कक्षा में पर्ची भेजने पर चौथी के छात्र की बेरहमी से पिटाई, मां की शिकायत पर प्रिंसिपल और शिक्षक फंसे अहमदाबाद के एक निजी स्कूल में चौथी कक्षा के नौ वर्षीय छात्र को कथित तौर पर रूलर से पीटा गया, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अहमदाबाद के पूर्वी इलाके में स्थित एक निजी स्कूल से नौ साल के बच्चे के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर मामला सामने आया है। चौथी कक्षा के एक छात्र पर आरोप था कि उसने अपनी सहपाठी छात्रा को कक्षा के दौरान एक प्रेम संदेश लिखकर पर्ची दी थी। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने छात्र को तलब किया और परिजनों के अनुसार उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। घर लौटने पर डरे-सहमे बच्चे की हालत देखकर उसकी मां ने स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक के खिलाफ पुलिस थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज करवाई है। क्लासरूम में पर्ची मिलने के बाद शुरू हुई पूछताछ घटनाक्रम 19 सितंबर का बताया जा रहा है, जब नौ वर्षीय छात्र ने अपनी कक्षा में पढ़ने वाली एक लड़की के लिए कागज के टुकड़े पर 'आई लव यू' लिखकर उसे सौंपा था। छात्रा द्वारा शिकायत किए जाने पर जब स्कूल के कर्मचारियों ने जांच की, तो वह पर्ची कक्षा में बरामद हो गई। इसके तुरंत बाद स्कूल के प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षक ने बच्चे को अपने दफ्तर में बुलाया। परिजनों का कहना है कि पूछताछ के दौरान शिक्षक और प्रिंसिपल ने छात्र को बुरी तरह डांटने के साथ-साथ रूलर से पीटा। इस कड़े बर्ताव से नौ साल का मासूम बुरी तरह सहम गया और मानसिक रूप से टूट गया। कमरे में बंद होकर रोने लगा मासूम, परिजनों ने मांगी न्याय की गुहार स्कूल की छुट्टी के बाद जब बच्चा अपने घर पहुंचा, तो वह इतना खौफजदा था कि उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। परिजनों द्वारा काफी देर तक मनाने और पुचकारने के बाद जब उसने कमरे का दरवाजा खोला, तो वह बेतहाशा रो रहा था। मां ने जब उससे रोने का कारण पूछा, तब बच्चे ने आपबीती सुनाई कि स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक ने एक छोटी सी बात पर उसके साथ मारपीट की है। बच्चे की आपबीती सुनकर मां तुरंत पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शारीरिक उत्पीड़न तथा प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई। मां का यह भी आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने घटना की सच्चाई उजागर करने वाले सीसीटीवी फुटेज दिखाने से साफ इनकार कर दिया है। स्कूल प्रबंधन के दावे और पुलिस की जांच इस पूरे मामले पर स्कूल प्रशासन का अपना अलग पक्ष है। प्रबंधन का दावा है कि छात्र काफी समय से सहपाठी छात्रा को परेशान कर रहा था और यह पर्ची उसी क्रम का हिस्सा थी। स्कूल ने परिजनों पर यह गंभीर आरोप भी लगाया कि वे मामले को रफा-दफा करने के बदले में पैसों की मांग कर रहे थे। हालांकि, पीड़ित छात्र के परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह का समझौता नहीं चाहते, बल्कि अपने मासूम बच्चे के साथ हुई ज्यादती पर केवल न्याय चाहते हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और रिपोर्ट की मांग मामले की गंभीरता और पीड़ित के नाबालिग होने के मद्देनजर पुलिस बेहद संवेदनशीलता के साथ छानबीन में जुटी है। पुलिस अधिकारियों द्वारा छात्र, उसके माता-पिता और स्कूल के स्टाफ सदस्यों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, शिक्षा विभाग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने स्पष्ट किया है कि स्कूल प्रबंधन से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह आधिकारिक रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमों के तहत आवश्यक अनुशासनात्मक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इसका आप पर असर यह मामला स्कूलों में छोटे बच्चों के साथ होने वाले अनुशासन के नाम पर शारीरिक प्रताड़ना और उसके कानूनी परिणामों को रेखांकित करता है। • अहमदाबाद में: स्थानीय अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा और निजी स्कूलों में अनुशासन के तरीकों पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। शहर के शिक्षा विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है, जिससे ऐसे मामलों में स्कूलों की जवाबदेही तय होगी। • भारत भर में: सभी निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा कानूनी रूप से दंडनीय है। माता-पिता को बच्चों में अचानक दिखने वाले डर या व्यवहार में बदलाव को गंभीरता से लेकर उचित मंच पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। • छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर: ऐसी घटनाओं से कम उम्र के बच्चों पर गहरा मानसिक आघात पहुंचता है, जिसे समय पर काउंसलिंग के जरिए ठीक किया जाना चाहिए। स्कूलों को चाहिए कि वे दंडात्मक कार्रवाई के बजाय बाल मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं की मदद लें। • कानूनी प्रावधान: नाबालिग बच्चों पर हाथ उठाने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पीड़ित परिवार पुलिस और बाल अधिकार आयोग में त्वरित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह घटना प्राथमिक विद्यालय में कक्षा के भीतर बच्चों के बीच हुए एक सामान्य संवाद और उस पर स्कूल प्रशासन द्वारा की गई अत्यधिक कठोर प्रतिक्रिया के कारण उपजी। • कक्षा की पर्ची: चौथी कक्षा के नौ वर्षीय छात्र ने अपनी सहपाठी को एक कागज पर संदेश लिखकर दिया था, जिसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन तक पहुंच गई। अध्यापकों ने मामले को सामान्य तरीके से समझाने के बजाय गंभीर अनुशासनहीनता मान लिया। • अनुशासन की कठोर नीति: स्कूल प्रबंधन ने छात्र से पूछताछ के दौरान समझा-बुझाकर सुधार करने के बजाय कथित तौर पर रूलर का इस्तेमाल कर भय का माहौल बनाया। इससे बच्चा इतना डर गया कि उसने घर जाकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। • पारस्परिक विवाद और आरोप: स्कूल प्रबंधन ने छात्र पर लगातार छात्रा को परेशान करने और परिजनों पर मामले को दबाने के एवज में पैसे मांगने का आरोप लगाया, जबकि परिजनों ने इसे झूठा बताते हुए सीसीटीवी फुटेज छिपाने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता और टकराव ने विवाद को पुलिस थाने तक पहुंचा दिया। सवाल-जवाब 1. यह मामला किस शहर और कक्षा के छात्र से जुड़ा है? यह मामला अहमदाबाद के पूर्वी इलाके के एक स्कूल का है, जहां चौथी कक्षा में पढ़ने वाले नौ वर्षीय छात्र के साथ मारपीट का आरोप लगा है। 2. छात्र पर क्या आरोप था और उसे क्यों बुलाया गया था? छात्र पर आरोप था कि उसने कक्षा में अपनी सहपाठी छात्रा को 'आई लव यू' लिखा हुआ एक नोट सौंपा था। 3. परिजनों ने स्कूल के स्टाफ पर क्या आरोप लगाए हैं? मां ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान प्रिंसिपल और शिक्षक ने उनके नौ वर्षीय बेटे को रूलर से पीटा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। 4. स्कूल प्रबंधन का इस मामले पर क्या कहना है? स्कूल का दावा है कि छात्र उस छात्रा को बार-बार परेशान कर रहा था और परिजनों ने मामले को सुलझाने के लिए पैसों की मांग की थी। 5. शिक्षा विभाग और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठा रहे हैं? पुलिस सभी पक्षों के बयान लेकर संवेदनशील जांच कर रही है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने स्कूल से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। https://trendkia.com/national/kaksha-men-parchi-bhejane-para-chauthi-ke-chhatra-ki-berahami-se-pitai-man-ki-shikayata-para-principal-aura-teacher-phnse-36217 TrendKia — Har trend, sabse pehle.