जम्मू से कामकाज शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने दरबार मूव की वापसी पर रखी बात जम्मू-कश्मीर में 154 साल पुरानी दरबार मूव व्यवस्था के तहत प्रशासन का काम जम्मू से शुरू हो गया है, जिसे विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बताया। जम्मू-कश्मीर प्रशासन का कामकाज सोमवार से औपचारिक तौर पर जम्मू से संचालित होने लगा है। द्विवार्षिक राजधानी स्थानांतरण की ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत सचिवालय और अन्य मुख्य प्रशासनिक कार्यालय श्रीनगर से स्थानांतरित होकर शीतकालीन राजधानी पहुंच चुके हैं। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने 2 नवंबर को स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 में इस व्यवस्था को बहाल करने का कदम आम जनता की भावनाओं और प्राथमिकताओं को प्राथमिकता देकर उठाया गया था। 1872 में डोगरा शासकों द्वारा शुरू हुई ऐतिहासिक व्यवस्था प्रशासनिक तंत्र को छह-छह महीने के अंतराल पर दो राजधानियों के बीच स्थानांतरित करने का सिलसिला 154 साल पुराना है। डोगरा शासकों ने 1872 में इस द्विवार्षिक परिपाटी की नींव रखी थी, जिसके तहत गर्मियों के दौरान सरकार श्रीनगर से और सर्दियों के महीनों में जम्मू से संचालित की जाती रही है। वर्ष 2021 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में बनी सरकार ने इस परंपरा को दोबारा बहाल करने का फैसला किया। जनता की आकांक्षाओं और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि कुछ समय के लिए इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था, मगर पिछले साल इसे फिर से चालू कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि प्रशासन ने कश्मीर घाटी में पूरे छह महीने तक जनता की सेवा की है और अब आने वाले छह महीने के दौरान जम्मू संभाग के नागरिकों के लिए भी इसी निष्ठा के साथ काम किया जाएगा। उनके अनुसार, यह व्यवस्था दशकों से दोनों संभागों के नागरिकों की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करती आई है और आगे भी इसी तरह काम करती रहेगी। चार दशकों का विधायी अनुभव और आगामी बजट सत्र अब्दुल रहीम राथर ने अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित बजट सत्र के व्यवस्थित संचालन को लेकर भी पूरा भरोसा जताया। अपने चार दशकों के लंबे संसदीय और विधायी अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही का संचालन उनके लिए कोई कठिन कार्य नहीं है। पिछले बजट सत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उस दौरान विपक्ष सहित सदन में मौजूद सभी राजनीतिक दलों के विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याओं और विचारों को खुलकर रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। उस समय लगभग सभी सदस्यों ने कार्यवाही के संचालन पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया था। मंत्रिमंडल में नए चेहरों का समावेश सरकार में चार नए मंत्रियों को शामिल किए जाने के सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी उम्मीदें साझा कीं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल हुए नए और अनुभवी मंत्रियों से यह आशा की जाती है कि वे आम जनता की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं और अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरेंगे तथा जनहित के कार्यों को गति देंगे। इसका आप पर असर जम्मू-कश्मीर की द्विवार्षिक राजधानी व्यवस्था के तहत कामकाज जम्मू स्थानांतरित होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नागरिक सेवाओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। • भारत में: केंद्र शासित प्रदेश के दोनों संभागों के बीच प्रशासनिक संतुलन और ऐतिहासिक व्यवस्थाओं की निरंतरता का राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत महत्व रहता है। इससे सीमावर्ती प्रदेश में शासन की संवेदनशीलता और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं का संदेश जाता है। • जम्मू और कश्मीर में: सचिवालय और प्रमुख निदेशालयों के जम्मू पहुंचने से स्थानीय नागरिकों को अपने नीतिगत और उच्च-स्तरीय प्रशासनिक कार्यों के लिए श्रीनगर नहीं जाना पड़ेगा। अगले छह महीनों तक जम्मू संभाग के आम लोग अपने क्षेत्रीय मुद्दों और आधिकारिक स्वीकृतियों के लिए राजधानी के दफ्तरों से सीधे संपर्क कर सकेंगे। • बजट और विधायी प्रक्रियाओं पर: नए साल की शुरुआत में होने वाले बजट सत्र के दौरान सभी दलों के चुने हुए प्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाने का मौका मिलेगा। सदन के सुचारू संचालन से जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के आवंटन में तेजी आएगी। • मंत्रालयी प्राथमिकताओं पर: मंत्रिमंडल में शामिल चार नए मंत्रियों के विभागों से जुड़े नीतिगत फैसले अब जम्मू सचिवालय से लागू होंगे। नागरिकों को अपने दैनिक काम और शिकायतों के निवारण के लिए नए मंत्रियों की प्राथमिकताओं पर नजर रखनी होगी। ऐसा क्यों हुआ दरबार मूव की यह व्यवस्था मौसमी बदलावों और दोनों क्षेत्रों के नागरिकों के बीच प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से शुरू हुई थी, जिसे हाल ही में राजनीतिक और जन आकांक्षाओं के आधार पर बहाल किया गया है। • ऐतिहासिक और मौसमी कारण: 1872 में डोगरा शासकों ने कश्मीर घाटी की कठोर सर्दियों और जम्मू की गर्मियों से निपटने के लिए इस द्विवार्षिक स्थानांतरण की शुरुआत की थी। इसके जरिए प्रशासन पूरे वर्ष दोनों भौगोलिक क्षेत्रों से सुगमता से कार्य कर पाता था। • प्रशासनिक रोक और पुनर्बहाली: 2021 में उपराज्यपाल प्रशासन ने इस परिपाटी को रोक दिया था, जिससे सरकारी दफ्तरों का नियमित स्थानांतरण थम गया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उमर अब्दुल्ला सरकार ने जनता की मांग को ध्यान में रखकर इस 154 साल पुरानी परंपरा को फिर से शुरू किया। • क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की आवश्यकता: विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के अनुसार, जनता दोनों संभागों में सरकार की प्रत्यक्ष उपस्थिति चाहती थी। छह महीने श्रीनगर और छह महीने जम्मू से शासन चलाने से दोनों क्षेत्रों के लोगों की प्रशासनिक भागीदारी सुनिश्चित होती है। सवाल-जवाब 1. दरबार मूव की शुरुआत कब और किसने की थी? दरबार मूव की शुरुआत 1872 में डोगरा शासकों ने की थी, जो 154 साल पुरानी परंपरा है। 2. यह परंपरा किस तरह काम करती है? इसके तहत जम्मू-कश्मीर सरकार अपनी राजधानी और प्रशासनिक कार्यालयों को छह-छह महीने के लिए श्रीनगर और जम्मू के बीच स्थानांतरित करती है। 3. दरबार मूव को कब रोका गया था और यह दोबारा कब बहाल हुआ? उपराज्यपाल प्रशासन ने इसे 2021 में रोक दिया था, जिसके बाद अक्टूबर 2025 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे फिर से बहाल किया। 4. विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने इस फैसले पर क्या कहा? राथर ने कहा कि दरबार मूव को बहाल करने का निर्णय जनता की इच्छाओं और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 5. आगामी बजट सत्र को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने क्या भरोसा जताया? चार दशकों का विधायी अनुभव रखने वाले राथर ने विश्वास जताया कि आगामी बजट सत्र सुचारू रूप से संचालित होगा, जैसा कि पिछले सत्र में सभी दलों को बोलने का अवसर मिला था। 6. सरकार में शामिल चार नए मंत्रियों को लेकर क्या उम्मीद जताई गई? विधानसभा अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि नए और अनुभवी मंत्री जनता की आकांक्षाओं और जनहित के अनुरूप जिम्मेदारी निभाएंगे। https://trendkia.com/national/jammu-se-kamakaja-shuru-hote-hi-vidhanasabha-adhyaksha-abdul-rahim-rather-ne-darabara-muva-ki-vapasi-para-rakhi-bata-54997 TrendKia — Har trend, sabse pehle.