# झारखंड में 24 दिन चले छात्र आंदोलन के सामने झुकी हेमंत सोरेन सरकार, जेएसएससी परीक्षा रद्द

> झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ 24 दिनों से चल रहे उग्र छात्र आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कर दी है। हालांकि, छात्र नेताओं का एक समूह अभी भी मामले की सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/jharkhand-men-24-dina-chale-chhatra-andolana-ke-samane-jhuki-hemant-soren-sarakara-jssc-pariksha-radda-17896 · **Language:** Hindi
**Tags:** झारखंड समाचार, हेमंत सोरेन, जेएसएससी परीक्षा रद्द, छात्र आंदोलन, पेपर लीक

झारखंड में प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आक्रोश आखिरकार रंग लाया है। 24 दिनों तक चले जोरदार आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। राज्य सरकार ने विवादित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल के साथ सभी प्रक्रियाओं को समाप्त कर दिया गया है। हालांकि सरकार ने इस कदम से राहत की सांस ली है, लेकिन अभ्यर्थियों का एक वर्ग अब भी पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग पर डटा हुआ है।

## राष्ट्रीय स्तर से शुरू हुआ आक्रोश और रांची में आंदोलन का आगाज
देशभर में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर युवाओं में असंतोष काफी समय से उबल रहा था। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के महीनों लंबे प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने सख्त एंटी-पेपर लीक कानून लागू किए थे। दिल्ली का यह विरोध शांत होने के तुरंत बाद झारखंड में भी असंतोष की ज्वाला भड़क उठी। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और जेएसएससी की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार हुआ है।

इस असंतोष ने एक संगठित आंदोलन का रूप धारण कर लिया। 25 जुलाई से 29 जुलाई के बीच अभ्यर्थियों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक धांधली वाली परीक्षाओं को रद्द नहीं किया जाता और निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में संपूर्ण पारदर्शिता की मांग की।

## भूख हड़ताल और सीआईडी की समानांतर जांच
2 अगस्त से 6 अगस्त के बीच यह छात्र आंदोलन और अधिक उग्र हो गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र नेताओं ने मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की पड़ताल के लिए अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को जिम्मेदारी सौंपी। सीआईडी ने परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ शुरू कर दी।

दूसरी ओर, बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए एक विशेष संवाद समिति का गठन किया। हालांकि छात्र अपने अडिग रुख पर कायम रहे और सीबीआई जांच से कम किसी भी समाधान को मानने से इनकार करते रहे।

## विधानसभा मार्च पर लाठीचार्ज और राजनीतिक उथल-पुथल
10 अगस्त को आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया, जब हजारों की संख्या में आक्रोशित अभ्यर्थियों ने झारखंड विधानसभा की ओर मार्च निकाला। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास कर रहे छात्रों पर वाटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठियों का प्रयोग किया गया। इस कार्रवाई में कई अभ्यर्थी घायल हो गए।

इसी दौरान अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इससे पहले एक अन्य अनशनकारी छात्र राहुल क्रांति की हालत भी नाजुक होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस लाठीचार्ज और पुलिसिया कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में 11 अगस्त को पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया, जिससे राज्यव्यापी हड़ताल की स्थिति बन गई।

## वार्ता का दौर और हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला
15 अगस्त से 17 अगस्त के बीच अस्पताल में भर्ती छात्र नेताओं की स्थिति और राज्य में बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों को औपचारिक वार्ता के लिए आमंत्रित किया। लगातार बैठकों और बातचीत के बाद 17 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा ऐलान किया।

सरकार ने विवादित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की घोषणा की। इसके अलावा, परीक्षा कराने का जिम्मा संभालने वाली निजी एजेंसी टीडीपीएल से जुड़े सभी अनुबंध और प्रक्रियाओं को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। टीडीपीएल वही एजेंसी थी, जिसे झारखंड सरकार ने इस महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी दी थी। इस एजेंसी से अतीत में जुड़े रहे अभय तिवारी नामक व्यक्ति पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जो वर्तमान में झारखंड सरकार में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। सरकार ने उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है।

## अनशन समाप्त लेकिन सीबीआई जांच पर अड़ा दूसरा गुट
सरकार के इस बड़े फैसले के बाद झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख नेता देवेंद्र नाथ महतो और अन्य अनशनकारी छात्रों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार ने छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। एक लंबे संघर्ष के बाद युवाओं की आवाज सुनी गई है, इसलिए जेएलकेएम ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।

दूसरी तरफ, 'रिफॉर्म्स मंच' की ओर से अनशन पर बैठीं हबीबा और राहुल क्रांति का अनशन भी समाप्त कराया गया। हालांकि, रिफॉर्म्स मंच के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे आंदोलन को पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि जब तक पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआई से नहीं कराई जाती, तब तक दोषियों को सजा नहीं मिल सकेगी। फिलहाल राज्य सरकार सीआईडी जांच के जरिए पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

## इसका आप पर असर
- **भारत भर में:** भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सख्त एंटी-पेपर लीक कानूनों की मांग देश के अन्य राज्यों में भी मजबूत हो सकती है।
- **झारखंड में:** रद्द हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों को अब नई परीक्षा तिथि और सुधार प्रक्रियाओं के स्पष्ट होने का इंतजार करना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. झारखंड सरकार ने कौन सी परीक्षा रद्द की है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को विवादित जेएसएससी-सीजीएल भर्ती परीक्षा और निजी एजेंसी टीडीपीएल से जुड़ी प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की घोषणा की।

### 2. छात्र आंदोलन कितने दिनों तक चला?
यह छात्र आंदोलन लगातार 24 दिनों तक चला, जिसकी शुरुआत 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने से हुई थी।

### 3. छात्रों की मुख्य मांगें क्या थीं?
छात्र भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ परीक्षा को रद्द करने, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे थे।

### 4. क्या आंदोलन पूरी तरह समाप्त हो गया है?
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा और अन्य नेताओं ने अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन 'रिफॉर्म्स मंच' जैसे समूहों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर अपना विरोध पूरी तरह खत्म नहीं किया है।

## प्रेरणा और सबक
- **अहिंसक संघर्ष का प्रभाव:** लगातार 24 दिनों तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से आवाज उठाने से शासन को छात्रों की बात माननी पड़ी।
- **एकजुटता की शक्ति:** जब युवा और अभ्यर्थी साझा उद्देश्य के लिए साथ आते हैं, तो वे व्यवस्था में सुधार लाने में सक्षम होते हैं।
- **धैर्य और निष्ठा:** लाठीचार्ज और कठिनाइयों के बावजूद छात्र नेताओं ने पारदर्शिता की अपनी मांग को मजबूती से बनाए रखा।

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