# जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत, सीजेपी नेता क्राइम ब्रांच के समक्ष हुए पेश

> अक्टूबर में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट मांगी है। वहीं सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका क्राइम ब्रांच के सामने पूछताछ के लिए उपस्थित हुए।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/jntara-mntara-pradarshana-mamale-men-supreme-court-ki-sakhta-hidayata-cjp-neta-crime-branch-ke-samaksha-hue-pesha-56972 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, जंतर मंतर प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच, सीजेपी, सौरव दास, आशुतोष रांका

अक्टूबर महीने में जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस बर्बरता के मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच कर रही उच्च-स्तरीय समिति को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपे। अदालत ने साफ किया है कि इस गंभीर विषय के नतीजों के लिए अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा नहीं की जा सकती। इसी बीच, प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख पदाधिकारियों से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गहन पूछताछ की है।

## सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और एक महीने की समयसीमा
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति की पीठ ने जांच समिति की कार्यप्रणाली पर विचार किया। सुप्रीम कोर्ट ने रेखांकित किया कि 31 अक्टूबर को समिति द्वारा जमा की गई रिपोर्ट सिर्फ एक स्थिति रिपोर्ट थी। इस रिपोर्ट में अब तक की गतिविधियों और की गई प्रगति का विवरण तो दिया गया था, लेकिन पुलिस की कथित बर्बरता और आरोपों के संबंध में कोई ठोस निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि समिति अब बिना किसी विलंब के जांच को अंतिम रूप दे और एक माह में निष्कर्ष अदालत के सामने रखे।

## जांच का दायरा बढ़ाने और सबूतों की समीक्षा के आदेश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उच्च-स्तरीय पैनल को अपनी जांच प्रक्रिया का दायरा व्यापक रखने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति को अपनी छानबीन केवल सीधे पीड़ितों द्वारा दी गई शिकायतों तक ही सीमित नहीं रखनी चाहिए। पैनल को उन सभी शिकायतों, वीडियो फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल या भौतिक साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए जो वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या अन्य लोगों द्वारा पीड़ितों की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्राप्त सभी दस्तावेजों का अध्ययन कर संबंधित पुलिस अधिकारियों से आधिकारिक जवाब मांगने का आदेश भी दिया गया है।

## क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश हुए सीजेपी के सह-संयोजक
दूसरी तरफ, इस प्रदर्शन से जुड़ी पुलिस जांच के सिलसिले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका गुरुवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के समक्ष उपस्थित हुए। दोनों नेताओं को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह पूछताछ अक्टूबर में जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन और वहां कथित रूप से बिना अनुमति प्रवेश (ट्रैस्पॉसिंग) करने के आरोपों के संबंध में की गई थी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान नियमों के तहत जंतर-मंतर को अब अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर रखा गया है।

## सीलबंद रिपोर्ट और अगली अदालती कार्रवाई
मामले में पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अदालती कार्यवाही की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उच्च-स्तरीय समिति ने कुछ ही दिन पहले एक सीलबंद लिफाफे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। चूंकि यह रिपोर्ट सीधे अदालत में जमा की गई थी, इसलिए इसकी प्रतियां पक्षों के साथ साझा नहीं की गई थीं। सुनवाई के दौरान पीठ ने रिपोर्ट की कुछ महत्वपूर्ण पंक्तियां पढ़कर सुनाईं और टिप्पणी की कि सार्वजनिक डोमेन में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) और नोडल अधिकारियों को सभी शिकायतें व सबूत सौंपे जाएंगे, ताकि समिति अपनी अंतिम सिफारिश तैयार कर सके। इस मामले की अगली सुनवाई 2 तारीख को निर्धारित की गई है।

## इसका आप पर असर
यह अदालती निर्देश और पुलिस कार्रवाई दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शनों के नियमों और नागरिक अधिकारों पर सीधा प्रभाव डालती है।

- **भारत भर में:** पुलिस कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक जांच समितियों की समयबद्धता तय होने से प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी।
- **नई दिल्ली में:** जंतर-मंतर जैसे क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रदर्शन करने वाले समूहों और छात्र संगठनों पर पुलिस की निगरानी एवं कानूनी सख्ती बढ़ सकती है।
- **प्रदर्शनकारियों के लिए:** सुप्रीम कोर्ट द्वारा डिजिटल वीडियो और वकीलों के माध्यम से साक्ष्य स्वीकार करने के निर्देश से पीड़ितों को अपनी बात साबित करने का मजबूत अवसर मिलेगा।
- **जांच एजेंसियों के लिए:** क्राइम ब्रांच और जांच समिति दोनों को अब निर्धारित समयसीमा के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मामला अक्टूबर में जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और बिना अनुमति परिसर में प्रवेश के आरोपों से जुड़ा है।

- **अनाधिकृत प्रदर्शन:** जंतर-मंतर के अधिसूचित प्रदर्शन स्थल न होने के बावजूद वहां विरोध आयोजित किया गया, जिससे ट्रैस्पॉसिंग के मामले दर्ज हुए।
- **पुलिस कार्रवाई के आरोप:** प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बर्बरता किए जाने की शिकायतें मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित की थी।
- **अनिश्चितकालीन देरी रोकना:** समिति की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट केवल कार्य प्रगति विवरण (स्टेटस रिपोर्ट) थी, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने की अंतिम समयसीमा तय की।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने उच्च स्तरीय समिति को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने समिति को प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बर्बरता के आरोपों की जांच पूरी कर एक महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

### 2. 31 अक्टूबर को समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी थी, उस पर कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 31 अक्टूबर की रिपोर्ट केवल एक स्टेटस रिपोर्ट थी, जिसमें किए गए कार्यों का ब्योरा था लेकिन कोई अंतिम निष्कर्ष शामिल नहीं था।

### 3. सीजेपी के कौन से नेता क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश हुए?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका क्राइम ब्रांच के सामने पूछताछ के लिए उपस्थित हुए।

### 4. सीजेपी नेताओं से किस मामले में पूछताछ की गई?
उनसे अक्टूबर में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और बिना अनुमति कथित प्रवेश (ट्रैस्पॉसिंग) से जुड़े मामले में राजौरी गार्डन क्राइम ब्रांच में पूछताछ की गई।

### 5. अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 तारीख को तय की है।

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