# झुमके और सुरमे के बाद अब बांस और केन फर्नीचर बना बरेली की नई पहचान, कई राज्यों में बढ़ी मांग

> उत्तर प्रदेश के बरेली में तैयार होने वाले बांस, बेत और केन के फर्नीचर की मांग पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों में तेजी से बढ़ रही है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/jhumake-aura-surame-ke-bada-aba-bansa-aura-cane-furniture-bana-bareilly-ki-nai-pahachana-kai-rajyon-men-barhi-manga-31466 · **Language:** Hindi
**Tags:** बरेली, बांस फर्नीचर, केन फर्नीचर, हस्तशिल्प, पर्यावरण अनुकूल, उत्तर प्रदेश व्यापार

उत्तर प्रदेश का बरेली शहर पारंपरिक रूप से अपने सुरमे और झुमकों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब यहां का बांस, बेत और केन फर्नीचर उद्योग भी अपनी खास कारीगरी के दम पर देश भर में नई पहचान बना रहा है। पुराने शहर की गलियों और बाजारों में हाथ से तैयार होने वाले ये उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ मजबूती में भी बेमिसाल हैं। आज के समय में जब लोग टिकाऊ और प्लास्टिक-मुक्त विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, बरेली के स्थानीय कारीगरों द्वारा गढ़े गए ये उत्पाद उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

## कुमार टॉकीज रोड पर सजता है बांस और केन का बड़ा बाजार
बरेली के पुराने बस स्टैंड यानी रोडवेज के पास कुमार टॉकीज वाली सड़क पर इस फर्नीचर का एक बेहद बड़ा और संगठित बाजार विकसित हो चुका है। इस बाजार में प्रवेश करते ही सड़क किनारे करीने से सजे तरह-तरह के घरेलू और सजावटी उत्पाद नजर आते हैं। स्थानीय कारीगर अपनी पीढ़ियों पुरानी कला का इस्तेमाल करके बांस और बेत को बेहद आकर्षक डिजाइनों में ढालते हैं। यहां आने वाले खरीदारों को आधुनिक घरों की जरूरतों से लेकर पारंपरिक शैली तक के सभी विकल्प आसानी से मिल जाते हैं।

## सोफा सेट से लेकर फ्रूट बास्केट तक विस्तृत उत्पाद श्रृंखला
इस बाजार में रोजमर्रा और सजावट से जुड़े सामानों की बहुत लंबी वैरायटी उपलब्ध है। कारीगरों द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रमुख उत्पादों में निम्नलिखित शामिल हैं

- **बैठक और आराम के साधन:** सोफा सेट, दीवान, गार्डन चेयर, रॉकिंग चेयर और छोटे स्टूल।
- **घरेलू उपयोग और भंडारण:** डाइनिंग टेबल, किताबों के लिए बुक रैक और जूते-चप्पल व्यवस्थित रखने के लिए शू रैक।
- **बच्चों के लिए खास उत्पाद:** बच्चों के पालने, बेबी चेयर और इनडोर-आउटडोर झूले।
- **सजावटी व गिफ्टिंग आइटम:** फ्रूट बास्केट और त्योहारों व आयोजनों में इस्तेमाल होने वाली गिफ्ट हैंपर बास्केट।

## उत्तर प्रदेश से बाहर कई राज्यों में पहुंच रहा है सामान
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, बरेली में तैयार होने वाला यह फर्नीचर अब केवल स्थानीय स्तर या उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं रह गया है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और देश के कई अन्य हिस्सों से भी इन उत्पादों के बड़े ऑर्डर आ रहे हैं। टिकाऊ निर्माण और बेहतरीन फिनिशिंग की वजह से दूसरे राज्यों के कारोबारी और व्यक्तिगत खरीदार भी यहां के बाजार का रुख कर रहे हैं। इस बढ़ते व्यापार ने स्थानीय स्तर पर काम करने वाले सैकड़ों कुशल कारीगरों की आजीविका को भी मजबूती दी है।

## टिकाऊपन और पर्यावरण संरक्षण बना ग्राहकों की पहली पसंद
बाजार में खरीदारी करने पहुंचे स्थानीय ग्राहक हर प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अपने घर के लिए किताबों की दो रैक, एक शू रैक और बच्चों के लिए कुर्सी खरीदी है। उनका अनुभव है कि बांस और बेत के उत्पाद लंबे समय तक चलते हैं और प्लास्टिक या सिंथेटिक सामग्रियों की तुलना में पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। वहीं पहली बार खरीदारी करने पहुंचे दीपक ने बताया कि वह इस पारंपरिक फर्नीचर की मजबूती और उपयोगिता को आजमाने के लिए यहां आए हैं। इसके अलावा कई ग्राहक अपने पारिवारिक आयोजनों और रिश्तेदारों के लिए सोफा सेट, डाइनिंग सेट और झूले खरीदने यहां पहुंचते हैं।

## शुरुआती लागत और नए कारोबार की संभावनाएं
बाजार के अनुभवी कारोबारियों का मानना है कि इस क्षेत्र में नए उद्यमियों के लिए बेहतरीन संभावनाएं हैं। कोई भी व्यक्ति रिटेल स्टोर से इस काम की शुरुआत कर सकता है। दुकान या शोरूम के आकार के आधार पर अलग-अलग उत्पादों का स्टॉक रखा जा सकता है। कीमत की बात करें तो यहां सोफा सेट की शुरुआती रेंज करीब 8 हजार रुपये से शुरू हो जाती है। वहीं अधिक नक्काशी और प्रीमियम क्वालिटी वाले सोफा सेट 12 हजार से 30 हजार रुपये या उससे अधिक कीमत में उपलब्ध हैं।

## इसका आप पर असर
पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक फर्नीचर खरीदने वाले ग्राहकों और छोटे कारोबारियों के लिए यह बाजार किफायती और टिकाऊ विकल्प पेश करता है।

- **घर की सजावट और टिकाऊपन:** प्राकृतिक बांस और केन से बने फर्नीचर प्लास्टिक और सिंथेटिक विकल्पों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं और घर को प्राकृतिक लुक देते हैं।
- **किफायती बजट:** ग्राहक करीब 8 हजार रुपये की शुरुआती कीमत में सोफा सेट खरीद सकते हैं, जबकि 12 हजार से 30 हजार रुपये में प्रीमियम विकल्प उपलब्ध हैं।
- **छोटे व्यापारियों के लिए अवसर:** नए कारोबारी कम लागत में रिटेल आउटलेट शुरू करके इस पारंपरिक उत्पाद श्रृंखला से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
- **उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में:** पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के खरीदार सीधे बरेली से थोक व खुदरा माल मंगवाकर परिवहन लागत और बिचौलियों के खर्च में बचत कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
बरेली के बांस और केन फर्नीचर की मांग में आई तेजी पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और पारंपरिक हस्तशिल्प की मजबूती का परिणाम है।

- **टिकाऊ जीवनशैली की ओर झुकाव:** आधुनिक उपभोक्ता प्लास्टिक और सिंथेटिक फर्नीचर से हटकर प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले सामान पसंद कर रहे हैं।
- **कुशल कारीगरी की पीढ़ियों पुरानी परंपरा:** बरेली के स्थानीय कारीगरों के पास बांस और बेत को विभिन्न उपयोगी उत्पादों में ढालने का लंबा अनुभव है, जिससे उत्पाद मजबूत और फिनिशिंग में बेहतर बनते हैं।
- **विस्तृत बाजार संपर्क:** सड़क और परिवहन व्यवस्था बेहतर होने से उत्तर प्रदेश का यह स्थानीय उद्योग पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे बड़े उपभोक्ता बाजारों तक आसानी से पहुंच रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. बरेली में बांस और केन फर्नीचर का मुख्य बाजार कहां स्थित है?
यह बाजार बरेली के पुराने बस स्टैंड यानी रोडवेज के पास कुमार टॉकीज वाली सड़क पर स्थित है।

### 2. इस बाजार में कौन-कौन से प्रमुख उत्पाद मिलते हैं?
यहां सोफा सेट, डाइनिंग टेबल, झूले, गार्डन चेयर, बुक रैक, शू रैक, बच्चों के पालने, फ्रूट बास्केट और रॉकिंग चेयर जैसे उत्पाद मिलते हैं।

### 3. बरेली का केन फर्नीचर किन राज्यों में भेजा जाता है?
उत्तर प्रदेश के अलावा यह माल पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता है।

### 4. बांस और केन के सोफा सेट की कीमत क्या है?
सोफा सेट की शुरुआती कीमत करीब 8,000 रुपये है, जबकि प्रीमियम रेंज 12,000 से 30,000 रुपये या उससे अधिक तक जाती है।

## प्रेरणा और सबक
बरेली के कारीगरों और व्यापारियों ने अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक उपभोक्ता प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर एक सफल व्यवसाय मॉडल तैयार किया है।

- **पारंपरिक हुनर का आधुनिकीकरण:** सदियों पुरानी हस्तकला को समकालीन फर्नीचर डिजाइनों में बदलकर स्थानीय कारीगरों ने नए बाजारों में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी।
- **पर्यावरण अनुकूल मूल्य:** पर्यावरण के प्रति सचेत उपभोक्ताओं की जरूरतों को पहचानकर कारीगरों ने प्राकृतिक उत्पादों को मुख्यधारा के बाजार में स्थापित किया।
- **स्थानीय संसाधनों से आजीविका:** स्थानीय कच्चे माल और हुनर पर भरोसा करके कारीगरों ने कई राज्यों तक फैले एक आत्मनिर्भर व्यापार का निर्माण किया।

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