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  "title": "जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में एफआईआर रद्द करने के आदेश पर फिर से सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सीजेआई बोले- छात्रों का भविष्य अहम",
  "summary": "सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए सीजेपी प्रदर्शन की एफआईआर रद्द करने के खिलाफ दायर नई याचिका खारिज कर दी है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को अदालतों के चक्कर में नहीं उलझाना चाहते।",
  "content": "देश की शीर्ष अदालत ने नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर जुलाई महीने में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को निरस्त करने के अपने पूर्व आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से स्पष्ट मना कर दिया है। अदालत में दाखिल इस याचिका के जरिए प्रदर्शन के सिलसिले में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष और नए सिरे से जांच कराने का अनुरोध किया गया था। सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद मानवीय और संवेदनशील रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि मामले में शामिल अधिकतर लोग युवा छात्र हैं, जिनके पूरे भविष्य और माता-पिता के सरोकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि छात्रों को बार-बार कानूनी प्रक्रियाओं और अदालती पेशियों की उलझनों में धकेलना उचित नहीं होगा।\n\nयाचिकाकर्ता की दलील और शीर्ष अदालत का पिछला रुख\nसुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने तर्क दिया कि समाज में यह कड़ा संदेश जाना आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति अथवा समूह अदालतों को अपनी निजी जागीर न समझे और कानून के दायरे का पूरी तरह सम्मान करे। याचिकाकर्ता का मुख्य विरोध इस बात पर था कि दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करने का पूर्व निर्णय उचित नहीं था।\n\nइस दलील का उत्तर देते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने पूर्व नज़ीरों का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी कई अन्य प्रकरणों में एफआईआर रद्द करने के निर्देश जारी किए हैं। ऐसे मामलों में सांसदों और विधायकों के धरने प्रदर्शनों के साथ-साथ कोविड महामारी के दौर में लगे प्रतिबंधों के दौरान दर्ज हुए मुकदमों से जुड़े मामले भी शामिल रहे हैं। उन सभी मामलों में अदालत ने राहत देते हुए यह रेखांकित किया था कि संबंधित प्रदर्शनकारी कोई आदतन अपराधी नहीं हैं। सीजेआई ने टिप्पणी की कि वर्तमान याचिका दरअसल शीर्ष अदालत के पहले दिए जा चुके फैसले पर फिर से विचार कराने की एक अप्रत्यक्ष कोशिश मात्र है, जिस पर सुनवाई करने का कोई औचित्य नहीं बनता।\n\nकेंद्र सरकार का भरोसा और सोनम वांगचुक का अनशन\nइस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार का रुख भी काफी अहम रहा है। केंद्र सरकार ने राजधानी के जंतर मंतर पर शांतिपूर्वक अपनी बात रखने वाले आंदोलनकारियों और 20 जुलाई को संसद मार्च में भाग लेने वाले युवाओं के खिलाफ दंडात्मक कानूनी मुकदमे दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया था।\n\nउल्लेखनीय है कि जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। इसके उपरांत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में मेदांता अस्पताल के भीतर सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया था। उस दौरान केंद्र सरकार की ओर से वांगचुक को यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले छात्र समुदाय पर किसी तरह की उत्पीड़नात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही प्रशासन ने यह भरोसा भी दिलाया था कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज की गई एफआईआर को वापस ले लिया जाएगा।\n\nनई दिल्ली में सीजेपी के नए प्रदर्शन को अनुमति नहीं\nएक अन्य घटनाक्रम में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर धरना आयोजित करने की इजाजत प्रशासन द्वारा नहीं दी गई है। दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम को अनुमति न देने के पीछे के प्रशासनिक कारणों को सार्वजनिक किया है।\n\nज्वाइंट सीपी नूपुर प्रसाद के अनुसार सीजेपी ने 7 अक्टूबर को नई दिल्ली जिला प्रशासन के अधिकारियों को एक औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपा था। इस आवेदन में संगठन ने उल्लेख किया था कि वे 10 तारीख को सीईसी की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर इस अर्जी को स्वीकार नहीं किया गया।\n\nइसका आप पर असर\nसुप्रीम कोर्ट के इस रुख से शांतिपूर्ण आंदोलनों में शामिल होने वाले छात्रों और युवाओं को कानूनी मुकदमों के डर से बड़ी सुरक्षा मिलती है।\n\n• भारत में: शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले सामान्य नागरिकों और छात्रों को अदालतों द्वारा आदतन अपराधी नहीं माना जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेवजह मुकदमों को घसीटने से न्यायपालिका सुरक्षा प्रदान करती है।\n• दिल्ली में: जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का रास्ता साफ बना रहेगा। युवाओं को मुकदमों और कोर्ट पेशियों के चक्कर से राहत मिलने से उनकी पढ़ाई और करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।\n• प्रदर्शन आयोजकों के लिए: राजधानी के संवेदनशील इलाकों में नए प्रदर्शनों के लिए दिल्ली पुलिस की पूर्व अनुमति अनिवार्य रहेगी। बिना प्रशासनिक स्वीकृति के विरोध प्रदर्शन करने पर रोक लग सकती है, जैसा कि सीजेपी के आगामी धरने के संदर्भ में हुआ है।\n• छात्रों और अभिभावकों के लिए: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के पूरे भविष्य और माता-पिता की चिंता को देखते हुए नरमी बरती जाती है। इससे युवा अपने करियर पर ध्यान केंद्रित रख सकेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि वह छात्रों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना चाहता था और याचिका पूर्व में दिए गए आदेश पर ही पुनर्विचार की मांग कर रही थी।\n\n• छात्रों के भविष्य की सुरक्षा: सीजेआई सूर्यकांत ने पाया कि प्रदर्शन में भाग लेने वाले युवा छात्र थे और उन पर मुकदमों का बोझ उनके भविष्य को तबाह कर सकता था। अदालत का मानना था कि युवाओं को बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।\n• गैर-आपराधिक पृष्ठभूमि का आधार: अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी आदतन अपराधी नहीं थे, ठीक वैसे ही जैसे जनप्रतिनिधियों के धरनों और महामारी के दौरान हुए प्रदर्शनों में लोगों को राहत दी गई थी। इस कानूनी नज़ीर के तहत प्राथमिकियों को निरस्त करने का पूर्व निर्णय सही माना गया।\n• सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच समझौता: केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति के समय शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस वापस लेने और दंडात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया था। अदालत का फैसला भी इसी नीतिगत समझ के अनुरूप रहा।\n• सीजेपी को अनुमति न मिलने की वजह: दिल्ली पुलिस की ज्वाइंट सीपी नूपुर प्रसाद के अनुसार 7 अक्टूबर को दिए गए आवेदन में 10 अक्टूबर को सीईसी की जवाबदेही को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन का प्रस्ताव था, जिसे सुरक्षा कारणों से मंजूरी नहीं दी गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर एफआईआर मामले में क्या फैसला दिया?\nसुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर रद्द करने के अपने पूर्व फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।\n\n2. सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान छात्रों को लेकर क्या टिप्पणी की?\nसीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के सामने युवा छात्र हैं और कोर्ट नहीं चाहता कि वे कानूनी मामलों में उलझकर अदालतों के चक्कर लगाते रहें।\n\n3. अदालत ने किन पिछले मामलों का हवाला देकर राहत को सही ठहराया?\nअदालत ने सांसदों-विधायकों के धरनों और कोविड के दौरान हुए प्रदर्शनों के मामलों का हवाला दिया, जहां गैर-आदतन अपराधियों को राहत देते हुए मुकदमे रद्द किए गए थे।\n\n4. सोनम वांगचुक ने अपना अनशन कब और किसकी मौजूदगी में समाप्त किया था?\nसोनम वांगचुक ने 28 जून से शुरू अनशन को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में मेदांता अस्पताल में समाप्त किया था।\n\n5. सीजेपी को 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?\nज्वाइंट सीपी नूपुर प्रसाद के अनुसार सीजेपी ने 7 अक्टूबर को सीईसी की जवाबदेही को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अर्जी दी थी, जिसे पुलिस ने अनुमति नहीं दी।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-09",
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