जब IPS MN दिनेश ने चंबल के खूंखार डकैत सूरज माली के एनकाउंटर से पहले मांगी थी मन्नत, फिर ऐसे पूरी हुई थी मुराद करौली में डकैतों के सफाए का दौर किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं रहा है। एक खतरनाक डकैत के एनकाउंटर से जुड़ी आईपीएस अधिकारी एम.एन. दिनेश की यह पुरानी घटना आज भी लोगों की जुबान पर है। राजस्थान के चंबल अंचल और करौली के बीहड़ कभी कुख्यात अपराधियों की शरणस्थली माने जाते थे। इन इलाकों में खाकी का खौफ कायम करने वाले अधिकारियों के किस्से आज भी क्षेत्र में याद किए जाते हैं। इन्हीं दबंग अफसरों में शुमार रहे एम.एन. दिनेश का नाम आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उनके कार्यकाल के दौरान अपराधियों के खिलाफ छेड़े गए अभियानों की चर्चा जोरों पर रहती थी। उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कैलादेवी धाम की महिमा का दायरा केवल आम जनता तक सीमित नहीं था। किवंदंतियों के अनुसार उस दौर के खूंखार अपराधी भी इस दरबार में माथा टेकने पहुंचते थे। अपनी मुराद पूरी होने पर मंदिरों में विशाल घंटे अर्पित करने की परंपरा भी उन दिनों काफी प्रचलित थी। इसी धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने के बीच कानून और अपराध के टकराव की कई अनसुनी कहानियां आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। डकैतों के गढ़ में खाकी का अभियान करौली जिले में एक समय अपराधियों का दबदबा इस हद तक बढ़ चुका था कि आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। बीहड़ों की भूलभुलैया में छिपकर वार करने वाले गिरोहों का खात्मा करना स्थानीय प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका था। स्थानीय स्तर पर पुलिस महकमे में सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी राजेंद्र सिंह बताते हैं कि उस दौर की चुनौतियां वर्तमान समय से काफी अलग थीं। उनके अनुसार कई कुख्यात अपराधी अपनी हरकतों के बावजूद धार्मिक मान्यताओं से जुड़े रहते थे और मौका मिलते ही मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचते थे। इन सभी धार्मिक स्थलों में कैलादेवी मंदिर का प्रांगण अपराधियों और पुलिसकर्मियों दोनों के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ था। कानून के रखवाले जहां अपनी सफलता के लिए आशीर्वाद मांगते थे, वहीं अपराधी अपने सुरक्षित बचने की मन्नतें करते थे। सूरज माली के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई वर्ष 2001 के आसपास कुड़गांव थाने में सिपाही के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे राजेंद्र सिंह ने उस दौर के कई अहम घटनाक्रमों को करीब से देखा था। उस समय करौली के पुलिस अधीक्षक के रूप में कमान संभाल रहे एम.एन. दिनेश ने अपनी विलक्षण कार्यशैली का परिचय दिया था। उनकी रणनीति और मुखबिर तंत्र के बल पर पुलिस ने इलाके में आतंक का पर्याय बन चुके सूरज माली को घेरने में सफलता हासिल की थी। एक सुनियोजित मुठभेड़ के दौरान इस कुख्यात अपराधी का अंत कर दिया गया था। इस बड़ी सफलता से पहले पुलिस अधीक्षक ने मां के दरबार में विशेष मन्नत मांगी थी। एनकाउंटर की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद उन्होंने अपनी मान्यता को पूरा करने का संकल्प लिया था। पुलिस बल के साथ ऐतिहासिक पदयात्रा लक्ष्य पूरा होने के बाद प्रशासनिक अमले और पुलिस महकमे ने मिलकर अपनी इस आस्था को जमीन पर उतारा। पुलिस अधीक्षक एम.एन. दिनेश ने अपने सैकड़ों मातहतों के साथ करौली से लेकर कैलादेवी मंदिर तक पैदल यात्रा करने का निर्णय लिया। इस लंबी पदयात्रा में करीब 250 से 300 पुलिस जवान उनके साथ कतारबद्ध होकर शामिल हुए थे। बीहड़ और ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाले इस पुलिस काफिले को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों के किनारे एकत्र हुए थे। रास्ते भर ग्रामीणों ने फूल बरसाकर और पानी पिलाकर इस अनोखी पदयात्रा का जोरदार स्वागत किया था। इस अभियान के बाद से क्षेत्र के अन्य गिरोहों का मनोबल पूरी तरह टूट गया था और लोगों ने राहत की सांस ली थी। आतंक के खासे दौर का अंत करौली के वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार सुरेंद्र चतुर्वेदी का मानना है कि एम.एन. दिनेश अपनी निडर और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। उनके नेतृत्व में पुलिस ने एक के बाद एक कई बड़े अभियानों को अंजाम दिया जिससे बीहड़ के सरगनाओं का खौफ कम होता चला गया। सूरज माली का गिरोह उस समय अपने चरम पर था और उसकी गतिविधियों से पूरा इलाका थरथराता था। अपनी जान की सलामती के लिए वह भी कैलादेवी धाम में अर्जी लगाया करता था। जब पुलिस अधीक्षक को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने भी अपनी रणनीति तेज करते हुए उसी दरबार में न्याय की गुहार लगाई। आखिरकार पुलिस की गोली का शिकार बनकर उस अध्याय का अंत हो गया और उसके बाद पूरी की गई वह पदयात्रा आज भी स्थानीय लोगों की स्मृति में जीवंत बनी हुई है। इसका आप पर असर यह ऐतिहासिक वृत्तांत कानून व्यवस्था और स्थानीय इतिहास से जुड़ा है, जिसका सीधा असर वर्तमान रोजमर्रा की जिंदगी पर नहीं पड़ता है। • भारत में: यह घटना दिखाती है कि किस प्रकार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षा बल के अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। इससे आम नागरिकों का प्रशासनिक तंत्र और पुलिस की कार्यक्षमता में विश्वास मजबूत होता है। • करौली में: स्थानीय निवासियों के लिए यह क्षेत्र के पुराने दौर और अपराधियों के खासे आतंक से मुक्ति पाने के इतिहास की याद दिलाता है। वर्तमान में क्षेत्र के लोग पूरी तरह सुरक्षित माहौल में शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ इस ऐतिहासिक घटना के पीछे का मुख्य कारण बीहड़ों में फैला आपराधिक आतंक और पुलिस प्रशासन की जवाबी रणनीति थी। • डकैतों का वर्चस्व: करौली और चंबल के इलाकों में आपराधिक गिरोहों की सक्रियता के कारण कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था। • रणनीतिक अभियान: तत्कालीन पुलिस नेतृत्व द्वारा खुफिया तंत्र को मजबूत कर अपराधियों के ठिकानों पर लगातार दबिश दी गई। • व्यक्तिगत मान्यता: कठिन अभियानों की सफलता के लिए सुरक्षा अधिकारियों और अपराधियों दोनों का स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से गहरा जुड़ाव था। सवाल-जवाब 1. एम.एन. दिनेश किस पद पर तैनात थे? एम.एन. दिनेश करौली जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। 2. किस डकैत के खिलाफ मुठभेड़ की गई थी? पुलिस ने कुख्यात डकैत सूरज माली के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई की थी। 3. पदयात्रा में कितने पुलिस जवान शामिल हुए थे? इस पदयात्रा में लगभग 250 से 300 पुलिस जवान शामिल हुए थे। 4. यह घटना किस वर्ष के आसपास की है? यह घटना वर्ष 2001 के आसपास की है जब राजेंद्र सिंह कुड़गांव थाने में तैनात थे। https://trendkia.com/national/jaba-ips-mn-dinesh-ne-chnbala-ke-khunkhara-dakaita-suraj-mali-ke-enakauntara-se-pahale-mangi-thi-mannata-phira-aise-puri-hui-thi-m-29568 TrendKia — Har trend, sabse pehle.