कश्मीर मामले पर नई दिल्ली की दो टूक, तुर्की नेतृत्व को बाहरी दखल से दूर रहने की हिदायत संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर राग अलापने पर भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को सख्त संदेश देते हुए साफ किया कि इस अंदरूनी विषय पर किसी तीसरे पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता। संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर तुर्की की ओर से कश्मीर का राग दोहराए जाने के तुरंत बाद नई दिल्ली ने बेहद सख्त कूटनीतिक रुख अख्तियार किया है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर से जुड़े विषयों पर किसी भी बाहरी मुल्क अथवा तीसरे पक्ष का कोई दखल या अधिकार क्षेत्र स्वीकार्य नहीं होगा। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक सत्र के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगन ने एक बार फिर इस संवेदनशील क्षेत्रीय विषय को उठाया था, जिसके जवाब में नई दिल्ली ने अपनी स्पष्ट संप्रभु सीमाएं रेखांकित की हैं। ग्लोबल मंच पर तुर्की का पुराना रुख तुर्की के शीर्ष नेतृत्व की ओर से बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय बैठकों में कश्मीर का उल्लेख करना कोई नई बात नहीं है। अंकारा का कूटनीतिक झुकाव लंबे अरसे से इस्लामाबाद के बेहद करीब माना जाता रहा है, और पाकिस्तानी नेतृत्व के समर्थन में तुर्की अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग कश्मीर पर बयानबाजी के लिए करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के हालिया संबोधन में भी इसी पुराने ढर्रे को आगे बढ़ाते हुए एर्दोगन ने इस मामले को उठाने की कोशिश की थी। नई दिल्ली का कड़ा संदेश और कूटनीतिक संदेश विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत के आंतरिक मामलों में अवांछित हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। कूटनीतिक हलकों में यह संदेश पूरी तरह साफ कर दिया गया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और किसी भी विदेशी ताकत को इस पर टिप्पणी करने अथवा मध्यस्थता जताने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। हाल के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में तुर्की के इन बयानों को पाखंड करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की मर्यादा याद दिलाई गई है, जिससे यह साफ होता है कि वैश्विक मंचों पर भारत अपनी संप्रभुता से जुड़े सवालों पर कड़ा प्रतिरोध जारी रखेगा। इसका आप पर असर इस कूटनीतिक टकराव का सीधा प्रभाव भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संप्रभुता के प्रति उसके सख्त रवैये को रेखांकित करता है। • राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का रुख अडिग रहने से यह संदेश स्पष्ट होता है कि आंतरिक मसलों पर बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे वैश्विक स्तर पर देश की कूटनीतिक स्थिति और मजबूत होती है। • द्विपक्षीय संबंधों पर असर: तुर्की के साथ व्यापारिक, पर्यटन और कूटनीतिक संवादों में इस तरह के बयानों से असहजता बनी रह सकती है। दोनों देशों के बीच आधिकारिक समझौतों और सहयोग कार्यक्रमों पर इसका रणनीतिक असर देखने को मिल सकता है। • अंतरराष्ट्रीय मंचों की निगरानी: संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े मंचों पर पाकिस्तान और उसके सहयोगी देशों की हर बयानबाजी का तत्काल खंडन तय होता है। इससे वैश्विक मंचों पर भारत के पक्ष को वैधता और निरंतर समर्थन मिलता है। • नागरिकों और यात्रियों के लिए: दोनों देशों के बीच यात्रा अथवा सामान्य व्यापारिक गतिविधियों पर तत्काल कोई प्रतिबंध नहीं लगा है। हालांकि कूटनीतिक तल्खी के दौरान आधिकारिक स्तर के दौरों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में गति धीमी हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मुद्दे को एक बार फिर उठाने और पाकिस्तान के रुख का समर्थन करने की वजह से सामने आया। • तुर्की का यूएनजीए भाषण: राष्ट्रपति एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर कश्मीर का उल्लेख किया, जिसे भारत ने अवांछित दखल माना। भारत सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। • अंकारा और इस्लामाबाद की निकटता: तुर्की लंबे समय से पाकिस्तान का करीबी साझेदार रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके रुख की वकालत करता रहा है। इसी कूटनीतिक साझेदारी के चलते तुर्की के नेता अक्सर कश्मीर विषय को बहुपक्षीय सम्मेलनों में उठाते हैं। • भारत की सुसंगत नीति: भारत हमेशा से यह मानता आया है कि जम्मू और कश्मीर उसका अभिन्न आंतरिक अंग है और तीसरे पक्ष की किसी भी तरह की मध्यस्थता या टिप्पणी पूरी तरह अस्वीकार्य है। सवाल-जवाब 1. भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को क्या जवाब दिया? विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि कश्मीर मुद्दे पर किसी भी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। 2. तुर्की के राष्ट्रपति ने कश्मीर पर बयान कहां दिया था? राष्ट्रपति एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के मंच पर अपने संबोधन के दौरान यह टिप्पणी की थी। 3. तुर्की बार-बार कश्मीर का मुद्दा क्यों उठाता है? तुर्की को पाकिस्तान का करीबी सहयोगी माना जाता है और वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में पाकिस्तान के रुख के समर्थन में बयानबाजी करता रहा है। 4. कश्मीर मुद्दे पर भारत का आधिकारिक रुख क्या है? भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू और कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और यह उसका पूरी तरह से आंतरिक मामला है। https://trendkia.com/national/kashmir-mamale-para-new-delhi-ki-do-tuka-turkey-netritva-ko-bahari-dakhala-se-dura-rahane-ki-hidayata-40338 TrendKia — Har trend, sabse pehle.