# केरल के चर्च में शादी से पहले HIV टेस्ट की मांग, पादरी के बयान पर मचा बवाल

> केरल के तिरुवनंतपुरम में मार थोमा चर्च के एक पादरी द्वारा शादी से पहले एचआईवी टेस्ट अनिवार्य करने की मांग पर विवाद खड़ा हो गया है। उनके इस बयान का समुदाय के भीतर और सोशल मीडिया पर विरोध हो रहा है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/kerala-ke-church-men-shadi-se-pahale-hiv-test-ki-manga-padari-ke-bayana-para-macha-bavala-27413 · **Language:** Hindi
**Tags:** केरल, तिरुवनंतपुरम, मार थोमा चर्च, एचआईवी टेस्ट, पादरी के. थॉमस, चर्च विवाद

केरल के तिरुवनंतपुरम शहर में मार थोमा चर्च के एक पादरी की ओर से दिए गए एक नए बयान को लेकर भारी विवाद उत्पन्न हो गया है। चर्च के पादरी और ट्रस्टी रेव. डॉ. के. थॉमस ने सार्वजनिक रूप से यह सुझाव दिया है कि चर्च में विवाह बंधन में बंधने वाले युवक और युवतियों का विवाह से पूर्व अनिवार्य रूप से एचआईवी परीक्षण कराया जाना चाहिए। उनके इस अजीबोगरीब और विवादास्पद प्रस्ताव के सामने आने के बाद से ही चर्च समुदाय के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इसके अलावा इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग खुलकर पादरी के इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।

 

## स्कूल के कार्यक्रम में दिया गया था यह बयान

यह पूरा मामला 30 अगस्त का है जब तिरुवनंतपुरम के एक स्थानीय स्कूल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। यह आयोजन चर्च द्वारा प्रायोजित एक फैमिली गैदरिंग का मुख्य हिस्सा था, जहां पादरी महोदय उपस्थित माता-पिता को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कर्नाटक सरकार के उस कथित फैसले का उदाहरण दिया जिसके तहत सभी कॉलेज परिसरों में एचआईवी परीक्षण कराने पर विचार किया जा रहा है। इसी बात का हवाला देते हुए पादरी ने जोर देकर कहा कि मार थोमा चर्च के अंतर्गत होने वाले सभी विवाहों से पहले होने वाले जोड़े का यह मेडिकल टेस्ट होना आवश्यक है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने माता-पिता से अपील करते हुए कहा था कि वे उनकी इस बात का बुरा न मानें क्योंकि उनका उद्देश्य केवल समाज को सतर्क करना है।

 

## बेटी के विवाह और सुरक्षा पर की गई टिप्पणी

अपने इसी संबोधन के दौरान पादरी ने उपस्थित अभिभावकों और माता-पिता को संबोधित करते हुए उनकी बेटियों के विवाह और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी कई बातें कहीं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि जब वे अपनी 27 साल की वयस्क बेटी को दुल्हन के रूप में विवाह के लिए चर्च लेकर आते हैं, तो उन्हें यह बात पूरी तरह सुनिश्चित कर लेनी चाहिए कि उसके साथ अतीत में किसी भी प्रकार की गलत हरकत या शोषण नहीं हुआ है। पादरी का यह तर्क था कि इस विशेष फैमिली गैदरिंग का मूल उद्देश्य ही माता-पिता को इस तरह के संवेदनशील मामलों के प्रति अधिक जागरूक और सक्षम बनाना था ताकि वे अपनी संतानों की बेहतर देखरेख कर सकें।

 

## सोशल मीडिया पर भड़का विरोध और पुरानी घटनाएं

पादरी के इस सार्वजनिक बयान के सामने आने के बाद से ही इसका तीव्र विरोध शुरू हो गया है। आलोचकों और समाज के विभिन्न वर्गों का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि एचआईवी परीक्षण को विवाह जैसे पवित्र बंधन के साथ जोड़ना सीधे तौर पर चर्च समुदाय के युवाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और यह उनके लिए बेहद अपमानजनक है। कई लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी से युवाओं के निजी जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर समाज में बेहद गलत संदेश जाता है। गौरतलब है कि इससे पहले भी केरल के चर्च से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, जैसे कि कुछ वर्ष पहले केरल के चर्च की ओर से यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि ईसाई महिलाओं को इस्लामिक स्टेट के जाल में फंसाया जा रहा है, जिसने उस दौरान काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा स्वास्थ्य के मोर्चे पर अन्य जगहों से भी ऐसी बातें सामने आती रही हैं जहाँ मेले और सड़क किनारे टैटू और नाक-कान छिदवाना एचआईवी का कारण बन रहा है, जहां जांच में कई लोग संक्रमित पाए गए थे।

## इसका आप पर असर
यह घटना मुख्य रूप से केरल के एक विशेष धार्मिक समुदाय और स्थानीय चर्चाओं से जुड़ी हुई है, जिसका आम नागरिकों के दैनिक जीवन या वित्त पर सीधा असर नहीं पड़ता है।

- **भारत में:** देश भर के विभिन्न समुदायों में विवाह संस्कारों और स्वास्थ्य जांच के नियमों को लेकर समय-समय पर होने वाली बहस पर असर पड़ता है। इस तरह के बयानों से व्यक्तिगत गोपनीयता और सामाजिक रूढ़ियों के बीच की बहस को एक नई दिशा मिलती है।

- **केरल में:** तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में मार थोमा चर्च से जुड़े परिवारों और युवाओं के बीच इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। स्थानीय चर्च समुदायों में विवाह से जुड़ी औपचारिकताओं और धार्मिक नियमों को लेकर आंतरिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यह विवाद किस चर्च और शहर से जुड़ा है?
यह विवाद केरल के तिरुवनंतपुरम में मार थोमा चर्च से जुड़ा हुआ है।

### 2. यह बयान किसने दिया था?
यह बयान मार थोमा चर्च के पादरी और ट्रस्टी रेव. डॉ. के. थॉमस ने दिया था।

### 3. पादरी ने क्या मुख्य मांग रखी थी?
पादरी ने मांग की थी कि चर्च में विवाह करने वाले सभी युवक-युवतियों का विवाह से पहले एचआईवी टेस्ट होना चाहिए।

### 4. यह बयान किस कार्यक्रम के दौरान दिया गया था?
यह बयान 30 अगस्त को तिरुवनंतपुरम के एक स्कूल में आयोजित चर्च की फैमिली गैदरिंग के दौरान दिया गया था।

### 5. इस बयान का विरोध क्यों हो रहा है?
आलोचकों का मानना है कि एचआईवी टेस्ट को शादी से जोड़ना चर्च समुदाय के युवाओं की गरिमा के खिलाफ और अपमानजनक है।

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