{
  "type": "article",
  "title": "जंतर-मंतर आंदोलन हिंसा: दिल्ली पुलिस ने खारिज किए गोली लगने के दावे, घायल छात्रा नूतन टोप्पो ने साझा की आपबीती",
  "summary": "दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में गोली चलने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है, जबकि रांची की पीड़ित छात्रा नूतन टोप्पो ने कान में गंभीर चोट लगने और प्रशासनिक अनदेखी का आरोप लगाया है।",
  "content": "20 जुलाई को नई दिल्ली के प्रसिद्ध प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान किसी महिला प्रदर्शनकारी पर गोली चलाए जाने के सभी आरोप पूरी तरह से असत्य और आधारहीन हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरएमएल अस्पताल की मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट में गनशॉट इंजरी का कोई जिक्र नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर, रांची की रहने वाली पीड़ित छात्रा नूतन टोप्पो ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपने दाहिने कान में गंभीर चोट लगने का दावा किया है।\n\n \n\nदिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान और एमएलसी रिपोर्ट का ब्योरा\n\nदिल्ली पुलिस की प्रशासनिक टीम के अनुसार, 20 जुलाई को हुए उपद्रव और प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी की कोई भी अप्रिय घटना घटित नहीं हुई थी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद संबंधित महिला को उपचार के लिए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ले जाया गया था। आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा तैयार की गई शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर किसी भी प्रकार के गोली के जख्म या गनशॉट इंजरी का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।\n\nपुलिस प्रशासन ने जानकारी दी कि आरएमएल अस्पताल से छुट्टी मिलने के पश्चात महिला ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक निजी चिकित्सा संस्थान में अपनी एमएलसी बनवाई। गुरुग्राम के निजी अस्पताल के चिकित्सक ने रिपोर्ट में गनशॉट इंजरी शब्द के आगे प्रश्नचिह्न अंकित कर दिया था। इसी संदेहास्पद प्रविष्टि के आधार पर गोली लगने की बातें फैलाई गईं। दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब स्थल पर कोई फायरिंग ही दर्ज नहीं हुई, तो गनशॉट इंजरी होने की संभावना स्वतः ही समाप्त हो जाती है। इस विषय पर जल्द ही पुलिस विभाग की ओर से औपचारिक विस्तृत वक्तव्य जारी किया जाएगा।\n\n \n\nघायल छात्रा नूतन टोप्पो का बयान और आपबीती\n\nनीट पेपर लीक मामले के विरोध में सीजेपी के बैनर तले आयोजित छात्र प्रदर्शन में भाग लेने आई रांची की छात्रा नूतन टोप्पो ने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। नूतन ने स्पष्ट किया कि वह छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और मांगों का समर्थन करने के लिए अकेले ही गुरुग्राम से यात्रा करके जंतर-मंतर पहुंची थीं। प्रदर्शन के दौरान जब माहौल तनावपूर्ण हो गया, तो सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।\n\nछात्रा के अनुसार, पुलिसिया कार्रवाई के कारण मौके पर अचानक भगदड़ मच गई। अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वह राजीव चौक की दिशा में स्थित एक सार्वजनिक पार्क की ओर भागीं, जहां अन्य आंदोलनकारी भी शरण लिए हुए थे। नूतन ने दावा किया कि पार्क के समीप पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों की तरफ अपने हथियार तानकर खड़े थे। इसी अफरा-तफरी के बीच उनके दाहिने कान पर किसी अत्यधिक भारी और तेज वस्तु से जोरदार प्रहार हुआ, जिससे उनके कान का बाहरी हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।\n\nनूतन टोप्पो का तर्क है कि यदि उन्हें केवल आंसू गैस के कैनिस्टर से चोट लगी होती, तो कान के बाहरी हिस्से को इतना गंभीर नुकसान नहीं पहुंचता। घटना के बाद से अब तक किसी भी प्रशासनिक अथवा सरकारी प्रतिनिधि ने उनका हाल-चाल नहीं लिया और न ही कोई चिकित्सकीय मदद उपलब्ध कराई।\n\n \n\nनिष्पक्ष जांच की मांग और भविष्य का संकल्प\n\nपीड़ित छात्रा ने मांग की है कि 20 जुलाई के घटनाक्रम और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी पुलिसकर्मी की गैर-जिम्मेदाराना भूमिका या संलिप्तता सिद्ध होती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।\n\nनूतन ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा सीजेपी की मांगों पर ध्यान देने और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही आंदोलनकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन स्थगित करने का निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी जब कभी युवाओं अथवा छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दे उठेंगे, वह निर्भीक होकर प्रदर्शनों में सहभागिता करेंगी। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि युवाओं की समस्याओं का समाधान अत्यंत संवेदनशीलता के साथ किया जाए ताकि दोबारा ऐसी हिंसक स्थिति निर्मित न हो।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलनों पर सुरक्षा बलों की सख्ती को लेकर उठ रहे सवालों के बीच देश भर के छात्रों और अभिभावकों की नजरें सरकारी जांच और पारदर्शिता पर टिकी हैं।\n• दिल्ली-एनसीआर में: जंतर-मंतर जैसे प्रमुख प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर स्थानीय प्रशासन पर निगरानी और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जंतर-मंतर पर किस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा था?\n20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले के विरोध में सीजेपी के बैनर तले छात्र आंदोलन का आयोजन किया गया था।\n\n2. दिल्ली पुलिस का गोलीबारी के दावों पर क्या कहना है?\nदिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोलीबारी नहीं हुई और आरएमएल अस्पताल की एमएलसी रिपोर्ट में भी गनशॉट इंजरी की बात नहीं है।\n\n3. घायल छात्रा नूतन टोप्पो ने पुलिस कार्रवाई पर क्या आरोप लगाए?\nरांची की छात्रा नूतन टोप्पो का आरोप है कि पुलिस के लाठीचार्ज और कार्रवाई के दौरान उनके दाहिने कान पर तेज चोट लगी, जिसके बाद प्रशासन ने उनकी कोई सुध नहीं ली।\n\n4. गुरुग्राम के निजी अस्पताल की एमएलसी रिपोर्ट में क्या लिखा था?\nगुरुग्राम के निजी अस्पताल के डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में गनशॉट इंजरी लिखकर उसके आगे प्रश्नचिह्न अंकित किया था।",
  "url": "https://trendkia.com/national/jntara-mntara-andolana-hinsa-delhi-police-ne-kharija-kie-goli-lagane-ke-dave-ghayala-chhatra-nutan-toppo-ne-sajha-ki-apabiti-11824",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-29",
  "tags": [
    "दिल्ली पुलिस",
    "जंतर मंतर प्रदर्शन",
    "नूतन टोप्पो",
    "नीट पेपर लीक",
    "सीजेपी हिंसा मामला",
    "आरएमएल अस्पताल"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}