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  "type": "article",
  "title": "जैश का यह कमांडर मुजफ्फराबाद में चला रहा ट्रेनिंग कैंप, नगरोटा हमले की साजिश में भी था शामिल",
  "summary": "भारतीय गृह मंत्रालय ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मुफ्ती मोहम्मद असगर खान का चेहरा बेनकाब किया है, जो नगरोटा हमले का मुख्य साजिशकर्ता है और PoK के मुजफ्फराबाद में आतंकी ट्रेनिंग कैंप चला रहा है। मंत्रालय ने उसके साथ 23 अन्य आतंकियों के नाम भी उजागर किए हैं।",
  "content": "जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी साजिशें रचने वाले एक कुख्यात आतंकी का चेहरा बेनकाब किया है, जिसकी पहचान मुफ्ती मोहम्मद असगर खान के रूप में हुई है। यही वह शख्स है, जिसने जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले की साजिश रची थी और अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में बैठकर आतंकी ट्रेनिंग कैंप चला रहा है। आतंक की दुनिया में उसे अबू साद और साद जिमी के नाम से भी जाना जाता है।\n\nकौन है मुफ्ती मोहम्मद असगर खान\nसुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक असगर खान प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय सदस्य है और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहकर संगठन के लिए काम करता है। वह वहां जैश-ए-मोहम्मद का अमीर होने के साथ-साथ संगठन के टेरर विंग का चीफ भी है, यानी संगठन के भीतर उसकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। एजेंसियों का कहना है कि नए लड़ाकों की भर्ती करने, उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने और भारत के खिलाफ नई-नई साजिशें रचने में उसकी सीधी भूमिका रही है। जांच में यह भी पता चला है कि वह मुजफ्फराबाद में एक आतंकी प्रशिक्षण कैंप भी संचालित करता है, जहां नए भर्ती हुए लड़ाकों को तैयार किया जाता है।\n\nPoK के कैंपों में क्या सिखाया जाता है\nसुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, असगर खान जैसे कमांडरों के संरक्षण में चल रहे इन कैंपों में आतंकियों को सिर्फ कट्टरपंथी विचारधारा ही नहीं घोंटी जाती, बल्कि उन्हें हथियार चलाने, विस्फोटक तैयार करने और सीमा पार कर भारत में घुसपैठ करने की बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाती है। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं कैंपों से निकलने वाले आतंकियों को बाद में भारत में बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए भेजा जाता रहा है, जिससे यह साफ होता है कि सीमा पार आतंकी ढांचा किस तरह से सुनियोजित तरीके से काम करता है।\n\nनगरोटा हमले की साजिश में सीधी भूमिका\nमुफ्ती मोहम्मद असगर खान का नाम जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शुमार है। जांच एजेंसियों के मुताबिक उसने इस हमले की योजना बनाने से लेकर हमलावर आतंकियों को हर तरह की मदद पहुंचाने तक में अहम भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि वह लंबे अरसे से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर बना हुआ है। खुफिया एजेंसियों का यह भी कहना है कि असगर खान सिर्फ हमलों की साजिश रचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को मजबूत बनाने के साथ-साथ संगठन को आर्थिक मदद पहुंचाने का काम भी करता है, जिससे संगठन की जड़ें और गहरी होती जा रही हैं।\n\nगृह मंत्रालय ने खोले 23 आतंकियों के नाम\nगृह मंत्रालय ने साफ किया है कि आतंकवाद को लेकर उसकी नीति जीरो टॉलरेंस की है और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सीमा पार से सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर नजर रखे हुए हैं। इसी नीति के तहत इन आतंकी संगठनों को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मंत्रालय ने ऐसे आतंकियों की पहचान सार्वजनिक करनी शुरू की है। मुफ्ती मोहम्मद असगर खान के साथ ही मंत्रालय ने कुल 23 अन्य आतंकियों के नाम और चेहरे भी उजागर किए हैं। इस सूची में मसूद इलियास कश्मीरी और मोहम्मद मुसादिक के नाम भी शामिल हैं, जिनका आतंकी रिकॉर्ड भी कम खतरनाक नहीं है।\n\nमसूद इलियास कश्मीरी और मोहम्मद मुसादिक कौन हैं\nमसूद इलियास कश्मीरी वही आतंकी है, जिसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान इलाके में पीडीपी कार्यालय के पास तैनात नाका पार्टी पर हमला किया था। वहीं मोहम्मद मुसादिक को लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर बताया गया है, जो सीमा पर बनी सुरंगों के जरिए आतंकियों की घुसपैठ कराता रहा है। एजेंसियों के मुताबिक वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में भी शामिल रहा है। इतना ही नहीं, मोहम्मद मुसादिक अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि मंदिर परिसर, नागपुर में आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आईओसीएल रिफाइनरी जैसी संवेदनशील जगहों की रेकी करने में भी संलिप्त रहा है, जो दिखाता है कि आतंकी संगठन कितने बड़े स्तर पर भारत में हमलों की योजना बना रहे थे।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे तौर पर आम आदमी की जेब से नहीं जुड़ी है, लेकिन देश की सुरक्षा और सतर्कता के लिहाज से अहम है।\n\n• भारत में: गृह मंत्रालय द्वारा आतंकियों के चेहरे सार्वजनिक करने से सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पार सक्रिय नेटवर्क पर नजर रखने और घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी।\n• अयोध्या, नागपुर और पानीपत में: रामजन्मभूमि मंदिर परिसर, आरएसएस मुख्यालय और आईओसीएल रिफाइनरी जैसी संवेदनशील जगहों की रेकी सामने आने के बाद इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी बढ़ाई जा सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुफ्ती मोहम्मद असगर खान कौन है?\nवह पाकिस्तान में रहने वाला जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी है, जो PoK में संगठन का अमीर और टेरर विंग का चीफ है और नगरोटा हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है।\n\n2. असगर खान को और किन नामों से जाना जाता है?\nआतंक की दुनिया में उसे अबू साद और साद जिमी के नाम से भी जाना जाता है।\n\n3. असगर खान का ट्रेनिंग कैंप कहां है?\nवह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में आतंकी प्रशिक्षण कैंप चलाता है।\n\n4. नगरोटा हमले में असगर खान की क्या भूमिका थी?\nजांच एजेंसियों के मुताबिक उसने जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले की साजिश रचने और हमलावरों को मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।\n\n5. गृह मंत्रालय ने कुल कितने आतंकियों के नाम उजागर किए हैं?\nगृह मंत्रालय ने मुफ्ती मोहम्मद असगर खान के साथ 23 अन्य आतंकियों के नाम और चेहरे सार्वजनिक किए हैं।\n\n6. मसूद इलियास कश्मीरी ने कौन सा हमला किया था?\nउसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान इलाके में पीडीपी कार्यालय के पास तैनात नाका पार्टी पर हमला किया था।\n\n7. मोहम्मद मुसादिक की भूमिका क्या रही है?\nवह लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर है, जो सुरंगों के जरिए घुसपैठ कराता है, ड्रोन से हथियार भेजता है और अयोध्या, नागपुर व पानीपत जैसी जगहों की रेकी में भी शामिल रहा है।\n\n8. इन कैंपों में आतंकियों को क्या ट्रेनिंग दी जाती है?\nकैंपों में कट्टरपंथी विचारधारा के साथ हथियार चलाने, विस्फोटक इस्तेमाल करने और सीमा पार घुसपैठ की ट्रेनिंग दी जाती है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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