खरगे का गुस्सा फूटा मंच पर, बीके हरिप्रसाद के शपथ समारोह में 'डीके-डीके' नारों पर कार्यकर्ताओं को लगाई कड़ी फटकार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से फटकारा। उन्होंने वीडियो फुटेज देखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि यह कांग्रेस का कार्यक्रम है, किसी एक नेता का प्रचार मंच नहीं। कर्नाटक कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का शपथ ग्रहण समारोह रविवार को उस वक्त अजीब मोड़ पर आ गया, जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। 'डीके-डीके' के नारे बार-बार गूंजते देख कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का धैर्य टूट गया और उन्होंने मंच से ही कार्यकर्ताओं को खुलेआम खरी-खोटी सुनाई। मंच से सीधा संदेश खरगे ने बिना लाग-लपेट के कहा, 'चुप बैठिए… ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश आपके हाथ में आ गया हो। यूजलेस फेलोज!' उन्होंने साफ किया कि यह आयोजन कांग्रेस पार्टी का है और किसी एक नेता विशेष के नाम के नारे लगाना पार्टी की गरिमा के खिलाफ है। उनका कहना था कि सभी नेता और कार्यकर्ता यहां पार्टी को मजबूत और एकजुट करने के लिए आए हैं, इसलिए व्यक्तिगत समर्थन का यह मंच उचित जगह नहीं है। जब शोरगुल थमने का नाम नहीं ले रहा था, तब खरगे और तीखे हो गए। उन्होंने कहा, 'अगर एक व्यक्ति एक नाम चिल्लाए और दूसरा किसी दूसरे नेता का नाम, तो बाकी लोग यहां क्या कूड़ा साफ करने आए हैं?' इसके बाद उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा कि नारेबाजी करने वालों की पूरी फुटेज रिकॉर्ड है और वीडियो देखने के बाद वे उनके खिलाफ कदम उठाएंगे। शिवकुमार ने भी शांत कराने की कोशिश की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी इस स्थिति से असहज दिखे। कार्यक्रम के वीडियो में साफ देखा गया कि वे अपनी जगह से उठकर समर्थकों को बैठने और नारेबाजी बंद करने का इशारा कर रहे थे। हालांकि उनकी कोशिश बहुत कारगर नहीं रही और शोर जारी रहा, जिसके बाद खरगे को सख्त लहजे में हस्तक्षेप करना पड़ा। कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी तनातनी की पृष्ठभूमि इस घटना को सही संदर्भ में समझने के लिए कर्नाटक कांग्रेस की पिछले कुछ समय की राजनीति पर नजर डालना जरूरी है। 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी खींचतान चली। अंत में पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद से 'रोटेशन फॉर्मूला' की चर्चा चलती रही, जिसके तहत ढाई साल बाद नेतृत्व बदलने की बात कही जा रही थी। सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे होते ही शिवकुमार खेमे ने बदलाव का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। कांग्रेस हाईकमान ने आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए इस बदलाव को मंजूरी दी। 28 मई को सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और उसके कुछ दिनों बाद डीके शिवकुमार ने राज्य की कमान संभाली। गुटबाजी की आग अभी बुझी नहीं शपथ समारोह में हुई नारेबाजी और उस पर खरगे की तीखी प्रतिक्रिया को कर्नाटक कांग्रेस के भीतर जारी गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन की कोशिश के नजरिए से देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट दिखाना चाहता है, लेकिन रविवार की इस घटना ने यह साफ कर दिया कि दोनों खेमों के बीच की दूरी अभी पूरी तरह पाटी नहीं जा सकी है। इसका आप पर असर आम पाठक पर असर: • कर्नाटक में: सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर खुलेआम सामने आई गुटबाजी से राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं, जो 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शासन और विकास कार्यों को प्रभावित कर सकती है। • भारत में: कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन से पार्टी की राष्ट्रीय छवि पर असर पड़ सकता है और विपक्षी गठजोड़ की राजनीति जटिल हो सकती है। सवाल-जवाब 1. खरगे किस समारोह में नाराज हुए? वे कर्नाटक कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण समारोह में नाराज हुए। 2. कार्यकर्ता किसके समर्थन में नारे लगा रहे थे? कार्यकर्ता मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में 'डीके-डीके' के नारे लगा रहे थे। 3. खरगे ने कार्यकर्ताओं को क्या कहा? उन्होंने कहा, 'चुप बैठिए… यूजलेस फेलोज!' और चेतावनी दी कि वीडियो देखने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 4. क्या डीके शिवकुमार ने भी कोई प्रतिक्रिया दी? हां, वीडियो में वे खड़े होकर अपने समर्थकों को बैठने और नारेबाजी बंद करने का इशारा करते दिखे। 5. सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा कब दिया? सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। 6. डीके शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री कब बने? सिद्धारमैया के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 7. 'रोटेशन फॉर्मूला' क्या था? इस फॉर्मूले के तहत ढाई साल बाद मुख्यमंत्री का पद बदलने की बात थी, जिसके कारण अंततः शिवकुमार ने सिद्धारमैया की जगह ली। 8. यह घटना कर्नाटक कांग्रेस के लिए क्यों अहम है? इसे पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी की निशानी माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी 2028 के चुनाव से पहले एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। https://trendkia.com/national/kharge-ka-gussa-phuta-mncha-para-bk-hariprasad-ke-shapatha-samaroha-men-dk-dk-naron-para-karyakartaon-ko-lagai-kari-phatakara-2297 TrendKia — Har trend, sabse pehle.