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  "title": "जातिगत प्रताड़ना मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त, हिमाचल DGP अशोक तिवारी 20 अगस्त को दिल्ली तलब",
  "summary": "शिमला में तैनात डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने हिमाचल के डीजीपी अशोक तिवारी को 20 अगस्त को दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे का आंतरिक घमासान अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच चुका है। शिमला में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) विजय कुमार रघुवंशी द्वारा लगाए गए जातिगत प्रताड़ना के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक तिवारी को दिल्ली तलब किया है। आयोग के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, डीजीपी को 20 अगस्त को नयी दिल्ली स्थित आयोग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। यह मामला राज्य प्रशासनिक सेवा और पुलिस महकमे में गहरी हलचल का कारण बना हुआ है।\n\nसुनवाई की रूपरेखा और आयोग के निर्देश\nआधिकारिक रूप से जारी किए गए नोटिस के मुताबिक, इस संवेदनशील मामले की सीधी सुनवाई राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य पार्थ बिस्वास करेंगे। आयोग ने हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) आर डी नजीम और डीजीपी अशोक तिवारी दोनों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित तमाम प्रासंगिक दस्तावेज, आधिकारिक रिकॉर्ड और अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य रूप से अपने साथ लाएं। इसके अलावा, आयोग ने यह भी संकेत दिए हैं कि शिकायतकर्ता डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी को भी सुनवाई प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहने के लिए कहा जा सकता है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।\n\nविवाद की पृष्ठभूमि और गाड़ियाँ छीने जाने का मामला\nइस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 जून को हुई थी, जब डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में डीएसपी ने आरोप लगाया था कि पूर्व में शिमला के एसपी रहे एक वरिष्ठ अधिकारी को लिफ्ट देने के बाद उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। इस घटना के तुरंत बाद उनकी सरकारी गाड़ी और सुरक्षा में तैनात पीएसओ (पर्सनल सुरक्षा अधिकारी) को वापस ले लिया गया था। डीएसपी ने अपनी शिकायत में इसे स्पष्ट रूप से जाति आधारित उत्पीड़न करार दिया था। इस विवाद के संबंध में संबंधित थाने में भी शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत मिलने के उपरांत आयोग ने 30 जून को तत्कालीन कार्यवाहक डीजीपी अशोक तिवारी को पहला नोटिस भेजा था और 15 दिनों के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का समय दिया था।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत भर में: यह मामला सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक महकमों में जातिगत उत्पीड़न की शिकायतों पर संवैधानिक निकायों के कड़े रुख को दर्शाता है।\n• हिमाचल प्रदेश में: राज्य पुलिस बल के उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों के बीच जारी खींचतान और प्रशासनिक मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने हिमाचल के डीजीपी को क्यों तलब किया है?\nशिमला में तैनात डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी ने डीजीपी अशोक तिवारी पर जाति आधारित उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जिस पर आयोग ने व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया है।\n\n2. डीजीपी अशोक तिवारी को दिल्ली में किस तारीख को पेश होना है?\nडीजीपी अशोक तिवारी को 20 अगस्त को नयी दिल्ली में आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।\n\n3. डीएसपी विजय कुमार रघुवंशी की मूल शिकायत क्या थी?\nडीएसपी का आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी को लिफ्ट देने के बाद उनसे सरकारी गाड़ी और पीएसओ छीन लिया गया, जिसे उन्होंने जातिगत प्रताड़ना बताया।\n\n4. इस मामले की सुनवाई आयोग का कौन सा सदस्य कर रहा है?\nराष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य पार्थ बिस्वास इस मामले की सुनवाई करेंगे।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-17",
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    "हिमाचल प्रदेश पुलिस",
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