे रहा जाए, इसके लिए एक दिन भी अलग से खर्च नहीं किया जाता.\n\nभावनाओं को दबाना सिखाया, समझना नहीं\nदिव्या के मुताबिक स्कूलों में शांत बैठे रहने को ही अच्छे बर्ताव और अनुशासन की निशानी मान लिया जाता है. बच्चे केमिस्ट्री की पीरियॉडिक टेबल तो जुबानी याद कर लेते हैं, लेकिन दिल टूटने पर अंदर क्या रासायनिक प्रतिक्रिया चलती है, यह कोई नहीं समझाता. भावनाओं को जताने की बजाय उन्हें दबाना सिखाया जाता है. इसी का नतीजा यह होता है कि उम्र बढ़ने के साथ जब जिंदगी में कोई बड़ी मुश्किल आती है, तो लोग खुद को संभाल नहीं पाते और बिखर जाते हैं.\n\nना कहना और अपनी सीमाएं तय करना कोई नहीं सिखाता\nस्कूली दिनों में लंबे-लंबे निबंध लिखने का अभ्यास खूब कराया जाता है, मगर किसी बात पर साफ इनकार करना या अपनी तकलीफ को शब्दों में बयां करना कभी नहीं सिखाया जाता. दिव्या का कहना है कि नौकरी में जब बॉस बदतमीजी करता है या कोई सहकर्मी परेशान करता है, तो उससे कैसे निपटा जाए और अपनी सीमाएं कैसे खींची जाएं, इसकी कोई ट्रेनिंग किसी संस्थान में नहीं दी जाती.\n\nरटे-रटाए जवाब नहीं, सही सवाल पूछना जरूरी\nक्लासरूम में हमेशा उसी बच्चे की तारीफ होती है जिसके पास हर सवाल का पहले से तैयार जवाब मौजूद हो. लेकिन असल दुनिया में वही आगे निकलता है जो सही वक्त पर सही सवाल उठाना जानता है. दिव्या बताती हैं कि बिना सवाल किए हर बात मान लेने की यही आदत आगे चलकर लोगों को बिना सोचे-समझे दूसरों की राय अपनाने पर मजबूर कर देती है.\n\nपैसे की समझ और कर्ज से बचना सिलेबस में नहीं\nगणित की क्लास में एक्स की वैल्यू निकालने वाले समीकरण खूब हल कराए जाते हैं, लेकिन खुद को कर्ज के जाल में फंसने से कैसे बचाया जाए, यह किसी किताब में नहीं होता. दिव्या के मुताबिक पैसों की सही समझ सिर्फ ज्यादा कमाई से नहीं आती, बल्कि फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने और पैसों को लेकर मानसिक शांति बनाए रखने से आती है, और यह विषय स्कूली पाठ्यक्रम में कहीं शामिल ही नहीं है.\n\nखुद से किया वादा ही असली अनुशासन है\nस्कूल की पूरी व्यवस्था टाइमटेबल पर टिकी होती है, जहां हर वक्त कोई न कोई बता देता है कि अभी क्या करना है. लेकिन बड़े होकर जब कोई निगरानी करने वाला नहीं होता, तब ज्यादातर लोग रास्ता भटक जाते हैं. दिव्या का मानना है कि असली अनुशासन किसी के डर से नहीं आता, बल्कि खुद से किए गए वादों को निभाने से आता है.\n\nअकेलापन सजा नहीं, खुद को जानने का मौका है\nस्कूल के दिनों में इंसान हमेशा दोस्तों के झुंड से घिरा रहता है, इसलिए बड़े होकर जब जिंदगी में अचानक सन्नाटा आता है, तो वह डरा देता है. दिव्या कहती हैं कि स्कूल ने कभी नहीं सिखाया कि खुद का सबसे अच्छा दोस्त कैसे बना जाए, जबकि अकेला होना उदासी की निशानी नहीं, बल्कि खुद से जुड़ने का सबसे कीमती मौका होता है.\n\nलोगों के असली इरादे पहचानने की सीख भी गायब\nबचपन की दोस्तियां बेहद मासूम और बेलौस होती हैं, लेकिन बड़े होते ही दुनिया पूरी तरह बदल जाती है. स्कूल कभी यह नहीं सिखाता कि किसी के व्यवहार के पीछे छिपे असली इरादों और उसके नकाब को कैसे पहचाना जाए. यही वजह है कि बड़े होकर बहुत से लोग रिश्तों में खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं.\n\nशरीर के लिए पीटी, मन के लिए कुछ नहीं\nस्कूल में शरीर को फिट रखने के लिए पीटी और खेल की क्लासें तो होती हैं, लेकिन मन और आत्मा की सेहत के लिए कुछ भी नहीं पढ़ाया जाता. यही वजह है कि लोग थकने के बावजूद खुद को धकेलते रहना सीख लेते हैं, जो आगे चलकर बर्नआउट की स्थिति तक पहुंचा देता है. दिव्या के मुताबिक यह पहचानना बेहद जरूरी है कि तनाव कब हद से बाहर जा रहा है और कब मदद मांगने की जरूरत है.\n\nमेडल और डिग्री से परे खुद को पहचानना ही असली शिक्षा\nदिव्या मित्तल के मुताबिक हम पूरी जिंदगी सिर्फ टॉपर या अव्वल बनने की होड़ में दौड़ते रहते हैं, लेकिन बिना किसी मेडल या डिग्री के हम असल में कौन हैं, यह जानने की कोशिश ही नहीं करते. उनका कहना है कि दुनिया के बताए हुए रास्तों पर आंख मूंदकर चलने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हमारे अपने मन को असल में क्या चाहिए, और यही सबसे बड़ी सीख है जो किसी किताब में नहीं मिलती.\n\nइसका आप पर असर\nयह पोस्ट सीधे तौर पर पैसे या नियमों से नहीं जुड़ा, लेकिन यह पैरेंटिंग, पढ़ाई और मेंटल हेल्थ को लेकर सोच बदलने वाला है.\n\n• छात्रों और युवाओं के लिए: सिर्फ मार्क्स और डिग्री ही करियर की गारंटी नहीं हैं. भावनाओं को समझना, सवाल पूछना और पैसों की समझ जैसी स्किल्स खुद से सीखनी होंगी.\n• पैरेंट्स के लिए: बच्चों को सिर्फ पढ़ाई में टॉप कराने की बजाय ना कहना, बजट बनाना और अकेलेपन से निपटना भी सिखाना जरूरी है. इससे आगे चलकर बर्नआउट और तनाव का खतरा घटता है.\n• वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए: ऑफिस में बॉस की बदतमीजी या दबाव झेलते वक्त अपनी सीमाएं तय करना सीखना जरूरी बताया गया है. यह मेंटल हेल्थ बनाए रखने में सीधे मदद करता है.\n• यूपीएससी और परीक्षार्थियों के लिए: बड़ी परीक्षा पास करना ही सफलता की पूरी कहानी नहीं है. मन की शांति और आत्म-पहचान पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिव्या मित्तल कौन हैं?\nदिव्या मित्तल एक आईएएस अफसर हैं जिन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक, आईआईएम बैंगलोर से एमबीए किया और फिर यूपीएससी पास कर प्रशासनिक सेवा में गईं.\n\n2. उनका पोस्ट अभी वायरल क्यों हो रहा है?\nशिक्षक दिवस 2026 के मौके पर उनका पुराना सोशल मीडिया पोस्ट फिर से लोगों के बीच शेयर होने लगा है.\n\n3. दिव्या मित्तल ने कब इस्तीफा दिया?\nउन्होंने हाल ही में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया, हालांकि इसकी सही तारीख या वजह लेख में नहीं बताई गई है.\n\n4. उन्होंने कुल कितने सबक गिनाए हैं?\nउन्होंने अपनी पढ़ाई में मिसिंग रहीं 9 अहम बातों का जिक्र किया है.\n\n5. उनके मुताबिक स्कूल-कॉलेज में सबसे बड़ी कमी क्या है?\nउनके मुताबिक स्कूल-कॉलेज सिर्फ एग्जाम पास करना और उपलब्धियां हासिल करना सिखाते हैं, लेकिन मन को शांत रखना, भावनाओं को समझना और खुद को जानना नहीं सिखाते.\n\nप्रेरणा और सबक\nदिव्या मित्तल की यह पोस्ट सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि खुद के अनुभव से निकाले गए सबकों की फेहरिस्त है, जिनसे कोई भी सीख ले सकता है.\n\n• डिग्री ही सब कुछ नहीं: सबसे बड़ी उपलब्धियों के बाद भी खुद से ईमानदार रहकर यह मानना कि कुछ जरूरी चीजें अब भी नहीं सीखी गईं, यह बड़ी हिम्मत की बात है.\n• भावनाओं को पहचानना जरूरी: सफलता की दौड़ में भावनाओं को दबाने की बजाय उन्हें समझना और प्रोसेस करना सीखना चाहिए.\n• सवाल पूछने की आदत डालें: हर बात को बिना सोचे मान लेने के बजाय सही सवाल पूछने की आदत डालने से खुद की सोच मजबूत होती है.\n• खुद से किया वादा निभाएं: असली अनुशासन बाहरी निगरानी से नहीं, बल्कि खुद से किए वादे पूरे करने से आता है.\n• अकेलेपन को मौका समझें: अकेला समय बिताना उदासी नहीं, बल्कि खुद को बेहतर तरीके से जानने का जरिया है.",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-05",
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