# झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के महाघोटाले से लेकर उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के हंगामे और तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी पर सियासी घमासान

> झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में साठगांठ और धांधली के गंभीर खुलासे के साथ छात्रों का आक्रोश भड़क उठा है, वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ में पुलिस पर हमले और तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की विवादित टिप्पणी से सियासत गरमा गई है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/jharkhand-men-pratiyogi-parikshaon-ke-mahaghotale-se-lekara-uttar-pradesh-men-kanvara-yatra-ke-hngame-aura-tamil-nadu-men-udhayani-14050 · **Language:** Hindi
**Tags:** झारखंड परीक्षा घोटाला, अभय तिवारी, कांवड़ यात्रा विवाद, मेरठ पुलिस हमला, उदयनिधि स्टालिन, तृषा विवाद, जोसेफ विजय, सीबीआई जांच मांग

झारखंड की सरकारी नौकरी भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े की ऐसी चौकाने वाली कहानी सामने आई है जिसने पूरे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से काली सूची में दर्ज एक विवादित एजेंसी को सभी प्रमुख सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं आयोजित करने का ठेका सौंप दिया गया, जिसके मालिक पर पहले भी सरकारी भर्तियों में गड़बड़ी के आरोप में शिकंजा कस चुका था। इस व्यवस्था का फायदा उठाकर एक अधिकारी ने 13 वर्षों में 12 विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं न केवल पास कीं, बल्कि उनमें शीर्ष स्थान भी हासिल किया। वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटनाएं घटी हैं, जबकि तमिलनाडु में राजनीतिक रंजिश के चलते पूर्व सहकर्मी और मुख्यमंत्री पर की गई एक विवादित टिप्पणी ने बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।

## झारखंड में भर्ती परीक्षाओं का बड़ा खेल और 13 साल पुराना सिंडिकेट
झारखंड राज्य में वर्ष 2014 के बाद आयोजित हुई लगभग प्रत्येक सरकारी भर्ती परीक्षा में भारी गड़बड़ी और धांधली के संगीन आरोप लगे। इसके बावजूद हैरान करने वाली बात यह रही कि संबंधित एजेंसी का ठेका कभी रद्द नहीं किया गया और उसे लगातार नई परीक्षाएं आयोजित कराने की जिम्मेदारी दी जाती रही। इस पूरी सांठगांठ के केंद्र में अभय तिवारी नाम का एक शख्स सामने आया है, जो ब्लैकलिस्टेड कंपनी टीडीपीएल (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था। अभय तिवारी का ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा रहा कि उसने पिछले 13 वर्षों में जिन 12 सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन पत्र भरा, उन सभी की परीक्षाओं में उसका चयन हुआ और वह टॉपर्स की सूची में शामिल रहा।

इस शख्स की योग्यता और परीक्षा पास करने की रफ्तार का आलम यह था कि उसने भारतीय नौसेना, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग तथा भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) जैसे शीर्ष संस्थानों की भर्ती परीक्षाओं को बेहद आसानी से क्लीयर कर लिया। वर्ष 2013 में उसने भारतीय नौसेना में एसएसआर (SSR) परीक्षा के लिए फॉर्म भरा और उसमें सफलता पाई। इसके ठीक अगले वर्ष यानी 2014 में उसने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में असिस्टेंट के पद के लिए परीक्षा दी और उसमें भी चयन हासिल किया। उसी साल उसने नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड द्वारा आयोजित कराई गई प्रतियोगी परीक्षा को भी आसानी से पास कर लिया। अभय तिवारी के इस सिलसिलेवार चयन ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

## दोहरी पहचान, रिश्तेदारों की नियुक्तियां और रेट कार्ड का सच
अभय तिवारी की कारगुजारियों की परतें जब खुलीं तो यह बात सामने आई कि वह एक ही समय में अलग-अलग नामों से दो अलग-अलग स्थानों पर पूर्णकालिक नौकरियां कर रहा था। एक तरफ वह झारखंड के गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई अफसर के पद पर अपने असली नाम अभय तिवारी से तैनात था, वहीं दूसरी ओर वह निजी आउटसोर्सिंग कंपनी टीडीपीएल (TDPL) में मनोज तिवारी के छद्म नाम से बतौर मार्केटिंग मैनेजर काम कर रहा था। कंपनी में अपनी मजबूत पैठ और परीक्षा संचालन तंत्र पर नियंत्रण का इस्तेमाल करके उसने एक ऐसा अभेद्य फॉर्मूला तैयार किया, जिससे केवल वह खुद ही पास नहीं हुआ, बल्कि अपने निकटतम परिजनों को भी सरकारी नौकरियों का नियुक्ति पत्र दिलवा दिया।

इस सेटिंग के जरिए अभय तिवारी ने अपने सगे भाई, अपनी भाभी और अपनी साली को भी राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में सीधी भर्ती करवा दी। ये सभी नियुक्तियां किसी पिछले दरवाजे से नहीं हुईं, बल्कि सभी कागजी तौर पर परीक्षाओं में शामिल हुए, पास हुए और आधिकारिक रूप से नियुक्ति पत्र प्राप्त करने में सफल रहे। इस खेल में मोटी रकम की उगाही की जाती थी। गिरोह ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा यानी प्रीलिमिनरी क्लीयर कराने के लिए 5 लाख रुपये और मुख्य परीक्षा यानी मेन्स क्लीयर कराने के लिए 25 लाख रुपये की दर तय कर रखी थी। इसके अलावा, किसी भी अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने का सौदा पक्का करने के लिए 10 लाख रुपये की अग्रिम राशि यानी एडवांस लिया जाता था।

आगे का दौर भी उसकी परीक्षा सफलता से भरा रहा। वर्ष 2018 में उसने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में हेड कॉन्स्टेबल और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा को क्लीयर किया। इसके अतिरिक्त, उसने जेएसएससी (JSSC) के माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएट टीचर, और जेपीएससी (JPSC) की एसीएफ (ACF), एफआरओ (FRO) तथा एफएसओ (FSO) की परीक्षाएं भी सफलतापूर्वक पास कीं। यही नहीं, 11वीं और 13वीं झारखंड सिविल सर्विस की प्रारंभिक परीक्षा को उसने अपने पहले ही प्रयास में पास कर दिखाया।

## सड़कों पर उतरे आक्रोशित छात्र और जांच एजेंसियों की कार्रवाई
परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ झारखंड में छात्र समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC) और कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) की परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में हजारों छात्र पिछले 12 दिनों से कड़ाके की धूप और विपरीत परिस्थितियों में धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टरों की तख्तियां हैं, जिनमें उसे भर्ती घोटालों का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड घोषित किया गया है। छात्रों का कहना है कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच नहीं करा सकती, तो अभय तिवारी का वह जादुई फॉर्मूला सार्वजनिक कर दे ताकि राज्य के सभी बेरोजगार युवाओं का भला हो सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य की सीआईडी (CID) ने जांच की कमान संभाली है और अब तक अभय तिवारी सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीआईडी की टीमों ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद समेत राज्य के 18 जिलों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस दौरान उन कोचिंग सेंटरों और शिक्षकों के ठिकानों की तलाशी ली गई, जिनकी सांठगांठ अभय तिवारी के गिरोह के साथ थी। छापेमारी के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों को भारी मात्रा में अभ्यर्थियों की ओएमआर (OMR) शीट की कार्बन प्रतियां, प्रवेश पत्र (Admit Card) और अंकपत्र (Mark Sheets) बरामद हुए हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन धरने पर बैठे अभ्यर्थियों को राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। छात्रों का तर्क है कि झारखंड में सीआईडी का अतीत का ट्रैक रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है, इसलिए इस वृहद घोटाले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) को सौंपी जानी चाहिए। हैरान करने वाली बात यह भी है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलनों का समर्थन करने वाली कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टियां रांची में चल रहे इस छात्र आंदोलन से पूरी तरह गायब हैं।

## मेरठ में कांवड़ियों का उत्पात और आस्था के बीच संयम की आवश्यकता
उत्तर प्रदेश में चल रही पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान एक तरफ जहां प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं और मेरठ से लेकर हरिद्वार तक श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर व सड़कों से पुष्प वर्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर कांवड़ियों द्वारा उपद्रव और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। यात्रा को सुगम बनाने के लिए कई मार्गों को परिवर्तित यानी डाइवर्ट किया गया है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, फिर भी कुछ जगहों पर कानून व्यवस्था को हाथ में लेने की कोशिश की गई है।

ऐसी ही एक गंभीर घटना मेरठ जिले से सामने आई, जहां रात के समय दो कांवड़ियों की मोटरसाइकिलों में आपस में टक्कर हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभालने के उद्देश्य से दोनों घायल कांवड़ियों को अपनी जीप में बैठा लिया। इसी बीच भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि पुलिस कांवड़ खंडित करने वाले दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। अफवाह फैलते ही उग्र हुए कांवड़ियों की भीड़ ने पुलिस जीप को घेर लिया और उसमें मौजूद लोगों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की गई और उनकी वर्दी तक फाड़ दी गई। पुलिस बल की संख्या कम होने के कारण जवान असहाय नजर आए। हालांकि, बाद में मेरठ के एसपी सिटी ने यह दावा किया कि कोई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है और घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है।

कांवड़ यात्रा के दौरान हर साल होने वाली इस तरह की हिंसक झड़पें और मारपीट की घटनाएं आस्था के इस पावन पर्व पर सवाल खड़े करती हैं। भगवान शिव की आराधना और गंगाजल लेकर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं से शांति और संयम की अपेक्षा की जाती है। राज्य सरकार और स्थानीय नागरिक कांवड़ियों के लिए विश्राम गृह, भोजन, पानी और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध करते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं पर जहां फूल बरसाए जा रहे हों, वहां लाठी-डंडे चलना और हिंसा होना पूरी यात्रा को बदनाम करता है। सच्ची शिव भक्ति का मूल आधार संयम, शांति और अनुशासित आचरण ही हो सकता है।

## तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी और नाटकीय गिरफ्तारी का घटनाक्रम
तमिलनाडु में कावेरी जल विवाद को लेकर तंजावुर में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने रैली में बोलते हुए अपनी पुरानी सहकर्मी और प्रख्यात अभिनेत्री तृषा को लेकर एक विवादित द्विअर्थी (डबल मीनिंग) टिप्पणी कर दी। इस टिप्पणी में उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ अभिनेत्री के संबंधों का परोक्ष रूप से उल्लेख किया। बयान के बाद उदयनिधि स्टालिन और उनकी पार्टी द्रमुक (DMK) के कार्यकर्ता हंसते हुए नजर आए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि टिप्पणी का उद्देश्य नीचा दिखाना था। राजनीति में आने से पहले उदयनिधि और तृषा फिल्मों में एक साथ काम कर चुके हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते निजी स्तर पर इस तरह के शब्दबाण चलाए गए।

इस विवादित टिप्पणी के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया और तंजावुर ले गई। इस कार्रवाई के विरोध में द्रमुक (DMK) के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जगह-जगह पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं। मामला तुरंत मद्रास उच्च न्यायालय पहुंचा। लगभग 4 घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि उदयनिधि को केवल बयान दर्ज करने के लिए हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें रिहा कर दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी महिला के खिलाफ द्विअर्थी या आपत्तिजनक टिप्पणी पूर्णतः निंदनीय है और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनी रहनी चाहिए। हालांकि, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय द्वारा कराई गई इस नाटकीय गिरफ्तारी ने उदयनिधि स्टालिन को राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचाया है। इस कार्रवाई ने उन्हें सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेता के रूप में पेश कर दिया है, जिससे हालिया चुनावी हार से हताश पड़ी द्रमुक (DMK) कैडर में नया उत्साह भर गया है। इस पूरे प्रकरण में न तो विवादित टिप्पणी की आवश्यकता थी और न ही ऐसी हड़बड़ी में की गई गिरफ्तारी की।

## इसका आप पर असर
**झारखंड में:** प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह खबर परीक्षा प्रणाली में सुधार और सीबीआई (CBI) जांच की मांग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

**उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में:** धार्मिक यात्राओं में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राजनीतिक बयानों में महिलाओं के सम्मान को लेकर सार्वजनिक जागरूकता आवश्यक है।

## सवाल-जवाब

### 1. अभय तिवारी कौन है और उस पर क्या मुख्य आरोप हैं?
अभय तिवारी टीडीपीएल (TDPL) कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर था, जिसने फर्जीवाड़े के जरिए खुद 12 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कीं और अपने रिश्तेदारों को भी नौकरियां दिलाईं।

### 2. झारखंड में छात्र 12 दिनों से क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?
छात्र जेपीएससी (JPSC), एसएससी (SSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षाओं में हुई व्यापक धांधली के विरोध में धरने पर बैठे हैं और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रहे हैं।

### 3. मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान क्या विवाद हुआ था?
दो मोटरसाइकिलों की टक्कर के बाद अफवाह फैलने पर उग्र कांवड़ियों की भीड़ ने पुलिस जीप को घेर लिया, पुलिसकर्मियों से मारपीट की और उनकी वर्दी फाड़ दी।

### 4. उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने क्यों हिरासत में लिया था?
तंजावुर की रैली में अभिनेत्री तृषा और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर विवादित टिप्पणी के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर रिहा कर दिया गया।

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