# काठमांडू पहुंचे विक्रम मिस्री ने नेपाली विदेश सचिव से की व्यापक वार्ता, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के भारत दौरे की तैयारी तेज

> विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने काठमांडू में नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय और शीर्ष मंत्रियों से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और नवंबर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के भारत दौरे पर चर्चा की।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/kathamandu-pahunche-vikram-misri-ne-nepali-videsha-sachiva-se-ki-vyapaka-varta-pradhanamntri-balendra-shah-ke-bharata-daure-ki-tai-56665 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारत नेपाल संबंध, विक्रम मिस्री, बालेंद्र शाह, काठमांडू, ऊर्जा व्यापार, द्विपक्षीय वार्ता, विदेश नीति

भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से विदेश सचिव विक्रम मिस्री दो दिवसीय दौरे पर काठमांडू पहुंचे हैं। वहां उन्होंने नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के साथ गहन और विस्तृत वार्ता की। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य केंद्र नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के आगामी भारत दौरे की रूपरेखा तैयार करना और दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में चल रही साझेदारी की समीक्षा करना रहा। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने इन कूटनीतिक चर्चाओं को भारत और नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों को स्थिर, सुदृढ़ और भविष्योन्मुख बनाए रखने की एक सतत पहल बताया है।

## उच्च स्तरीय बैठकों में सहयोग के प्रमुख आयामों पर समीक्षा
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों विदेश सचिवों के बीच हुई इस बैठक में नेपाल और भारत के संबंधों के सभी अहम पहलुओं को शामिल किया गया। बातचीत की कार्यसूची में भविष्य के उच्च स्तरीय दौरे, भौतिक व डिजिटल कनेक्टिविटी लिंक, आपसी व्यापार, विकास साझेदारी, ऊर्जा क्षेत्र और जनता से जनता के बीच सीधा संपर्क जैसे विषय प्रमुखता से शामिल रहे। नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पुष्टि की कि यह बैठक द्विपक्षीय तैयारियों को गति देने के लिए काफी उपयोगी साबित हुई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की यात्रा से संबंधित योजनाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नवंबर के अंतिम सप्ताह में भारत आने की उम्मीद है। मार्च के महीने में पदभार ग्रहण करने के बाद यह किसी भी पड़ोसी देश की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा होगी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के औपचारिक निमंत्रण पर इस दो दिवसीय दौरे पर वहां पहुंचे हैं, जहां उनका कूटनीतिक कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा।

## नेपाली नेतृत्व और प्रमुख मंत्रियों से शिष्टाचार भेंट
काठमांडू प्रवास के दौरान विक्रम मिस्री ने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से शिष्टाचार मुलाकात की। नेपाली विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस बातचीत का मूल ध्यान दोनों देशों की बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने पर केंद्रित था। दोनों राजनयिकों ने नेपाल और भारत के बीच सदियों पुरानी मित्रता और सांस्कृतिक आत्मीयता को रेखांकित किया। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के यह प्रगाढ़ संबंध आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छुएंगे। इस बैठक में आने वाले दिनों में होने वाले अन्य उच्च स्तरीय संपर्कों की योजनाओं पर भी विमर्श किया गया।

इसके अलावा दोनों पक्षों ने ऊर्जा, व्यापार, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इन सभी पहलों का उद्देश्य बहुआयामी संबंधों को मजबूत आधार देना और ऐतिहासिक बंधनों को सुदृढ़ करना है। भारतीय मिशन ने जानकारी दी कि विक्रम मिस्री ने ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जा रही वर्तमान परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कदमों पर चर्चा हुई।

## ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर
ऊर्जा मंत्री के सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में बिजली व्यापार और जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने और पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना जैसे अहम मुद्दों को भी उठाया गया। मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत द्वारा दी गई सहायता के लिए औपचारिक आभार प्रकट किया। उन्होंने भारत से ऊर्जा व्यापार का दायरा बढ़ाने, लंबित सहायता परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और भारतीय निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

जवाब में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आश्वस्त किया कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में नेपाल के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके उपरांत मिस्री ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से भी शिष्टाचार मुलाकात की। भारतीय दूतावास ने बताया कि इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को गति देने पर बहुत विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों के अधिकारियों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी के भविष्य और इसमें नए अवसरों की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

भारतीय दूतावास ने यह भी बताया कि विक्रम मिस्री ने बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लमसाल से भी विचार विमर्श किया। मंत्रालय के अनुसार सुनील लमसाल ने बुनियादी ढांचे और पारगमन नेटवर्क को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया। नेपाल एक चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ यानी लैंडलॉक्ड देश है, जिसके कारण वह अपनी वस्तुओं और सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर निर्भर रहता है। नेपाल की समुद्र तक पहुंच भी भारत के रास्तों से ही संभव होती है, जिससे यह सहयोग अत्यंत रणनीतिक हो जाता है।

## सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों की संवेदनशीलता
दोनों देशों के अधिकारी अक्सर इन पारंपरिक संबंधों को 'रोटी-बेटी' के रिश्ते के रूप में परिभाषित करते हैं, जिसका उल्लेख शीर्ष नेतृत्व द्वारा बार-बार किया जाता रहा है। हालांकि, मई के महीने में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की एक टिप्पणी के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में थोड़ी असहजता देखी गई थी। बालेंद्र शाह ने सीमा विवाद के समाधान के लिए चीन और ब्रिटेन की भागीदारी की बात कही थी। नई दिल्ली ने किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या भूमिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। भारत ने दृढ़ता से दोहराया था कि सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच पहले से ही एक स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।

नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को लेकर एक पुराना सीमा विवाद चल रहा है। भारत का निरंतर यह रुख रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड राज्य का अभिन्न हिस्सा हैं। काठमांडू में आयोजित इस हालिया बैठक में व्यावहारिक सहयोग और आगामी यात्राओं की तैयारियों को प्राथमिक एजेंडा बनाया गया। अधिकारियों का कहना है कि राजनयिक स्तर पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के भारत दौरे की तैयारियां सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं, जो इस रिश्ते के व्यापक आर्थिक और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।

## इसका आप पर असर
इस उच्च स्तरीय राजनयिक बैठक से भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक, ऊर्जा और सीमा पार आवागमन के क्षेत्र में ठोस बदलाव आने की संभावना है।

- **भारत में:** सीमावर्ती राज्यों और ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों के लिए नेपाल में जलविद्युत और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नए अवसर खुलेंगे। इससे दोनों देशों के बीच बिजली के आयात और निर्यात को अधिक संस्थागत ढांचा मिलेगा।
- **नेपाल में:** भारत के माध्यम से समुद्री व्यापार और पारगमन सुविधाओं के बेहतर होने से दैनिक उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति सुगम बनेगी। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा बेहतर होगी।
- **व्यापारियों के लिए:** दोनों पक्षों द्वारा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर जोर देने से माल ढुलाई में लगने वाला समय और लागत कम होगी। आयात-निर्यात से जुड़े उद्यमियों को सीमा शुल्क चौकियों पर बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
- **नागरिकों के लिए:** शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ने से दोनों देशों के छात्रों और युवाओं के लिए संपर्क और सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। इससे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने पारिवारिक और सामाजिक रिश्ते और सुदृढ़ होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनयिक बैठक नेपाल के नए नेतृत्व के पहले भारत दौरे की औपचारिक जमीन तैयार करने और हालिया कूटनीतिक तनाव के बाद रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए आयोजित की गई थी।

- **प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा:** मार्च में पदभार संभालने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की यह किसी भी पड़ोसी देश की पहली यात्रा होगी, जिसके लिए एजेंडा तय करना जरूरी था। दोनों देशों के विदेश मंत्रालय नवंबर के अंतिम सप्ताह के दौरे की रूपरेखा पर काम कर रहे हैं।
- **सीमा विवाद से उपजी असहजता:** मई में प्रधानमंत्री शाह द्वारा सीमा विवाद में चीन और ब्रिटेन की भूमिका की मांग करने पर दोनों देशों के रिश्तों में असहजता आ गई थी। भारत द्वारा तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को खारिज करने के बाद सीधे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए माहौल को सहज करना आवश्यक था।
- **ऊर्जा और पारगमन की अनिवार्यता:** नेपाल पूरी तरह से जमीनी सीमा से घिरा हुआ देश है और समुद्री व्यापार के लिए भारत पर निर्भर है। साथ ही नेपाल अपने जलविद्युत क्षेत्र के विकास और बिजली निर्यात के लिए भारतीय बाजार और निजी निवेश पर निर्भर है।

## सवाल-जवाब

### 1. भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल क्यों गए थे?
विक्रम मिस्री नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के निमंत्रण पर दो दिवसीय दौरे पर काठमांडू गए थे ताकि द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के भारत दौरे की तैयारी की जा सके।

### 2. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह कब भारत दौरे पर आ सकते हैं?
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नवंबर के अंतिम सप्ताह में भारत आने की संभावना है।

### 3. काठमांडू में किन-किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
वार्ता में उच्च स्तरीय यात्राएं, कनेक्टिविटी, द्विपक्षीय व्यापार, विकास परियोजनाएं, ऊर्जा क्षेत्र, जलविद्युत निर्माण और शिक्षा व खेल में सहयोग शामिल रहे।

### 4. मई महीने में भारत और नेपाल के संबंधों में तनाव क्यों आया था?
मई में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सीमा विवाद में चीन और ब्रिटेन की भागीदारी की बात कही थी, जिसे भारत ने खारिज करते हुए द्विपक्षीय तंत्र पर जोर दिया था।

### 5. भारत और नेपाल के बीच कौन से सीमा क्षेत्र विवादित हैं?
दोनों देशों के बीच लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को लेकर विवाद है, जिन्हें भारत उत्तराखंड का हिस्सा मानता है।

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