केरल के कोझिकोड में गौर के हमले में एक व्यक्ति की जान गई, सदमे से चचेरे भाई की भी हुई मौत केरल के कोझिकोड जिले में एक गौर के हमले में 40 वर्षीय सुनील की मौत हो गई। इस त्रासदी के गहरे सदमे से उनके चचेरे भाई विजेश को भी दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी भी जान चली गई। केरल के कोझिकोड इलाके में वन्यजीवों के आतंक का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां गौर के हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई और इस अचानक हुए सदमे से उसके चचेरे भाई की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इस दोहरे हादसे के बाद से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और शोक का माहौल बना हुआ है। लोग अब क्षेत्र में जंगली जानवरों की आवाजाही पर रोक लगाने और इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रशासन ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक दोनों शवों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। झुंड को खदेड़ते समय हुआ जानलेवा हमला यह पूरी घटना विलंगड की वायाड कॉलोनी में शनिवार को उस समय घटी जब 40 वर्षीय सुनील वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर रिहायशी क्षेत्र में दाखिल हुए गौर के एक झुंड को वापस जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुटे थे। इसी अभियान के दौरान एक गौर अचानक आक्रामक हो गया और उसने सुनील पर घातक हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले में सुनील गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी जान चली गई। वन विभाग और स्थानीय लोगों की संयुक्त कोशिश के बीच यह हादसा हो गया। शव घर पहुंचते ही चचेरे भाई को आया दिल का दौरा कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद शनिवार की रात करीब 11 बजे सुनील का शव उनके पैतृक आवास लाया गया। केरल पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सुनील की अचानक हुई मौत की खबर ने परिवार को अंदर से झकझोर कर रख दिया। इसी तीव्र मानसिक आघात और गहरे सदमे के कारण उनके चचेरे भाई विजेश को अचानक दिल का दौरा पड़ गया, जिससे उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई। एक ही परिवार में कुछ ही घंटों के भीतर दो मौतें होने से पूरे इलाके में मातम पसर गया है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान और मुआवजे की मांग घटना के विरोध में स्थानीय लोग शवों को रखकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इलाके में गौर जैसे जंगली जानवरों के आतंक का कोई पक्का और स्थायी हल नहीं निकाला जाता, तब तक वे अंतिम विदाई की प्रक्रिया पूरी नहीं होने देंगे। इसके साथ ही, पीड़ित परिवार के लिए 25 लाख रुपये की भारी आर्थिक सहायता की मांग भी जोर-शोर से उठाई जा रही है। गौर अब हम लोगों के प्रति आक्रामक हो चुके हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ये जानवर अब भी आसपास के इलाकों में खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे आम जनता की जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा है और खेतों की फसलें भी तबाह हो रही हैं। विधायक ने की गौर की पहचान और मदद की बात इस पूरे मामले पर स्थानीय विधायक के. एम. अभिजीत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा कोई भी सख्त कार्रवाई शुरू करने से पहले उस विशेष गौर की पहचान करना अनिवार्य है जिसने सुनील को अपना निशाना बनाया था। उन्होंने बताया कि शनिवार की रात ही इस गंभीर मुद्दे को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा की जा चुकी है, जिसमें पीड़ित परिवार के सदस्यों और गांव के लोगों ने अपनी सभी चिंताएं और मांगें खुलकर सामने रखी हैं। सरकार की तरफ से मिलने वाली वित्तीय सहायता विधायक ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि इन तमाम समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार हर संभव और आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की दुर्घटनाओं के मामलों में फिलहाल नियमों के तहत 14 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है, जिसमें से 5 लाख रुपये की पहली किस्त बहुत जल्द पीड़ित परिवार को सौंप दी जाएगी। वन विभाग की कार्रवाई और अन्य जगहों के हालात फिलहाल वन विभाग ने इलाके से इस आक्रामक गौर के झुंड को पूरी तरह से खदेड़ने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है। वन्यजीवों के इस तरह के हमलों की घटनाएं देश के दूसरे हिस्सों में भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। इससे पहले छत्तीसगढ़ के कांकेर से ऐसी ही एक विचलित करने वाली खबर सामने आई थी, जहां स्कूल के पीछे छिपे एक भालू ने एक ही परिवार को उजाड़ दिया था और उस भालू के हमले में दो सगे भाई-बहन की जान चली गई थी। इसके अलावा राजस्थान के अजमेर में भी खेत की तरफ जा रही एक महिला पर भालू के हमले का मामला आया था, जहां उसे बचाने पहुंचे चार अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसका आप पर असर यह घटना वन्यजीवों के बढ़ते खतरे और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। • भारत में: जंगलों के पास और ग्रामीण बस्तियों में रहने वाले लोगों को जंगली जानवरों की आवाजाही को लेकर अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। वन विभाग के अभियानों के दौरान स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके। • कोझिकोड में: विलंगड और आसपास के इलाकों के निवासियों के लिए यह चेतावनी है कि वे फिलहाल अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रभावित परिवार को सरकार की ओर से घोषित 14 लाख रुपये की कुल सहायता में से 5 लाख रुपये की पहली किस्त जल्द मिलने की प्रक्रिया शुरू होगी। सवाल-जवाब 1. यह घटना कहां घटी? यह घटना केरल के कोझिकोड जिले के पास विलंगड की वायाड कॉलोनी में घटी। 2. सुनील की मौत कैसे हुई? वन अधिकारियों के साथ गौर के झुंड को खदेड़ते समय एक गौर के हमले में 40 वर्षीय सुनील की मौत हो गई। 3. विजेश की मौत का कारण क्या था? सुनील की मौत की दुखद खबर मिलने के बाद गहरे सदमे के कारण उनके चचेरे भाई विजेश को दिल का दौरा पड़ गया, जिससे उनकी जान चली गई। 4. ग्रामीणों ने क्या मांग रखी है? ग्रामीणों ने इलाके में जंगली जानवरों की समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन और सुनील के परिवार के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है। 5. सरकार की तरफ से कितना मुआवजा मिलने का प्रावधान है? ऐसे मामलों में वर्तमान नियमों के तहत 14 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें से 5 लाख रुपये की पहली किस्त जल्द दी जाएगी। https://trendkia.com/national/kerala-ke-kozhikode-men-gaur-ke-hamale-men-eka-vyakti-ki-jana-gai-sadame-se-chachere-bhai-ki-bhi-hui-mauta-24698 TrendKia — Har trend, sabse pehle.