# केरल विधानसभा में वंदे मातरम के गायन पर बवाल, नए प्रोटोकॉल उल्लंघन पर कानूनी पचड़े में फंसी सरकार

> केरल विधानसभा और राजकीय समारोहों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के संक्षिप्त गायन ने एक नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है, जिससे केंद्र सरकार के नए एसओपी नियमों के पालन पर बहस छिड़ गई है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/kerala-vidhanasabha-men-vande-mataram-ke-gayana-para-bavala-nae-protokola-ullnghana-para-kanuni-pachare-men-phnsi-sarakara-17613 · **Language:** Hindi
**Tags:** वंदे मातरम, केरल विधानसभा, गृह मंत्रालय नियम, राष्ट्रीय गीत विवाद, संसद कानून

केरल विधानसभा सत्र और राज्य के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का पूरा गायन न किए जाने से एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद पैदा हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर नए मानक संचालन तंत्र (एसओपी) लागू किए जाने के बाद यह स्थिति सामने आई। विधानसभा की कार्यवाही में सभी छह अंतरों को गाने के बजाय केवल शुरुआती दो अंतरे प्रस्तुत किए गए, जबकि कई सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगान जन-गण-मन को ही प्रमुखता दी गई। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नीत यूडीएफ प्रशासन राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर आ गया है।

## केंद्र सरकार के नए नियम और 2026 के निर्देश
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 2026 के इन निर्देशों के अनुसार, सभी आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों, विधानसभा सत्रों, राज्यपाल के भाषणों और स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस समारोहों में पूरे छह अंतरों का गायन अनिवार्य किया गया है। राष्ट्रीय गीत के पूर्ण गायन की निर्धारित अवधि 190 सेकंड अर्थात 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है।

नए प्रोटोकॉल में कार्यक्रमों के आयोजन क्रम और उपस्थिति से जुड़े नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। जिन समारोहों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों का आयोजन होता है, वहां पहले वंदे मातरम का पूरा गायन करना अनिवार्य है और उसके पश्चात जन-गण-मन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, आयोजनों में उपस्थित सभी व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय गीत के समय सावधान मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य बनाया गया है, जो राष्ट्रगान के समान ही सम्मान का प्रतीक है।

## केरल सरकार की सफाई और विपक्ष का हमला
विवाद बढ़ने पर केरल सरकार के मंत्रियों ने अपना पक्ष रखते हुए पुरानी परिपाटी का हवाला दिया। राज्य प्रशासन का तर्क है कि केरल में दशकों से राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरों को ही गाने की परंपरा चली आ रही है। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के राजनीतिक या धार्मिक विवाद से बचने के उद्देश्य से इस गायन को दो अंतरों तक सीमित रखा गया था और इसका उद्देश्य किसी राष्ट्रीय प्रतीक की अवहेलना करना नहीं था।

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी और राजभवन ने राज्य सरकार के इस रवैये पर कड़ा एतराज व्यक्त किया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद राज्य प्रशासन जानबूझकर राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत के प्रोटोकॉल की अनदेखी कर रहा है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि केंद्रीय नियमों का उल्लंघन करने के लिए स्थानीय परंपराओं का सहारा नहीं लिया जा सकता।

## दिग्गज नेताओं पर पुलिस शिकायत और विवाद
राष्ट्रीय गीत से जुड़ा यह विवाद अब पुलिस शिकायतों तक पहुंच गया है। ओडिशा भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष अभिलाष पांडा ने सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं ने राष्ट्रीय गीत के गायन में व्यवधान डाला और इसका अनादर किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, वंदे मातरम के गायन में रुकावट डालना एक दंडनीय अपराध है।

हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ताओं ने सफाई दी कि सोनिया गांधी केवल मंच पर काफी समय से खड़े मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगवाने का इशारा कर रही थीं। कांग्रेस का कहना है कि यह एक शिष्टाचार का कदम था और इसे राष्ट्रीय गीत के अपमान के रूप में प्रस्तुत करना पूरी तरह निराधार है।

## संसदीय संप्रभुता और विशेषज्ञों की कानूनी राय
कानूनी पहलुओं पर अपनी राय देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर सुमित कुमार ने बताया कि देश में कानून बनाने का सर्वाधिकार संसद के पास निहित है। संसद जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए उसके द्वारा बनाए गए कानून सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि 16 घंटे की व्यापक बहस के बाद पारित किए गए इस कानून को मानना सभी राज्य सरकारों का संवैधानिक दायित्व है।

प्रोफेसर सुमित कुमार ने आगे कहा कि नैतिक और कानूनी दोनों आधारों पर केरल सरकार को संसद के इन नियमों का पालन करना चाहिए, और यदि उल्लंघन हुआ है तो उन्हें क्षमा याचना करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रगान के समय खड़े न होने पर तुरंत सजा का प्रावधान लागू करना हमेशा व्यावहारिक नहीं होता, लेकिन संविधान की सर्वोपरिता को बनाए रखना प्रत्येक सरकारी तंत्र का प्राथमिक कर्तव्य है।

## प्रशासनिक जवाबदेही और नए कानून के तहत कार्रवाई
गृह मंत्रालय के सर्कुलर का अनुपालन न करने की स्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। राज्य विधानसभा और सरकारी आयोजनों में प्रोटोकॉल लागू करने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव, संबंधित विभागीय सचिवों और विधानसभा सचिव की होती है। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई, कारण बताओ नोटिस जारी करने या सेवा निलंबन के कदम उठाए जा सकते हैं।

कानूनी प्रावधानों के तहत, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 का दायरा काफी विस्तृत है। इस कानून की धारा 2 राष्ट्रीय ध्वज व संविधान के अपमान तथा धारा 3 राष्ट्रगान में बाधा डालने से संबंधित है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 के तहत राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा प्रदान किया गया है। नए नियमों के अंतर्गत राष्ट्रीय गीत का अनादर करने या उसके गायन को रोकने के दोषी पाए जाने पर दोषी संस्थाओं या व्यक्तियों को 3 साल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के प्रोटोकॉल को लेकर बने कड़े केंद्रीय नियम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आधिकारिक आयोजनों पर समान रूप से लागू होंगे।

**केरल में:** राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को अब सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पूर्ण गायन सुनिश्चित करना होगा, अन्यथा अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. केरल विधानसभा में वंदे मातरम को लेकर क्या विवाद हुआ है?
केरल विधानसभा और राज्य के स्वतंत्रता दिवस समारोहों में पूरे छह अंतरों के बजाय केवल पहले दो अंतरे गाए जाने पर विवाद खड़ा हुआ है।

### 2. केंद्र सरकार के नए एसओपी के तहत वंदे मातरम के गायन का क्या नियम है?
नए एसओपी के अनुसार आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य है, जिसकी निर्धारित अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) है।

### 3. क्या राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के आयोजन क्रम में कोई बदलाव किया गया है?
हां, नए दिशानिर्देशों के तहत यदि किसी आयोजन में दोनों शामिल हैं तो पहले वंदे मातरम पूरा गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान जन-गण-मन प्रस्तुत होगा।

### 4. नए कानून के तहत प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर क्या सजा हो सकती है?
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 के अंतर्गत राष्ट्रीय गीत का अनादर करने या रुकावट डालने पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।

### 5. सोनिया गांधी और अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस शिकायत क्यों दर्ज कराई गई?
ओडिशा भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष अभिलाष पांडा ने आरोप लगाया कि नेताओं ने राष्ट्रीय गीत के गायन में रुकावट डाली, हालांकि कांग्रेस ने कहा कि केवल कुर्सी मंगवाने का इशारा किया जा रहा था।

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